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अबू आसिम आजमी का आरोप: एसआईआर में लापरवाही से लाखों मतदाताओं के नाम कटने का खतरा

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अबू आसिम आजमी का आरोप: एसआईआर में लापरवाही से लाखों मतदाताओं के नाम कटने का खतरा

सारांश

सपा के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है — बीएलओ घर-घर नहीं जा रहे, 300 से अधिक बीएलए की कमी है, और वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने का खतरा मँडरा रहा है। उन्होंने सत्तारूढ़ पक्ष पर चुनिंदा नाम हटाने का भी आरोप लगाया।

मुख्य बातें

अबू आसिम आजमी ने 3 सितंबर को मतदाता सूची के एसआईआर में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
बीएलओ को प्रत्येक घर में तीन बार जाना था, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
केवल आजमी के क्षेत्र में 300 से अधिक बीएलए की आवश्यकता बताई गई, जो तैनात नहीं हुए।
आजमी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर सकता है।
उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैया और मंत्री नितेश राणे पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप भी लगाया।
नागरिकों से अपील की कि नाम दर्ज कराने के लिए एनजीओ या राजनीतिक दलों से तत्काल संपर्क करें।

समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने 3 सितंबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अन्य सरकारी जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे होने के कारण एसआईआर को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे, जिससे वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने का जोखिम बढ़ गया है। आजमी ने उन नागरिकों से तत्काल अपील की जिनके नाम अभी तक दर्ज नहीं हुए हैं कि वे राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों या एनजीओ की सहायता लेकर प्रक्रिया पूरी करें।

एसआईआर में क्या हुई चूक

आजमी के अनुसार, नियमों के तहत बीएलओ को प्रत्येक घर में तीन बार जाकर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन यह अनिवार्यता व्यवहार में नहीं निभाई गई। उन्होंने बताया कि कई बीएलओ अपनी प्राथमिक सरकारी ड्यूटी निपटाने के बाद बचे हुए समय में ही एसआईआर का काम कर रहे थे, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।

आजमी ने यह भी बताया कि बीएलओ के साथ बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) तैनात किए जाने का प्रावधान था। केवल उनके अपने क्षेत्र में 300 से अधिक बीएलए की आवश्यकता थी। उन्होंने सरकार से माँग की कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए केवल उन्हीं कर्मियों की नियुक्ति हो जो पूरी तरह इस काम के लिए उपलब्ध हों।

मतदाताओं के नाम कटने की आशंका

आजमी ने मुंबई में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों पर कहा कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मतदाताओं के नाम उनके गाँव और मुंबई — दोनों जगह दर्ज थे, जिस कारण एक स्थान से नाम हटाया जाना स्वाभाविक हो सकता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष अपने समर्थक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता अनिवार्य है।

आजमी ने आगाह किया कि नाम कटने के बाद नागरिकों को अपनी नागरिकता को लेकर सवालों का सामना करना पड़ सकता है — एक ऐसी स्थिति जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर गहरा असर डाल सकती है।

राम मंदिर ट्रस्ट और अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया

राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ की नियुक्ति पर आजमी ने कहा कि मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्तर के नेताओं की रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया। चढ़ावे में कथित अनियमितता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नया सीईओ कोई भी हो, इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

दिशा सालियान मामले को सीबीआई को सौंपे जाने पर आजमी ने कहा कि यदि परिवार जाँच की माँग कर रहा है तो वे इसका स्वागत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना जाँच के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है और सीबीआई की रिपोर्ट आने तक इस पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा।

भाजपा नेताओं पर सीधा निशाना

मस्जिद के बाहर प्रदर्शन की बात कहने वाले भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) नेता किरीट सोमैया पर आजमी ने आरोप लगाया कि वे पार्टी नेतृत्व को यह दिखाने के लिए ऐसे बयान देते हैं कि वे संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे पर भी आजमी ने तीखी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि वे संवैधानिक पद पर रहते हुए सांप्रदायिक बयान देते हैं और सरकार उन्हें रोकने में विफल रही है। उन्होंने इसे 'गंदी राजनीति' करार दिया।

आजमी ने अंत में कहा कि सभी राजनीतिक दलों को धार्मिक और सामुदायिक मुद्दों के बजाय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप काम करना चाहिए। यह देखना होगा कि चुनाव आयोग एसआईआर की खामियों पर क्या कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ प्रवासी और स्थानीय — दोनों सूचियों में दोहराव आम है, पारदर्शी सत्यापन तंत्र के बिना किसी भी हटाव को राजनीतिक रंग मिलना स्वाभाविक है। सत्तारूढ़ पक्ष पर लगे आरोपों की विश्वसनीयता तभी परखी जा सकती है जब हटाए गए नामों का वर्गवार और क्षेत्रवार विश्लेषण सार्वजनिक हो।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है जिसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं। इसका उद्देश्य फर्जी, दोहरे या मृत मतदाताओं के नाम हटाना और नए पात्र नागरिकों को जोड़ना है।
अबू आसिम आजमी ने एसआईआर में क्या खामियाँ बताईं?
आजमी ने आरोप लगाया कि बीएलओ अन्य सरकारी ड्यूटी के कारण प्रत्येक घर में अनिवार्य तीन दौरे नहीं कर पाए। इसके अलावा उनके क्षेत्र में 300 से अधिक बीएलए की कमी रही, जिससे सत्यापन अधूरा रहा।
मुंबई में मतदाताओं के नाम क्यों काटे जा रहे हैं?
आजमी के अनुसार कुछ नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे गाँव और मुंबई — दोनों सूचियों में दर्ज थे। हालाँकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष चुनिंदा तरीके से विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर सकता है।
जिन मतदाताओं के नाम एसआईआर में नहीं आए, वे क्या करें?
आजमी ने ऐसे नागरिकों से अपील की है कि वे तत्काल राजनीतिक दलों के कार्यालयों, सामाजिक संगठनों या एनजीओ से संपर्क करें और आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करें।
आजमी ने किरीट सोमैया और नितेश राणे पर क्या आरोप लगाए?
आजमी ने भाजपा नेता किरीट सोमैया पर आरोप लगाया कि वे पार्टी को खुश करने के लिए उत्तेजक बयान देते हैं। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे पर उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक पद पर रहते हुए सांप्रदायिक बयान देते हैं और सरकार उन्हें रोकने में विफल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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