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तेलंगाना हाईकोर्ट ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना पर फैसला 22 अप्रैल तक टाला

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तेलंगाना हाईकोर्ट ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना पर फैसला 22 अप्रैल तक टाला

सारांश

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर निर्णय 22 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है। इस मामले में घोष कमीशन की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की गई है।

मुख्य बातें

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला 22 अप्रैल तक टाला है।
याचिकाओं में घोष कमीशन की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री के.
चंद्रशेखर राव ने रिपोर्ट को चुनौती दी है।

हैदराबाद, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उनके साथ तीन अन्य द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर अपना फैसला 22 अप्रैल तक टाल दिया।

इन याचिकाओं में जस्टिस पी.सी. घोष कमीशन की रिपोर्ट को रद्द करने और इसे अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। यह कमीशन कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रहा था।

पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व मुख्य सचिव एस.के. जोशी, तथा वर्तमान आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल ने रिपोर्ट को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं।

याचिकाओं पर दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहिउद्दीन की बेंच ने पिछले महीने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। इसे बुधवार को सुनाया जाना था लेकिन आदेश तैयार नहीं थे। इसलिए सुनवाई अब 22 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

अदालत ने घोष कमीशन की रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर चारों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को रोकने का आदेश भी बढ़ा दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू पेश हुए जबकि राज्य सरकार व घोष कमीशन की ओर से एडवोकेट जनरल ए. सुदर्शन रेड्डी और वरिष्ठ वकील एस. निरंजन रेड्डी ने दलीलें दीं।

कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना को दुनिया की सबसे बड़ी मल्टी-स्टेज लिफ्ट सिंचाई योजना माना जाता है। यह परियोजना मई 2016 में उस समय की बीआरएस सरकार द्वारा शुरू की गई थी। योजना के मुख्य हिस्से का उद्घाटन 2019 में उस समय के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने किया था।

अदालत के फैसले के स्थगित होने के बाद अब सभी पक्ष 22 अप्रैल को सुनवाई के लिए तैयार हैं और तब अंतिम आदेश का ऐलान किया जाएगा। मार्च 2024 में कांग्रेस सरकार ने कालेश्वरम परियोजना के मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला बैराज की योजना, डिजाइन, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, संचालन और रखरखाव में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया।

इस आयोग ने 31 जुलाई 2025 को अपनी रिपोर्ट तेलंगाना सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में कालेश्वरम परियोजना की योजना बनाने, कार्यान्वयन, पूरा होने, संचालन और रखरखाव में हुई गड़बड़ियों के लिए सीधे तौर पर के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके अलावा आयोग ने पूर्व मंत्री हरीश राव, तत्कालीन मुख्य सचिव एस.के. जोशी और तत्कालीन आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल पर भी आरोप लगाए।

हालांकि, इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए चारों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अपनी याचिकाएं दायर कीं। सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने आयोग के निष्कर्षों को गलत बताया और अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल को आयोग की जांच के दौरान भारतीय कानून के सेक्शन 8बी और 8सी के तहत आवश्यक नोटिस नहीं दिए गए। इसके चलते उनकी तरफ से उचित सुनवाई का अवसर नहीं मिल पाया।

अदालत में पेश किए गए तर्कों के अनुसार आयोग के निष्कर्षों में कई पहलुओं को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना तैयार किया गया है, जिससे याचिकाकर्ताओं का पक्ष पूरी तरह नहीं सुना जा सका। इस मुद्दे पर तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह न केवल पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि इससे राज्य की जल प्रबंधन नीतियों पर भी असर पड़ेगा। सभी पक्षों को सुनवाई के लिए 22 अप्रैल का इंतजार है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला क्यों टाला?
तेलंगाना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला 22 अप्रैल तक स्थगित किया है, जिसमें घोष कमीशन की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की गई है।
घोष कमीशन की रिपोर्ट में क्या आरोप हैं?
घोष कमीशन की रिपोर्ट में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना में गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य पर जिम्मेदारी डाली गई है।
राष्ट्र प्रेस
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