1998 कोयंबटूर बम धमाका: पाँच दोषियों की 60 दिन की पैरोल रद्द करे सरकार — तमिलनाडु भाजपा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 19 अक्टूबर 2026 को माँग की कि 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पाँच दोषियों को दी गई 60 दिन की पैरोल तत्काल रद्द की जाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आतंकवाद से जुड़े मामलों में सिद्धदोष व्यक्तियों के प्रति अनुचित नरमी बरत रही है।
मुख्य घटनाक्रम
तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि व्यक्तिगत परिस्थितियाँ या स्वास्थ्य कारण इतने जघन्य अपराध की गंभीरता से ऊपर नहीं हो सकते। उन्होंने इस पैरोल को विस्फोटों के पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ अन्याय बताया।
तिरुपति ने यह भी कहा, 'कोयंबटूर विस्फोट के पीड़ितों के साथ न्याय को राजनीतिक गणनाओं के लिए नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। दोषियों को अपनी पूरी सजा भुगतनी चाहिए।' उन्होंने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते समय इस अपराध को 'जघन्य' क़रार दिया था।
पाँच दोषी और पैरोल का आधार
पैरोल पाने वाले पाँच दोषियों में मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ़ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अज़म और नवाब खान शामिल हैं। ये सभी वर्तमान में कोयंबटूर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन सभी दोषियों ने व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए पैरोल की माँग की थी। ये सभी 25 वर्ष से अधिक समय कारावास में बिता चुके हैं और पूर्व में भी उन्हें पैरोल मिल चुकी है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों के दौरान उनकी पैरोल अस्थायी रूप से रद्द कर दी गई थी।
1998 कोयंबटूर विस्फोट: पृष्ठभूमि
14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे — ठीक उस समय जब तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली आयोजित होने वाली थी। इन विस्फोटों में 58 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा पर इन धमाकों को अंजाम देने का आरोप था।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों में सजायाफ़्ता व्यक्तियों की पैरोल और रिहाई को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता बनी रहती है। यह मामला तमिलनाडु में भाजपा और सत्तारूढ़ दल के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस फ़ैसले का समर्थन करते हुए तमिझागा वेट्री कषगम (TVK) के विधायक वीएमएस मुस्तफ़ा ने मुख्यमंत्री का आभार जताया और पैरोल देने के निर्णय का स्वागत किया। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि दोषियों को याचिका में उल्लिखित व्यक्तिगत और चिकित्सीय आधारों पर यह राहत दी गई है।
भाजपा जहाँ पैरोल तत्काल रद्द करने की माँग पर अडिग है, वहीं यह मामला विधायी और न्यायिक स्तर पर और तीखा होने की आशंका है।
आगे क्या होगा
तिरुपति ने सरकार से आग्रह किया है कि निर्णय लेते समय पीड़ितों की स्मृति और जन सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। उनका आरोप है कि इस तरह की राहत देने से यह संदेश जाता है कि समाज पर हमला करने वालों के प्रति भी नरमी बरती जा सकती है। इस मुद्दे पर राज्य की राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।