16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मद्रास हाईकोर्ट का केंद्र को आदेश: वेलुमणि टेंडर मामले में दो IAS अधिकारियों के अभियोजन की मंजूरी दो महीने में दें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मद्रास हाईकोर्ट का केंद्र को आदेश: वेलुमणि टेंडर मामले में दो IAS अधिकारियों के अभियोजन की मंजूरी दो महीने में दें

सारांश

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है — ₹98.25 करोड़ के टेंडर घोटाले में दो IAS अधिकारियों के अभियोजन की मंजूरी दो महीने में दें, नहीं तो अवमानना की जवाबदेही तय होगी। PMO के अधिकार क्षेत्र में आने वाला यह फैसला तमिलनाडु की सियासत में नई हलचल मचा सकता है।

मुख्य बातें

मद्रास हाईकोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को केंद्र को दो IAS अधिकारियों के अभियोजन की मंजूरी दो महीने में पूरी करने का निर्देश दिया।
मामला पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री एस.पी.
वेलुमणि के कार्यकाल में चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में कथित ₹98.25 करोड़ की टेंडर अनियमितता से जुड़ा है।
सामाजिक संगठन अरप्पोर इयक्कम की अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति एन.
आनंद वेंकटेश ने यह आदेश दिया।
दस्तावेज सीवीसी के पास हैं; प्रतिक्रिया के बाद PMO को भेजे जाएंगे, जिसे मंजूरी देने का अधिकार है।
केंद्र को नवंबर 2025 से अब तक की प्रक्रिया का हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश; अगली सुनवाई 12 नवंबर ।

मद्रास हाईकोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री एस.पी. वेलुमणि से जुड़े टेंडर अनियमितता मामले में दो आईएएस अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी की प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र अपने निर्णय से तमिलनाडु सरकार को अनिवार्य रूप से अवगत कराए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वेलुमणि के अन्नाद्रमुक सरकार में मंत्री रहने के दौरान चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोपों के अनुसार इन टेंडरों में करीब ₹98.25 करोड़ की अनियमितता हुई। गौरतलब है कि सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) को पहले ही चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया जा चुका था, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई।

अवमानना याचिका और सुनवाई

यह निर्देश न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने सामाजिक संगठन अरप्पोर इयक्कम की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि डीवीएसी के विरुद्ध पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेश — जिसमें चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश था — का पालन नहीं किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका कार्यकारी अनुपालन को लेकर सख्त रुख अपना रही है।

केंद्र सरकार की दलीलें और प्रक्रिया

बुधवार की सुनवाई में केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के संयुक्त सचिव सुशील कुमार पाटिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। न्यायमूर्ति वेंकटेश ने उनसे देरी के कारण पूछे। पाटिल ने बताया कि मामले में बड़ी संख्या में दस्तावेज शामिल हैं, जिनकी जाँच के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि दस्तावेज केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भेजे जा चुके हैं और अगले सप्ताह तक उसकी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।

सीवीसी की राय प्राप्त होने के बाद दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजे जाएंगे, जिसे अभियोजन की मंजूरी देने का अधिकार प्राप्त है। पाटिल ने अदालत को आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया में दो महीने का समय लगेगा और अब और देरी नहीं होगी।

तमिलनाडु सरकार की भूमिका

सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि उसने 22 जुलाई को केंद्र सरकार को पत्र भेजकर अभियोजन मंजूरी के संबंध में स्पष्टीकरण माँगा था। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार ने मामले में पहल की, परंतु केंद्र से समय पर प्रतिक्रिया नहीं मिली।

अदालत के निर्देश और अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह नवंबर 2025 से अब तक अभियोजन मंजूरी प्रक्रिया में उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करे। साथ ही, दो महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी कर तमिलनाडु सरकार को सूचित करने का भी आदेश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि जाँच और चार्जशीट राज्य की एजेंसी डीवीएसी के पास। यह दोहरी जवाबदेही की व्यवस्था अक्सर मामलों को 'लिम्बो' में फँसा देती है, जैसा कि यहाँ नवंबर 2025 से चल रहे इंतजार से साफ है। हाईकोर्ट की सक्रियता स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि दो महीने की समयसीमा के बाद भी यदि PMO ने निर्णय नहीं लिया, तो अवमानना की कार्यवाही कितनी व्यावहारिक होगी। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK और केंद्र की BJP के बीच राजनीतिक समीकरण इस प्रक्रिया को और जटिल बनाते हैं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र को क्या निर्देश दिया है?
मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वेलुमणि टेंडर मामले में दो IAS अधिकारियों के अभियोजन की मंजूरी दो महीने के भीतर पूरी करे और अपने निर्णय से तमिलनाडु सरकार को अवगत कराए। साथ ही, नवंबर 2025 से अब तक की प्रक्रिया का हलफनामा भी दाखिल करना होगा।
एस.पी. वेलुमणि पर क्या आरोप हैं?
पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री एस.पी. वेलुमणि पर आरोप है कि उनके मंत्री रहते चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में टेंडर आवंटन में करीब ₹98.25 करोड़ की अनियमितता हुई। डीवीएसी इस मामले की जाँच कर रही है।
अभियोजन की मंजूरी देने में देरी क्यों हुई?
केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव सुशील कुमार पाटिल ने अदालत को बताया कि मामले में बड़ी संख्या में दस्तावेज हैं जिनकी जाँच के लिए समय चाहिए। दस्तावेज पहले सीवीसी को भेजे गए हैं, जिनकी राय के बाद PMO को भेजा जाएगा।
अभियोजन मंजूरी देने का अधिकार किसके पास है?
IAS अधिकारियों के मामले में अभियोजन की मंजूरी देने का अधिकार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पास है। सीवीसी की सिफारिश के बाद PMO अंतिम निर्णय लेता है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित की है, जब केंद्र सरकार को हलफनामा और प्रक्रिया की स्थिति से अदालत को अवगत कराना होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले