तमिलनाडु मतगणना शुरू: DMK, AIADMK और TVK के बीच कड़े मुकाबले में किसका होगा राज?
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए वोटों की गिनती सोमवार, 4 मई को सुबह 8 बजे शुरू हो गई। चेन्नई समेत राज्य के 62 गिनती केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच 234 विधानसभा सीटों के नतीजे तय होने लगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार के नतीजों का अनुमान लगाना पिछले कई दशकों में सबसे कठिन रहा है।
मतगणना का पूरा परिदृश्य
23 अप्रैल को हुए मतदान में राज्य के कुल 5.73 करोड़ मतदाताओं में से 4.88 करोड़ ने अपना वोट डाला, जिससे मतदान प्रतिशत 85.10% रहा — जो राज्य के चुनावी इतिहास में उल्लेखनीय आँकड़ा है। मैदान में कुल 4,023 उम्मीदवार हैं। इस बार नए राजनीतिक दलों के उभरने, स्थापित नेताओं के बीच आंतरिक मतभेद और मतदाता सूची के बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण ने चुनावी समीकरण को बेहद जटिल बना दिया है।
DMK के लिए ऐतिहासिक अवसर
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के लिए यह चुनाव असाधारण महत्व रखता है। यदि पार्टी जीत हासिल करती है, तो यह 1971 के बाद पहली बार होगा जब DMK लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी — यानी 55 वर्षों का यह सूखा खत्म होगा। स्टालिन की कल्याणकारी नीतियों की सफलता भी इसी जीत से आँकी जाएगी।
AIADMK की वापसी की उम्मीद
विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रही ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) भी एक ऐतिहासिक पल की दावेदार है। दिवंगत नेता जे. जयललिता के निधन के बाद यह पार्टी की पहली संभावित विधानसभा जीत होगी। AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी यदि सत्ता में लौटते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने एक से अधिक बार मुख्यमंत्री पद संभाला है।
TVK और नए राजनीतिक समीकरण
इस चुनाव का सबसे रोचक पहलू अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) का प्रदर्शन है। यदि TVK उल्लेखनीय सीटें जीतती है, तो इसकी तुलना एम.जी. रामचंद्रन के राजनीतिक उदय से की जा रही है — जो तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक उलटफेर होगा। वहीं, सीमान की पार्टी नाम तमिलर काची (NTK) भले ही सत्ता की प्रमुख दावेदार नहीं है, लेकिन करीबी सीटों पर उसके वोट शेयर का असर निर्णायक साबित हो सकता है।
आगे क्या
गौरतलब है कि तमिलनाडु की राजनीति में परंपरागत रूप से सत्ता-विरोधी लहर प्रबल रही है, जिससे DMK और AIADMK दोनों बारी-बारी सत्ता में आते रहे हैं। इस बार TVK जैसे नए खिलाड़ी की उपस्थिति इस परंपरागत द्विध्रुवीय समीकरण को चुनौती दे सकती है। नतीजे न केवल राज्य की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की रणनीतियों को भी प्रभावित करेंगे।