28 जुलाई 2026
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नीलाकुरिंजी फूल खिलने पर तमिलनाडु वन विभाग का प्रतिबंध, गुडालुर में पर्यटकों की एंट्री बंद

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नीलाकुरिंजी फूल खिलने पर तमिलनाडु वन विभाग का प्रतिबंध, गुडालुर में पर्यटकों की एंट्री बंद

सारांश

12 साल में एक बार खिलने वाले नीलाकुरिंजी फूलों को देखने उमड़ी भीड़ ने गुडालुर के हाथी गलियारों को खतरे में डाल दिया। तमिलनाडु वन विभाग ने अब प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है — फूल तोड़ने पर 3 साल जेल और ₹25,000 जुर्माने का प्रावधान है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु वन विभाग ने 28 जुलाई 2026 को गुडालुर क्षेत्र में नीलाकुरिंजी खिलने वाले स्थानों पर आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया।
दुर्लभ नीलाकुरिंजी ( स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना ) 12 वर्षों में एक बार खिलती है; इस बार नादुकानी, ऊसिमलाई और ओ-वैली में भी फूल आए हैं।
फूल तोड़ने या पौधों को नुकसान पहुँचाने पर 3 वर्ष की जेल और ₹25,000 जुर्माना — वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत।
2023 में केंद्र सरकार ने नीलाकुरिंजी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची तृतीय में शामिल कर इसे कानूनी सुरक्षा दी।
गुडालुर तमिलनाडु का प्रमुख मानव-हाथी संघर्ष क्षेत्र है; फूलों वाले इलाके हाथियों के आवागमन गलियारों में पड़ते हैं।
शिकायत के लिए गुडालुर वन प्रभाग हेल्पलाइन: 1800-425-4353 ।

तमिलनाडु वन विभाग ने 28 जुलाई 2026 को गुडालुर क्षेत्र के उन संवेदनशील इलाकों में आम लोगों के प्रवेश पर सख़्त प्रतिबंध लगा दिया है, जहाँ दुर्लभ नीलाकुरिंजी (वैज्ञानिक नाम: स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना) के फूल खिले हुए हैं। 12 वर्षों में एक बार खिलने वाले इन बैंगनी-नीले फूलों को देखने के लिए पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों पर्यटक, फोटोग्राफर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इस इलाके में उमड़ पड़े थे, जिसके बाद विभाग को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

नीलाकुरिंजी के फूल इस बार नादुकानी, गुडालुर, ऊसिमलाई और ओ-वैली सहित कई स्थानों पर एक साथ खिले हैं। इस दुर्लभ प्राकृतिक घटना ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से ध्यान खींचा और देखते-देखते इन वन क्षेत्रों में पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ जमा होने लगी। बार-बार मौखिक चेतावनियाँ देने के बावजूद लोग प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसते रहे, जिसके चलते वन विभाग को औपचारिक प्रतिबंध लागू करना पड़ा।

वन्यजीव और पारिस्थितिकी को खतरा

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन स्थानों पर नीलाकुरिंजी खिली है, वे इलाके हाथियों और अन्य वन्यजीवों के आवास तथा आवागमन के प्रमुख गलियारों (कॉरिडोर) के भीतर या उनसे सटे हुए हैं। गुडालुर तमिलनाडु में मानव-हाथी संघर्ष के सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। वन अधिकारियों के अनुसार, इंसानों की बढ़ती मौजूदगी से वन्यजीव बाधित हो सकते हैं, नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है और मानव-वन्यजीव टकराव की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

कानूनी संरक्षण और दंड का प्रावधान

नादुकानी फ़ॉरेस्ट रेंज ऑफिसर रवि ने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2023 में नीलाकुरिंजी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची तृतीय में शामिल किया था, जिससे इस पौधे को विधिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति फूल तोड़ते या पौधों को क्षति पहुँचाते हुए पाया गया, तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, ₹25,000 का जुर्माना या दोनों दंड एक साथ भोगने पड़ सकते हैं।

आम जनता पर असर

वन विभाग ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अनुरोध किया है कि वे नीलाकुरिंजी के खिलने वाले स्थानों पर जाने से परहेज़ करें और इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व का सम्मान करें। अनधिकृत प्रवेश, फूल तोड़ने या संरक्षित पौधों को नुकसान पहुँचाने की किसी भी सूचना के लिए विभाग ने गुडालुर वन प्रभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-4353 जारी की है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब पर्यावरण-पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना देशभर में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। गौरतलब है कि नीलाकुरिंजी का पिछला फूलना 2006 और 2018 में हुआ था और तब भी अनियंत्रित पर्यटन ने इस नाज़ुक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचाया था। विभाग का कहना है कि प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक फूलों का मौसम समाप्त नहीं हो जाता।

संपादकीय दृष्टिकोण

अनियंत्रित भीड़, और फिर आपातकालीन प्रतिबंध। सवाल यह है कि क्या वन विभाग के पास इस बार कोई पूर्व-नियोजित प्रबंधन योजना थी, या यह प्रतिबंध भी पिछली बार की तरह प्रतिक्रियात्मक कदम मात्र है। गुडालुर जैसे मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्र में पर्यटन प्रबंधन की विफलता केवल पारिस्थितिकी का नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का भी प्रश्न है। 2006 और 2018 के अनुभवों के बावजूद यदि कोई संरचनात्मक तंत्र नहीं बना, तो 2038 में भी यही कहानी दोहराई जाएगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीलाकुरिंजी फूल क्या है और यह इतना दुर्लभ क्यों है?
नीलाकुरिंजी (स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना) एक झाड़ीनुमा पौधा है जिसमें बैंगनी-नीले रंग के फूल केवल 12 वर्षों में एक बार खिलते हैं। इसी दुर्लभता के कारण इसका खिलना एक असाधारण प्राकृतिक घटना मानी जाती है और यह पर्यटकों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करती है।
तमिलनाडु वन विभाग ने गुडालुर में प्रवेश क्यों बंद किया?
वन विभाग ने प्रतिबंध इसलिए लगाया क्योंकि नीलाकुरिंजी खिलने वाले स्थान हाथियों के आवागमन गलियारों में हैं और वहाँ पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़ से वन्यजीवों के बाधित होने और मानव-हाथी टकराव का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। बार-बार मौखिक चेतावनी के बाद भी लोग प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसते रहे।
नीलाकुरिंजी फूल तोड़ने पर क्या सज़ा है?
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची तृतीय के तहत नीलाकुरिंजी को कानूनी संरक्षण प्राप्त है। फूल तोड़ने या पौधों को नुकसान पहुँचाने पर तीन वर्ष तक की कैद, ₹25,000 का जुर्माना या दोनों दंड एक साथ लगाए जा सकते हैं।
नीलाकुरिंजी इस बार कहाँ-कहाँ खिली है?
2026 में नीलाकुरिंजी नादुकानी, गुडालुर, ऊसिमलाई और ओ-वैली सहित कई स्थानों पर खिली है। ये सभी स्थान नीलगिरि जिले के पर्यावरण-संवेदनशील वन क्षेत्रों में आते हैं।
गुडालुर में वन्यजीव उल्लंघन की शिकायत कहाँ करें?
गुडालुर वन प्रभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-4353 पर अनधिकृत प्रवेश, फूल तोड़ने या संरक्षित पौधों को नुकसान पहुँचाने की सूचना दी जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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