दुर्गा पूजा 2026: TMC के दागी नेता उत्सव से 'गायब', सुजीत बोस से पार्थ चटर्जी तक जेल या किनारे
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में इस बार दुर्गा पूजा 2026 का उत्सव एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है — तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता, जो वर्षों से सामुदायिक पूजा समितियों के चेहरे रहे हैं, इस साल इन आयोजनों से पूरी तरह नदारद हैं। कुछ नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में न्यायिक हिरासत में हैं, तो कुछ राजनीतिक कारणों से खुद को पीछे खींच चुके हैं।
सुजीत बोस: 'श्रीभूमि' की पूजा जेल में
लेक टाउन की प्रतिष्ठित 'श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब' की दुर्गा पूजा को हमेशा से पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की पूजा के रूप में पहचाना जाता था। लेकिन इस साल वे इस उत्सव से पूरी तरह अनुपस्थित हैं।
पश्चिम बंगाल में नगर पालिकाओं की भर्तियों से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, बोस फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इस हफ्ते कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसका अर्थ है कि वे पूरी दुर्गा पूजा जेल की सलाखों के पीछे बिताएंगे।
फिरहाद हकीम और 'चेतला अग्रानी'
पश्चिम बंगाल के पूर्व नगर मामलों एवं शहरी विकास मंत्री और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, दक्षिण कोलकाता की 'चेतला अग्रानी' सामुदायिक दुर्गा पूजा के मुख्य आयोजक माने जाते थे। हालांकि हकीम अभी भी विधायक हैं, लेकिन वे फिलहाल TMC के भीतर ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ हैं।
राजनीतिक समीकरणों में आई इस दरार का असर 'चेतला अग्रानी' की पूजा पर भी साफ दिखता है — इस बार उनकी भागीदारी नगण्य बताई जा रही है।
अरूप बिस्वास का नाम 'सुरुचि संघ' से हटा
पूर्व बिजली और युवा एवं खेल मंत्री अरूप बिस्वास का नाम इस साल 'सुरुचि संघ' की दुर्गा पूजा आयोजन समिति की सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है। पिछले साल तक यही पूजा 'अरूपदा की पूजा' के नाम से जानी जाती थी — यह बदलाव उनके राजनीतिक अलगाव का प्रतीक बन गया है।
पार्थ चटर्जी: जेल से रिहाई के बाद भी दूरी
पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का 'नकटला उदयन संघ' की दुर्गा पूजा से वर्षों पुराना जुड़ाव रहा है। जुलाई 2022 में पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपए के स्कूल नौकरी घोटाले में ED द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद इस पूजा की चमक फीकी पड़ गई।
लगभग तीन वर्ष जेल में बिताने के बाद पिछले साल रिहा हुए चटर्जी ने तब से 'नकटला उदयन' से अपना नाता पूरी तरह तोड़ लिया है। इस साल उन्होंने अपने कुछ पुराने दोस्तों के साथ घर पर ही रहने का फैसला किया है, जो उनके अनुसार आज भी उनके शुभचिंतक हैं।
ममता और अभिषेक भी दूर
इस बदलाव की एक और बड़ी बात यह है कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस साल खुद किसी भी सामुदायिक पूजा का उद्घाटन नहीं किया। डायमंड हार्बर के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी भी इस साल इन आयोजनों से दूर रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में TMC की आंतरिक कलह और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाइयों का असर पार्टी की सार्वजनिक उपस्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। गौरतलब है कि दुर्गा पूजा समितियां बंगाल की राजनीति में जनसंपर्क और जमीनी पकड़ का एक अहम माध्यम रही हैं — नेताओं की इस अनुपस्थिति से पार्टी की उस पकड़ पर सवाल उठ रहे हैं।