नीलाकुरिंजी फूल खिलने पर तमिलनाडु वन विभाग का प्रतिबंध, गुडालुर में पर्यटकों की एंट्री बंद
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु वन विभाग ने 28 जुलाई 2026 को गुडालुर क्षेत्र के उन संवेदनशील इलाकों में आम लोगों के प्रवेश पर सख़्त प्रतिबंध लगा दिया है, जहाँ दुर्लभ नीलाकुरिंजी (वैज्ञानिक नाम: स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना) के फूल खिले हुए हैं। 12 वर्षों में एक बार खिलने वाले इन बैंगनी-नीले फूलों को देखने के लिए पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों पर्यटक, फोटोग्राफर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इस इलाके में उमड़ पड़े थे, जिसके बाद विभाग को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
मुख्य घटनाक्रम
नीलाकुरिंजी के फूल इस बार नादुकानी, गुडालुर, ऊसिमलाई और ओ-वैली सहित कई स्थानों पर एक साथ खिले हैं। इस दुर्लभ प्राकृतिक घटना ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से ध्यान खींचा और देखते-देखते इन वन क्षेत्रों में पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ जमा होने लगी। बार-बार मौखिक चेतावनियाँ देने के बावजूद लोग प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसते रहे, जिसके चलते वन विभाग को औपचारिक प्रतिबंध लागू करना पड़ा।
वन्यजीव और पारिस्थितिकी को खतरा
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन स्थानों पर नीलाकुरिंजी खिली है, वे इलाके हाथियों और अन्य वन्यजीवों के आवास तथा आवागमन के प्रमुख गलियारों (कॉरिडोर) के भीतर या उनसे सटे हुए हैं। गुडालुर तमिलनाडु में मानव-हाथी संघर्ष के सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। वन अधिकारियों के अनुसार, इंसानों की बढ़ती मौजूदगी से वन्यजीव बाधित हो सकते हैं, नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है और मानव-वन्यजीव टकराव की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
कानूनी संरक्षण और दंड का प्रावधान
नादुकानी फ़ॉरेस्ट रेंज ऑफिसर रवि ने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2023 में नीलाकुरिंजी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची तृतीय में शामिल किया था, जिससे इस पौधे को विधिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति फूल तोड़ते या पौधों को क्षति पहुँचाते हुए पाया गया, तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, ₹25,000 का जुर्माना या दोनों दंड एक साथ भोगने पड़ सकते हैं।
आम जनता पर असर
वन विभाग ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अनुरोध किया है कि वे नीलाकुरिंजी के खिलने वाले स्थानों पर जाने से परहेज़ करें और इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व का सम्मान करें। अनधिकृत प्रवेश, फूल तोड़ने या संरक्षित पौधों को नुकसान पहुँचाने की किसी भी सूचना के लिए विभाग ने गुडालुर वन प्रभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-4353 जारी की है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब पर्यावरण-पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना देशभर में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। गौरतलब है कि नीलाकुरिंजी का पिछला फूलना 2006 और 2018 में हुआ था और तब भी अनियंत्रित पर्यटन ने इस नाज़ुक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाया था। विभाग का कहना है कि प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक फूलों का मौसम समाप्त नहीं हो जाता।