15 अक्टूबर 2026
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तिरंगा यात्रा पर रोक नहीं, पर परमिशन अनिवार्य: BJP प्रवक्ता आरपी सिंह का विपक्ष पर पलटवार

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तिरंगा यात्रा पर रोक नहीं, पर परमिशन अनिवार्य: BJP प्रवक्ता आरपी सिंह का विपक्ष पर पलटवार

सारांश

तिरंगे पर रोक नहीं — लेकिन राजनीतिक बैनर तले कार्यक्रम के लिए सुप्रीम कोर्ट का 10 दिन पहले परमिशन का नियम लागू होगा। BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने जंतर-मंतर बनाम रामलीला मैदान विवाद, सौरव दास के एफिडेविट और विपक्ष के जनसमर्थन के अभाव का हवाला देते हुए विपक्ष को कानूनी आईना दिखाया।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने 14 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि तिरंगा यात्रा पर कोई रोक नहीं, लेकिन राजनीतिक संगठन के बैनर तले कार्यक्रम के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 10 दिन पहले परमिशन अनिवार्य है।
सरकार ने जंतर-मंतर को अधिसूचित धरना स्थल से हटाकर रामलीला मैदान को डेज़िग्नेटेड स्थान बनाया है।
सौरव दास पर आरोप — ₹50,000 के मुचलके पर रिहाई की शर्त में एक वर्ष तक कानून न तोड़ने का वचन था।
आरपी सिंह ने CJP को AAP की युवा शाखा बताया और अभिजीत दिपके के खुद के बयानों का हवाला दिया।
असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा की पोस्ट के अनुसार BJP कार्यक्रम में 30,000 से अधिक युवा शामिल थे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि तिरंगा यात्रा निकालने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के बैनर तले कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 10 दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष तिरंगे की आड़ में अपना राजनीतिक विरोध प्रदर्शन आगे बढ़ाना चाहता है।

मुख्य बयान और कानूनी स्थिति

आरपी सिंह ने कहा, 'किसी को भी तिरंगा यात्रा निकालने से कोई रोक नहीं है, लेकिन अगर आप किसी राजनीतिक दल के नाम से या किसी संगठन के नाम से कोई भी कार्यक्रम करना चाहते हैं तो उसके लिए पहले अनुमति लेनी पड़ती है। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि 10 दिन पहले अनुमति लेनी होगी, उसके अनुसार ही आपको कार्यक्रम करने दिया जाएगा।' उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह तिरंगे की आड़ में अपना विरोध प्रदर्शन आगे बढ़ाना चाहता है।

BJP प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर को सरकार ने अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर अब रामलीला मैदान को डेज़िग्नेटेड स्थान बना दिया है। उनके अनुसार, इसके बावजूद यदि कोई जंतर-मंतर पर इकट्ठा होता है तो पुलिस और सरकार को कार्रवाई करनी होगी।

धरना स्थलों का इतिहास और लुटियंस दिल्ली की संवेदनशीलता

आरपी सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि पहले सभी बड़े कार्यक्रम बोट क्लब पर होते थे। महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन के बाद ही बोट क्लब से जंतर-मंतर को धरना स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह पूरा क्षेत्र लुटियंस दिल्ली का हिस्सा है, जिसमें संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और कई केंद्रीय मंत्रियों के आवास आते हैं, जो इसे संवेदनशील बनाता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक पिछले धरने की आड़ में संसद पर बम फेंकने की साजिश का खुलासा हुआ था — जिसे उन्होंने इस क्षेत्र में प्रदर्शनों पर नियंत्रण की ज़रूरत के समर्थन में उद्धृत किया।

सौरव दास की गिरफ्तारी और एफिडेविट का मामला

सौरव दास की गिरफ्तारी के संदर्भ में आरपी सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले एक एफिडेविट दिया था, जिसमें ₹50,000 के मुचलके पर रिहाई की शर्त के तहत यह वचन दिया था कि अगले एक वर्ष तक वे कोई भी कानून तोड़ने वाला कार्यक्रम नहीं करेंगे। BJP प्रवक्ता के अनुसार, उस वचन का उल्लंघन हुआ है।

विपक्ष पर जनसमर्थन के अभाव का आरोप

आरपी सिंह ने दावा किया कि विपक्ष के पास जनसमर्थन नहीं है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की एक पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया था कि 30,000 से अधिक युवा 'भारत माता की जय' के नारे लगा रहे थे। इसी प्रकार कपिल मिश्रा की एक पोस्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जेएनयू का पूरा स्टेडियम जय श्री राम के नारों से भरा हुआ था।

उन्होंने सीजेपी (CJP) को आम आदमी पार्टी (AAP) की युवा शाखा बताया और कहा कि अभिजीत दिपके स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि वे AAP समर्थक और BJP विरोधी हैं। AAP नेता संजय सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का नाम सुल्तानपुर और दिल्ली — दो जगहों पर मतदाता सूची में दर्ज है।

आगे क्या होगा

BJP प्रवक्ता के बयान से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ दल तिरंगा यात्रा के नाम पर हो रहे राजनीतिक आयोजनों को कानूनी ढाँचे के दायरे में लाने के पक्ष में है। जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों के किसी भी आयोजन पर पुलिस की कड़ी नज़र रहने की उम्मीद है। यह विवाद आगामी दिनों में दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें विरोधाभास भी है। लुटियंस दिल्ली की 'संवेदनशीलता' का तर्क वही है जो दशकों से हर सरकार ने विपक्षी प्रदर्शनों को सीमित करने के लिए इस्तेमाल किया है। असली सवाल यह है कि 10 दिन की अनुमति की शर्त को सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों पर समान रूप से लागू किया जाता है या नहीं — इस पर BJP चुप है। जंतर-मंतर से रामलीला मैदान का बदलाव प्रशासनिक निर्णय था, लेकिन इसके समय और राजनीतिक संदर्भ पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरंगा यात्रा के लिए परमिशन क्यों जरूरी है?
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के बैनर तले कार्यक्रम के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत 10 दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। तिरंगा यात्रा व्यक्तिगत रूप से निकालने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन राजनीतिक संगठन के नाम से आयोजन के लिए पूर्व अनुमति जरूरी है।
जंतर-मंतर को धरना स्थल से क्यों हटाया गया?
सरकार ने जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर रामलीला मैदान को नया डेज़िग्नेटेड स्थान घोषित किया है। आरपी सिंह ने इसके पीछे लुटियंस दिल्ली की संवेदनशीलता — संसद, राष्ट्रपति भवन और मंत्री निवासों की निकटता — को कारण बताया।
सौरव दास की गिरफ्तारी किस आधार पर हुई?
BJP प्रवक्ता के अनुसार, सौरव दास ने पहले ₹50,000 के मुचलके पर रिहाई के वक्त एफिडेविट दिया था कि वे एक वर्ष तक कोई कानून-तोड़ने वाला कार्यक्रम नहीं करेंगे। उस शर्त के कथित उल्लंघन के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
BJP ने CJP को किस पार्टी से जोड़ा?
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने CJP (सीजेपी) को आम आदमी पार्टी (AAP) की युवा शाखा बताया। उन्होंने अभिजीत दिपके के खुद के बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि वे AAP समर्थक और BJP विरोधी हैं।
बोट क्लब से जंतर-मंतर और अब रामलीला मैदान — यह बदलाव कैसे हुआ?
आरपी सिंह के अनुसार, पहले सभी प्रमुख प्रदर्शन बोट क्लब पर होते थे। महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन के बाद बोट क्लब से जंतर-मंतर को धरना स्थल बनाया गया था। अब प्रशासन ने जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान को अधिसूचित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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