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तेलंगाना: एससी-एसटी यौन उत्पीड़न पीड़ितों को 'ग्रीन चैनल' से मुआवजा देने का रेवंत रेड्डी का निर्देश

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तेलंगाना: एससी-एसटी यौन उत्पीड़न पीड़ितों को 'ग्रीन चैनल' से मुआवजा देने का रेवंत रेड्डी का निर्देश

सारांश

तेलंगाना में राज्य गठन के बाद पहली बार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अत्याचार निवारण अधिनियम की समीक्षा बैठक हुई। रेवंत रेड्डी ने एससी-एसटी यौन उत्पीड़न पीड़ितों को 'ग्रीन चैनल' से त्वरित मुआवजा देने का निर्देश दिया — यह कदम उस पुरानी समस्या से टकराता है जहाँ पीड़ित प्रशासनिक देरी के शिकार होते आए हैं।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी ने 22 सितंबर 2026 को एससी-एसटी यौन उत्पीड़न पीड़ितों को 'ग्रीन चैनल' से मुआवजा देने का निर्देश दिया।
राज्य गठन के बाद यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई।
'इंदिरम्मा' आवास योजना के कुल लाभार्थियों में दलितों की हिस्सेदारी 31% और अनुसूचित जनजातियों की 17% रही।
सरकार नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के 27.5 लाख छात्रों को नाश्ता उपलब्ध करा रही है।
सीएम ने शिक्षा को हाशिए पर पड़े समुदायों के विकास की कुंजी बताते हुए राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की अपील की।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के यौन उत्पीड़न पीड़ितों को मुआवजे की धनराशि 'ग्रीन चैनल' के माध्यम से बिना विलंब जारी की जाए। यह निर्देश हैदराबाद में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन पर आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में दिया गया।

ऐतिहासिक बैठक: राज्य गठन के बाद पहली बार

तेलंगाना राज्य के गठन के बाद यह पहला अवसर था जब मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस अधिनियम पर राज्यस्तरीय उच्चस्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक में अधिनियम के कार्यान्वयन की व्यापक समीक्षा की गई — जिसमें दर्ज मामलों की स्थिति, जाँच की प्रगति, अदालती कार्यवाही, मामलों के निपटारे की गति और पीड़ितों को अब तक दी गई सहायता एवं पुनर्वास सेवाओं का आकलन शामिल था।

मुख्यमंत्री की मुख्य घोषणाएँ

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि सरकार यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर मानवीय आधार पर कार्रवाई कर रही है और पीड़ितों को त्वरित राहत सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। उन्होंने जोर दिया कि एससी और एसटी समुदायों के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनमें राज्य के दलित और आदिवासी वर्गों को उत्तम चावल एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना भी शामिल है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार राज्यभर में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के 27.5 लाख छात्रों को नाश्ता प्रदान कर रही है। उनके अनुसार, शिक्षा ही हाशिए पर पड़े समुदायों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती है।

'इंदिरम्मा' योजना और जनसंख्या-आधारित आवंटन

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की विरासत से प्रेरणा लेते हुए जनसंख्या के अनुपात में संसाधनों का आवंटन कर रही है। 'इंदिरम्मा' आवास योजना के कुल लाभार्थियों में दलितों की संख्या 31 प्रतिशत रही, जबकि स्वीकृत घरों में से 17 प्रतिशत अनुसूचित जनजातियों के लिए निर्धारित किए गए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने एससी और एसटी समुदायों को 25 लाख एकड़ भूमि के पट्टे वितरित किए थे।

आम जनता पर असर

ग्रीन चैनल व्यवस्था का सबसे सीधा लाभ उन पीड़ितों को मिलेगा जो अब तक मुआवजे के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फँसे रहते थे। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर एससी-एसटी समुदायों पर अत्याचार के मामलों में वृद्धि को लेकर चिंताएँ जताई जाती रही हैं। गौरतलब है कि अत्याचार निवारण अधिनियम में पीड़ितों को त्वरित राहत देने का प्रावधान है, लेकिन अक्सर धन वितरण में देरी एक बड़ी बाधा रही है।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने समिति के सदस्यों और संबंधित समुदायों से राजनीति से ऊपर उठकर इन वर्गों के विकास के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा, 'आइए, राजनीति से ऊपर उठकर इन समुदायों के विकास के लिए काम करें।' अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मुआवजा वितरण में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित की जाएँ। आने वाले हफ्तों में इस बैठक के निर्णयों के क्रियान्वयन की निगरानी की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — अतीत में ऐसे निर्देश अक्सर फाइलों में दब जाते थे। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना सहित कई राज्यों में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की सुस्ती एक गंभीर चिंता रही है। राज्य गठन के बाद पहली बार इस अधिनियम पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाना राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत है, लेकिन बैठकों की संख्या नहीं, पीड़ितों को मिलने वाला वास्तविक मुआवजा ही इस सरकार की जवाबदेही तय करेगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में एससी-एसटी पीड़ितों के लिए 'ग्रीन चैनल' क्या है?
'ग्रीन चैनल' एक त्वरित वित्तीय वितरण व्यवस्था है जिसके तहत एससी-एसटी यौन उत्पीड़न पीड़ितों को मुआवजा बिना लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के सीधे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 22 सितंबर 2026 को अधिकारियों को यह निर्देश दिया।
अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की समीक्षा बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
तेलंगाना राज्य गठन के बाद यह पहली बार था कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस अधिनियम पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में दर्ज मामलों की जाँच, अदालती कार्यवाही और पीड़ितों को दी गई सहायता की व्यापक समीक्षा की गई।
'इंदिरम्मा' आवास योजना में दलितों और आदिवासियों को कितना हिस्सा मिला?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अनुसार, 'इंदिरम्मा' आवास योजना के कुल लाभार्थियों में दलितों की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रही।
तेलंगाना सरकार एससी-एसटी छात्रों के लिए क्या कर रही है?
राज्य सरकार नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के 27.5 लाख छात्रों को नाश्ता उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा को हाशिए पर पड़े समुदायों के जीवन में बदलाव की सबसे बड़ी कुंजी बताया।
क्या तेलंगाना में एससी-एसटी पीड़ितों को मुआवजा पहले मिलता था?
अत्याचार निवारण अधिनियम में पीड़ितों को त्वरित राहत का प्रावधान है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार धन वितरण में प्रशासनिक देरी एक प्रमुख बाधा रही है। 'ग्रीन चैनल' इसी देरी को दूर करने के लिए तैयार किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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