टीसीएस कर्मचारी आत्महत्या: सुसाइड नोट के आधार पर तीन आरोपियों पर BNS की धारा 108 के तहत FIR
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के भोसरी पुलिस स्टेशन में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के 48 वर्षीय कर्मचारी अमित अभय ब्रह्मे की आत्महत्या के मामले में 9 जून 2026 को तीन लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और धारा 35 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मृतक ने 2 जून 2026 को आत्महत्या की थी और घटनास्थल से मिले विस्तृत सुसाइड नोट में उन्होंने कार्यस्थल पर कथित उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का विवरण दिया था।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था
सुसाइड नोट के अनुसार, अमित ब्रह्मे ने TCS में अपनी दो महिला सहकर्मियों — अर्चना और श्वेता — पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि दोनों सहकर्मी समय-समय पर उनका अपमान करती थीं और उन्हें लगातार धमकाया जाता था कि उनकी प्रोजेक्ट रेटिंग खराब कर दी जाएगी।
नोट में यह भी उल्लेख है कि जब उनके पिता गंभीर रूप से बीमार थे और उनकी पत्नी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, तब भी उन्हें छुट्टी लेने में कथित तौर पर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और इस दौरान मानसिक दबाव बना रहा।
तीसरे आरोपी पर आरोप
सुसाइड नोट में अमित के मित्र विनोद पालिचा का भी जिक्र है। नोट के अनुसार, पालिचा ने कथित तौर पर TCS प्रबंधन को उनके बारे में गलत और भ्रामक ईमेल भेजे, जिससे उनकी कार्यस्थल पर छवि को नुकसान पहुँचा। इसके अतिरिक्त उन पर पुलिस में झूठी शिकायत कराने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है।
गौरतलब है कि सुसाइड नोट में लगाए गए ये आरोप अभी कथित हैं — पुलिस जाँच अभी प्रारंभिक चरण में है और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है।
पुलिस की कार्रवाई और जाँच
एसीपी सुधाकर यादव ने बताया कि सुसाइड नोट में दर्ज आरोपों के आधार पर अर्चना, श्वेता और विनोद पालिचा के विरुद्ध भोसरी पुलिस स्टेशन में 9 जून 2026 को FIR दर्ज की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जाँच अभी शुरुआती दौर में है और सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी और जाँच निष्पक्ष रूप से जारी है।
पीड़ित परिवार की स्थिति
अमित ब्रह्मे के परिवार में उनकी पत्नी — जो कैंसर से पीड़ित हैं — और एक बेटा है। परिवार इस दोहरी त्रासदी से गुज़र रहा है। यह मामला कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और उत्पीड़न-रोधी नीतियों की प्रभावशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आगे क्या होगा
पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया में है। BNS धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है, जो एक संज्ञेय अपराध है। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद मामला न्यायालय के समक्ष जाएगा।