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दिल्ली में बीआरएस टीम ने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से कालेश्वरम मामले पर चर्चा की

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दिल्ली में बीआरएस टीम ने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से कालेश्वरम मामले पर चर्चा की

सारांश

बीआरएस के तीन सदस्यीय दल ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से मिलकर कालेश्वरम परियोजना में अनियमितताओं और विधायकों की अयोग्यता पर चर्चा की। यह यात्रा महत्वपूर्ण कानूनी रणनीतियों को तय करने के लिए की गई है।

मुख्य बातें

बीआरएस की दिल्ली यात्रा कानूनी रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से मिलने का उद्देश्य अनियमितताओं पर चर्चा करना है।
तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला 22 अप्रैल को आने वाला है।
कालेश्वरम परियोजना में अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
बीआरएस ने विधायकों की अयोग्यता को चुनौती दी है।

नई दिल्ली/हैदराबाद, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एक तीन सदस्यीय नेताओं का दल वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में उपस्थित है। यह दल कालेश्वरम परियोजना में कथित अनियमितताओं और कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस विधायकों की अयोग्यता से संबंधित मामलों में पार्टी की आगे की कार्रवाई पर कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श करने आया है।

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और बीआरएस के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के निर्देश पर यह दल सोमवार को दिल्ली की यात्रा पर निकला।

इस टीम में विधानसभा में बीआरएस के उपनेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव, पूर्व सांसद विनोद कुमार, और राज्यसभा सदस्य वद्दीराजू रविचंद्र शामिल हैं।

वे दो महत्वपूर्ण मामलों में पार्टी की रणनीति पर चर्चा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों से मुलाकात करेंगे।

तेलंगाना हाईकोर्ट 22 अप्रैल को केसीआर, हरीश राव और अन्य द्वारा दायर अलग-अलग रिट याचिकाओं पर अपना निर्णय देने वाला है। इन याचिकाओं में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना में अनियमितताओं की जांच करने वाले न्यायमूर्ति पीसी घोष आयोग की रिपोर्ट को रद्द करने और निरस्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

केसीआर, हरीश राव, पूर्व मुख्य सचिव एसके जोशी और स्मिता सभरवाल ने रिपोर्ट को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं।

याचिकाओं पर दलीलें सुनने के बाद, मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जीएम मोहिउद्दीन की पीठ ने पिछले महीने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। यह निर्णय पहले 8 अप्रैल को सुनाया जाना था, लेकिन इसे 22 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

बीआरएस टीम हाईकोर्ट द्वारा पार्टी नेताओं की याचिकाओं को खारिज करने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की संभावना पर भी चर्चा करेगी।

कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना (केएलआईएस), जिसे दुनिया की सबसे बड़ी बहुस्तरीय लिफ्ट सिंचाई परियोजना कहा जाता है, की शुरुआत बीआरएस सरकार ने मई 2016 में की थी। इसके मुख्य घटक का उद्घाटन 2019 में केसीआर ने किया था।

मार्च 2024 में कांग्रेस सरकार ने कालेश्वरम परियोजना के मेडिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिला बांधों में अनियमितताओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था। आयोग ने 31 जुलाई, 2025 को तेलंगाना सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

आयोग ने कालेश्वरम परियोजना की योजना, क्रियान्वयन, समापन, संचालन और रखरखाव में अनियमितताओं के लिए केसीआर को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने हरीश राव, तत्कालीन मुख्य सचिव जोशी और तत्कालीन मुख्यमंत्री सचिव स्मिता सभरवाल को भी दोषी पाया।

2024 में कांग्रेस में शामिल हुए 10 बीआरएस विधायकों की अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं से संबंधित मामले के संदर्भ में बीआरएस टीम की दिल्ली यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

बीआरएस नेताओं ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें विधायकों की अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं को खारिज किया गया था। पिछले सप्ताह, उच्च न्यायालय ने विधायकों को 6 मई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ पार्टी के नेता कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर अपनी रणनीति को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। यह कदम आगामी न्यायिक सुनवाई के मद्देनजर और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआरएस की टीम दिल्ली में क्यों गई है?
बीआरएस की टीम दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से कालेश्वरम परियोजना में अनियमितताओं और विधायकों की अयोग्यता पर चर्चा करने के लिए गई है।
कालेश्वरम परियोजना क्या है?
कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना तेलंगाना की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसे 2016 में शुरू किया गया था।
क्या बीआरएस की यात्रा का कोई कानूनी महत्व है?
हाँ, यह यात्रा उच्च न्यायालय में चल रही याचिकाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण कानूनी रणनीतियों को निर्धारित करने के लिए है।
कब सुनाया जाएगा तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला?
तेलंगाना हाईकोर्ट 22 अप्रैल को अपना फैसला सुनाने वाला है।
बीआरएस ने विधायकों की अयोग्यता को लेकर क्या कदम उठाया है?
बीआरएस ने विधायकों की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को हाईकोर्ट में पेश किया है।
राष्ट्र प्रेस
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