टीएमसी बगावत: सुदीप बंद्योपाध्याय बागी गुट के साथ, भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने बढ़ाई ममता की मुश्किलें
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लोकसभा संसदीय दल में उठी बगावत की आँधी 13 जून को और तेज हो गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं कोलकाता उत्तर से सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय खुलकर बागी खेमे के साथ नजर आए। वे बागी सांसद शताब्दी रॉय के साथ नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुँचे, जहाँ TMC के असंतुष्ट सांसदों की बैठक पहले से चल रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंद्योपाध्याय जैसे वरिष्ठ चेहरे का इस गुट से जुड़ाव पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है।
मुख्य घटनाक्रम
सुदीप बंद्योपाध्याय शनिवार सुबह कोलकाता से दिल्ली पहुँचे। सूत्रों के अनुसार, शताब्दी रॉय भी उसी विमान से दिल्ली आईं। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचने के बाद दोनों नेता एक ही वाहन से भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास की ओर रवाना हुए। वहाँ पहले से बागी TMC सांसदों की बैठक जारी थी।
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से यादव के आवास पर बागी गुट की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इस गुट की अगुआई सांसद काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं। ऐसे में बंद्योपाध्याय का इस समूह के साथ सार्वजनिक रूप से दिखना राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बगावत की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर आंतरिक असंतोष लगातार गहराता रहा है। पार्टी पहले ही राज्य विधानसभा में अपने संसदीय दल पर नियंत्रण खो चुकी है।
1 जून को एक निर्णायक मोड़ आया जब लोकसभा में TMC सांसदों के एक बड़े वर्ग ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व के विरुद्ध खुलकर असंतोष जाहिर किया। यह ऐसे समय में हुआ जब ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी दिल्ली में विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में व्यस्त थे।
बागी गुट का दावा
बागी खेमे की प्रमुख नेता काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया है कि उनके साथ पार्टी के करीब 20 सांसद हैं और वे केंद्र की BJP नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार का समर्थन करेंगे। शुक्रवार को 19 TMC सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज भी सामने आया था। हालाँकि, उस दस्तावेज में सुदीप बंद्योपाध्याय के हस्ताक्षर नहीं थे।
इसके बावजूद शनिवार को उनका शताब्दी रॉय के साथ भूपेंद्र यादव से मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बागी गुट को एक और वरिष्ठ एवं अनुभवी सांसद का समर्थन मिल गया है।
आम जनता और राजनीति पर असर
यह बगावत ऐसे समय में और गहरी हो रही है जब TMC लोकसभा में विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है। यदि बागी सांसद NDA के पक्ष में मतदान करते हैं, तो इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए समीकरण का उदय हो सकता है और ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या TMC का बागी गुट औपचारिक रूप से पार्टी से अलग होगा या दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बागी सांसदों की संख्या TMC के कुल लोकसभा सदस्यों के दो-तिहाई से अधिक हो जाती है, तो वे दल-बदल विरोधी कानून से बच सकते हैं। आने वाले दिनों में इस गुट की अगली रणनीति स्पष्ट होने की संभावना है।