तेनकासी के प्राइवेट स्कूल शिक्षकों ने वेतन शोषण का आरोप लगाया, तमिलनाडु सरकार से हस्तक्षेप की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तेनकासी जिले के प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने 28 जून 2026 को राज्य सरकार से हस्तक्षेप की माँग करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं कि कई स्कूल प्रबंधन पेरोल रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें वास्तविक वेतन से वंचित कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अधिकारियों को बढ़ी हुई सैलरी दिखाई जाती है, जबकि उन्हें वास्तव में उसका बहुत छोटा हिस्सा ही मिलता है।
शोषण का तरीका
पावूरचत्रम के एक निजी मैट्रिकुलेशन स्कूल पर शिक्षकों ने विशेष रूप से एक धोखाधड़ी की पद्धति का आरोप लगाया है। शिक्षकों के अनुसार, नवनियुक्त कर्मचारियों को बताया जाता है कि उनकी मासिक सैलरी ₹7,000 से ₹12,000 के बीच होगी। लेकिन वेतन दिवस पर स्कूल उनके बैंक खातों में लगभग ₹30,000 जमा करता है और फिर पहले से साइन किए हुए चेकों के ज़रिए वह पूरी रकम वापस निकाल लेता है — ये चेक खाता खुलवाते समय शिक्षकों से लिए गए थे। इसके बाद शिक्षकों को केवल तय की गई रकम नकद में दी जाती है।
शिक्षकों का आरोप है कि इस तरह बढ़ी हुई सैलरी के रिकॉर्ड का उपयोग सरकारी नियमों का पालन दिखाने के लिए किया जाता था, जबकि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक़ नहीं मिलता था।
जिले भर में फैली समस्या
नर्सरी, मैट्रिकुलेशन और सीबीएसई — तीनों श्रेणियों के स्कूलों के शिक्षकों ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। अलंगुलम के एक स्कूल के शिक्षक ने बताया कि वहाँ प्रबंधन हर महीने केवल लगभग ₹8,000 नकद देता था और कर्मचारियों के बैंक खाते भी नहीं खुलवाए गए थे। चूँकि शिक्षकों की सरकार को सौंपे गए वेतन रिकॉर्ड तक कोई पहुँच नहीं थी, इसलिए उन्हें यह भी पता नहीं चलता था कि आधिकारिक रूप से उनकी सैलरी कितनी दर्ज है।
काम की कठिन परिस्थितियाँ
वेतन शोषण के अलावा, कई शिक्षकों ने कार्यस्थल पर अन्य गंभीर समस्याओं का भी उल्लेख किया। इनमें 10 घंटे तक काम करना, अत्यंत सीमित अवकाश, थोड़ी सी भी देरी पर वेतन कटौती और महिला शिक्षकों पर विवाह के बाद नौकरी छोड़ने का अप्रत्यक्ष दबाव शामिल हैं। कई शिक्षकों ने स्वीकार किया कि नौकरी जाने के भय से वे औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाते रहे।
सरकारी प्रतिक्रिया
तेनकासी के मुख्य शिक्षा अधिकारी रेनुगा ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग तब तक कोई कार्रवाई नहीं कर सकता जब तक प्रभावित शिक्षक लिखित शिकायत न दें। उन्होंने माना कि कम वेतन के आरोप कई वर्षों से सुनने में आ रहे थे, परंतु यह भी कहा कि अब तक किसी भी शिक्षक ने औपचारिक साक्ष्य के साथ शिकायत नहीं की थी।
आगे क्या
शिक्षकों ने सैलरी भुगतान को विनियमित करने और निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा शोषण रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू करने की माँग की है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में निजी स्कूलों में शिक्षकों के अधिकारों को लेकर व्यापक बहस जारी है। जब तक शिक्षक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराते, विभागीय कार्रवाई की संभावना सीमित बनी रहेगी।