16 अगस्त 2026
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टिहरी में किसानों की वृद्धावस्था सुरक्षा पर कार्यशाला, ₹250 मासिक निवेश से मिलेगी पेंशन

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टिहरी में किसानों की वृद्धावस्था सुरक्षा पर कार्यशाला, ₹250 मासिक निवेश से मिलेगी पेंशन

सारांश

टिहरी के चंबा में 'बीज एनपीएस का, फसल पेंशन की' कार्यशाला ने पर्वतीय किसानों को वित्तीय आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया — मात्र ₹250 मासिक निवेश से वृद्धावस्था में पेंशन का सपना अब हकीकत बन सकता है।

मुख्य बातें

16 मई 2026 को विकासखंड सभागार, चंबा, टिहरी में किसानों की वृद्धावस्था आर्थिक सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित हुई।
कार्यशाला का नाम 'बीज एनपीएस का, फसल पेंशन की' रखा गया; लीड बैंक नई टिहरी और पीएफआरडीए ने संयुक्त रूप से आयोजन किया।
मात्र ₹250 प्रति माह के निवेश से किसान राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के जरिए वृद्धावस्था सुरक्षा पा सकते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल , खंड विकास अधिकारी शाकिर हुसैन , नाबार्ड के ए.
शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
किसानों, युवा उद्यमियों और एफपीओ सदस्यों ने कार्यशाला में भाग लिया और पहल को आवश्यक बताया।

उत्तराखंड के टिहरी जिले के विकासखंड सभागार, चंबा में 16 मई 2026 को किसानों की वृद्धावस्था आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। लीड बैंक, नई टिहरी और पेंशन फंड निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के किसानों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से जोड़कर उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना था। कार्यशाला को 'बीज एनपीएस का, फसल पेंशन की' नाम दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

देश के संगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और भविष्य निधि जैसी सुविधाएँ मिलती हैं, लेकिन किसान और असंगठित क्षेत्र के मजदूर अब भी इस सुरक्षा कवच से प्रायः वंचित रहते हैं। इसी असमानता को दूर करने की दिशा में यह कार्यशाला एक ठोस कदम के रूप में देखी जा रही है। टिहरी गढ़वाल जैसे पर्वतीय जिले में, जहाँ कृषि आय सीमित और मौसम-निर्भर है, वृद्धावस्था में आय का नियमित स्रोत न होना एक गंभीर सामाजिक चुनौती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल कृषि आय पर निर्भर रहकर दीर्घकालिक आर्थिक जरूरतें पूरी करना कठिन हो सकता है। ऐसे में छोटी-छोटी बचत और नियमित निवेश की आदत किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

एनपीएस से कैसे जुड़ सकते हैं किसान

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के सहायक प्रबंधक सचिन राठी ने कार्यशाला में बताया कि एनपीएस केवल एक निवेश माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि मात्र ₹250 प्रति माह के नियमित निवेश से कोई भी किसान अपनी वृद्धावस्था को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकता है। यदि यह निवेश लंबे समय तक जारी रखा जाए, तो सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन के रूप में नियमित आय सुनिश्चित हो सकती है।

कार्यशाला में उपस्थित मुख्य विकास अधिकारी, टिहरी गढ़वाल, वरुणा अग्रवाल और अन्य विशेषज्ञों ने किसानों को एनपीएस की पूरी प्रक्रिया, लाभ और पंजीकरण के तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रणाली से किसान, खेतिहर मजदूर और असंगठित क्षेत्र से जुड़े तमाम लोग लाभ उठा सकते हैं।

कार्यशाला में मौजूद अधिकारी और विशेषज्ञ

इस कार्यशाला में खंड विकास अधिकारी, चंबा, शाकिर हुसैन; पीएफआरडीए के सहायक प्रबंधक शुभम खंडेलवाल; राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के सहायक महाप्रबंधक दीपक ममगाईं; मुख्य प्रबंधक राजीव कुमार सिंह; नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ए. एन. शुक्ला तथा नई टिहरी के जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक मनीष मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल रहे।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान, युवा उद्यमी और एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के सदस्यों ने भी भाग लिया। एफपीओ सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस पहल को अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।

आम किसान पर असर

वित्तीय विशेषज्ञों ने कार्यशाला में रेखांकित किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेती से होने वाली आय अनिश्चित और मौसम-आधारित होती है। ऐसे में बुढ़ापे में आय का कोई वैकल्पिक स्रोत न होने पर किसान परिवारों पर आश्रित हो जाते हैं। एनपीएस जैसी योजनाओं से जुड़कर वे वृद्धावस्था में आर्थिक रूप से स्वतंत्र रह सकते हैं और अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

आगे की राह

यह कार्यशाला किसानों को वित्तीय साक्षरता की दिशा में जागरूक करने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के आयोजन जिले के अन्य विकासखंडों में भी किए जाने की योजना है। टिहरी में शुरू हुई यह पहल यदि व्यापक स्तर पर लागू हो, तो उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों की आर्थिक सुरक्षा की तस्वीर बदल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती जागरूकता से आगे पंजीकरण और निरंतर निवेश तक पहुँचने की है। पर्वतीय उत्तराखंड में जहाँ इंटरनेट और बैंकिंग पहुँच अब भी सीमित है, वहाँ ₹250 मासिक की निरंतरता सुनिश्चित करना बड़ी बाधा है। सरकार और बैंकों को केवल कार्यशाला तक सीमित न रहकर ग्राम-स्तरीय सुविधा केंद्र और डिजिटल ऑनबोर्डिंग की व्यवस्था करनी होगी — अन्यथा यह पहल भी केवल एक आयोजन बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टिहरी में किसानों के लिए आयोजित एनपीएस कार्यशाला क्या थी?
यह 16 मई 2026 को चंबा, टिहरी में लीड बैंक नई टिहरी और पीएफआरडीए द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यशाला थी, जिसका उद्देश्य किसानों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से जोड़कर उनकी वृद्धावस्था आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना था। कार्यशाला को 'बीज एनपीएस का, फसल पेंशन की' नाम दिया गया।
किसान एनपीएस में कितने रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं?
एनपीएस के सहायक प्रबंधक सचिन राठी के अनुसार, मात्र ₹250 प्रति माह के नियमित निवेश से कोई भी किसान एनपीएस में शामिल हो सकता है। यदि यह निवेश लंबे समय तक जारी रखा जाए, तो वृद्धावस्था में पेंशन के रूप में नियमित आय मिल सकती है।
एनपीएस से किसानों को क्या फायदा होगा?
एनपीएस से जुड़कर किसान, खेतिहर मजदूर और असंगठित क्षेत्र के लोग वृद्धावस्था में आय का एक नियमित स्रोत पा सकते हैं। इससे उन्हें बुढ़ापे में अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए परिवार या दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इस कार्यशाला में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हुए?
कार्यशाला में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल , खंड विकास अधिकारी शाकिर हुसैन , पीएफआरडीए के शुभम खंडेलवाल , नाबार्ड के ए. एन. शुक्ला , दीपक ममगाईं , राजीव कुमार सिंह और जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक मनीष मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या एफपीओ सदस्य भी एनपीएस का लाभ उठा सकते हैं?
हाँ, कार्यशाला में एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के सदस्यों ने भी भाग लिया और पहल को सकारात्मक बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, एनपीएस किसानों के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के लिए उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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