19 सितंबर 2026
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टीएमसी चुनाव चिह्न विवाद: सौगत रॉय बोले — आयोग का फैसला मानेंगे, सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे

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टीएमसी चुनाव चिह्न विवाद: सौगत रॉय बोले — आयोग का फैसला मानेंगे, सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे

सारांश

पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने चुनाव चिह्न विवाद पर दोहरी रणनीति साफ की — आयोग का आदेश मानो, अदालत में लड़ते भी रहो। नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी को उन्होंने भाजपा की विपक्ष-विरोधी रणनीति बताया।

मुख्य बातें

सौगत रॉय ने कहा कि TMC चुनाव आयोग के चुनाव चिह्न संबंधी फैसले का पालन करेगी, लेकिन इसे सैद्धांतिक रूप से अस्वीकार करती है।
पार्टी इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में पहले ही याचिका दाखिल कर चुकी है।
रेजीनगर सीट से TMC उम्मीदवार अभी भी चुनाव मैदान में हैं; कांग्रेस को समर्थन की खबरों को रॉय ने नकारा।
नंदीग्राम में TMC ने पहले उम्मीदवार उतारा था, बाद में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी को TMC ने भाजपा की राजनीतिक चाल बताया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 19 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चुनाव चिह्न संबंधी दिए गए फैसले का पालन तो करेगी, लेकिन वह इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार नहीं करती और इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे चुकी है। पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनाव को लेकर रॉय ने रेजीनगर सीट, नंदीग्राम उपचुनाव और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी समेत कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की।

चुनाव चिह्न विवाद और सुप्रीम कोर्ट का रुख

चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी के दोनों गुटों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के प्रश्न पर सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी आयोग के निर्देश का अनुपालन करेगी, परंतु वह इस निर्णय को सिद्धांततः गलत मानती है। उन्होंने बताया कि टीएमसी पहले ही इस फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुकी है। यह विवाद पश्चिम बंगाल में उपचुनाव की सियासी पृष्ठभूमि में और अधिक पेचीदा हो गया है।

रेजीनगर सीट पर टीएमसी का रुख

रेजीनगर विधानसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार के कांग्रेस को समर्थन देने की खबरों पर रॉय ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी द्वारा जिस उम्मीदवार के नाम की घोषणा की गई थी, वह अभी भी चुनाव मैदान में हैं। रेजीनगर से जुड़ी इन अटकलों को उन्होंने सिरे से निराधार बताया।

नंदीग्राम उपचुनाव और कांग्रेस को समर्थन

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर टीएमसी के उपचुनाव न लड़ने के निर्णय को लेकर सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी यह ऐलान पहले ही कर चुकी है। रॉय ने बताया कि टीएमसी ने पहले अपना उम्मीदवार उतारा था, लेकिन कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला होने के बाद समीकरण बदल गए। एक ही सवाल बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने नाराजगी भी जाहिर की।

कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर भाजपा पर निशाना

नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार को 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किए जाने पर सौगत रॉय ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवार के रूप में नाम सामने आने के बाद अचानक इतने पुराने मामले को पुनर्जीवित किया गया, जो राजनीतिक प्रतिशोध का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी की कांग्रेस सहित कई राष्ट्रीय विपक्षी दलों के नेताओं ने निंदा की है।

भाजपा पर विपक्ष को खत्म करने का आरोप

टीएमसी सांसद रॉय ने आरोप लगाया कि भाजपा की रणनीति विपक्षी दलों को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने की है और नंदीग्राम में की गई कार्रवाई उसी योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे अरसे तक दबा रखे गए मामले को ऐन चुनाव के वक्त उठाना संदेह से परे नहीं है। आगामी दिनों में उपचुनाव की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आएंगी, पश्चिम बंगाल में यह राजनीतिक तनाव और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अदालत भी जाएंगे' — टीएमसी की उस दुविधा को उजागर करता है जिसमें पार्टी संगठनात्मक अनुशासन और कानूनी लड़ाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। 19 साल पुराने मामले में ऐन उपचुनाव से पहले गिरफ्तारी का मुद्दा गंभीर है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछ रही कि यह मामला इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रहा और अचानक सक्रिय कैसे हुआ। पश्चिम बंगाल में चुनाव-पूर्व राजनीतिक गिरफ्तारियों का इतिहास दोनों खेमों में रहा है, इसलिए जवाबदेही की माँग सिर्फ एकतरफा नहीं होनी चाहिए।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी का चुनाव चिह्न विवाद क्या है?
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल उपचुनाव के संदर्भ में टीएमसी के दोनों गुटों को चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं, जिसे TMC सांसद सौगत रॉय ने सैद्धांतिक रूप से गलत बताया है। पार्टी आयोग के आदेश का पालन करते हुए इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे चुकी है।
सौगत रॉय सुप्रीम कोर्ट क्यों जा रहे हैं?
TMC चुनाव आयोग के चुनाव चिह्न संबंधी फैसले को सिद्धांततः अस्वीकार करती है और उसे न्यायिक समीक्षा के योग्य मानती है। सौगत रॉय के अनुसार पार्टी ने इस फैसले के विरुद्ध पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
नंदीग्राम उपचुनाव में TMC ने चुनाव क्यों नहीं लड़ा?
TMC ने पहले नंदीग्राम सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा था, लेकिन बाद में कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया गया जिससे समीकरण बदल गए। सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी यह घोषणा पहले ही कर चुकी थी।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को क्यों गिरफ्तार किया गया?
कांग्रेस उम्मीदवार को एक 19 साल पुराने मामले में उपचुनाव से ठीक पहले गिरफ्तार किया गया। TMC सांसद सौगत रॉय ने इसे भाजपा की विपक्ष-विरोधी रणनीति बताते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद उम्मीदवार घोषित होते ही मामले को अचानक पुनर्जीवित किया गया।
रेजीनगर सीट पर TMC का क्या रुख है?
सौगत रॉय ने स्पष्ट किया कि रेजीनगर सीट से पार्टी का घोषित उम्मीदवार अभी भी चुनाव मैदान में है। उन्होंने उम्मीदवार के कांग्रेस को समर्थन देने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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