तमिलनाडु: सरकारी हॉस्टल छात्रों के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम शुरू, मंत्री वन्नी अरासु ने किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को चेन्नई स्थित आदि द्रविड़ कल्याण निदेशालय में सरकारी हॉस्टलों के छात्रों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य भोजन, बुनियादी सुविधाओं और अन्य समस्याओं से जूझ रहे छात्रों को सीधे और तत्काल राहत प्रदान करना है।
कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली
सामाजिक न्याय विभाग के अधीन संचालित इस कंट्रोल रूम तक छात्र फोन और व्हाट्सऐप नंबर के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के ज़रिए भी समस्याएँ साझा की जा सकती हैं। कंट्रोल रूम में दर्ज प्रत्येक शिकायत को तत्काल संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निगरानी और समीक्षा व्यवस्था
विभाग के निदेशक प्रतिदिन प्राप्त शिकायतों और उनके निपटारे की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा, शिकायतों और उनके समाधान से संबंधित साप्ताहिक रिपोर्ट सामाजिक न्याय मंत्री और सामाजिक न्याय विभाग के सचिव को सौंपी जाएगी। यह दोहरी निगरानी संरचना शिकायतों के लंबित रहने की संभावना को कम करने के लिए बनाई गई है।
मंत्री की छात्रों से सीधी बातचीत
कंट्रोल रूम का उद्घाटन करने के बाद मंत्री वन्नी अरासु ने हॉस्टलों में रह रहे छात्रों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और छात्र कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब सरकारी हॉस्टलों में सुविधाओं को लेकर छात्रों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
उद्घाटन में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी
इस अवसर पर आदि द्रविड़ एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सरकारी सचिव डॉ. एन. सुब्बैयन (आईएएस), आदि द्रविड़ कल्याण निदेशक का पूर्ण अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे डॉ. के. सेंथिलराज (आईएएस), जनजातीय कल्याण निदेशक एस. अन्नादुरई और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आम जनता पर असर
यह कंट्रोल रूम विशेष रूप से आदि द्रविड़ (अनुसूचित जाति) समुदाय के उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो दूरदराज़ के क्षेत्रों से आकर इन सरकारी हॉस्टलों में रहते हुए पढ़ाई करते हैं। एक सुलभ और त्वरित शिकायत तंत्र इन छात्रों को अधिकारियों तक सीधी पहुँच प्रदान करेगा, जो अब तक उनके लिए कठिन था। यदि यह प्रणाली प्रभावी रही, तो इसे अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।