19 अक्टूबर 2026
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1998 कोयंबटूर बम धमाका: पाँच दोषियों की 60 दिन की पैरोल रद्द करे सरकार — तमिलनाडु भाजपा

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1998 कोयंबटूर बम धमाका: पाँच दोषियों की 60 दिन की पैरोल रद्द करे सरकार — तमिलनाडु भाजपा

सारांश

1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाके — जिसमें 58 लोगों की जान गई थी — के पाँच सजायाफ़्ता दोषियों को दी गई 60 दिन की पैरोल अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। तमिलनाडु भाजपा ने इसे पीड़ितों के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल रद्द करने की माँग की है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु भाजपा ने 1998 कोयंबटूर बम धमाके के पाँच दोषियों को दी गई 60 दिन की पैरोल तत्काल रद्द करने की माँग की।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसे पीड़ितों के साथ अन्याय बताया।
पाँचों दोषी — मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ़ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अज़म, नवाब खान — कोयंबटूर सेंट्रल जेल में बंद हैं और 25 वर्ष से अधिक कारावास भुगत चुके हैं।
14 फरवरी 1998 के विस्फोटों में 58 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक घायल हुए थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस अपराध को 'जघन्य' बताते हुए जमानत याचिका खारिज की थी।
TVK विधायक वीएमएस मुस्तफ़ा ने पैरोल निर्णय का स्वागत किया, जिससे राजनीतिक बहस और गहरी हो गई है।

तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 19 अक्टूबर 2026 को माँग की कि 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पाँच दोषियों को दी गई 60 दिन की पैरोल तत्काल रद्द की जाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आतंकवाद से जुड़े मामलों में सिद्धदोष व्यक्तियों के प्रति अनुचित नरमी बरत रही है।

मुख्य घटनाक्रम

तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि व्यक्तिगत परिस्थितियाँ या स्वास्थ्य कारण इतने जघन्य अपराध की गंभीरता से ऊपर नहीं हो सकते। उन्होंने इस पैरोल को विस्फोटों के पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ अन्याय बताया।

तिरुपति ने यह भी कहा, 'कोयंबटूर विस्फोट के पीड़ितों के साथ न्याय को राजनीतिक गणनाओं के लिए नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। दोषियों को अपनी पूरी सजा भुगतनी चाहिए।' उन्होंने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते समय इस अपराध को 'जघन्य' क़रार दिया था।

पाँच दोषी और पैरोल का आधार

पैरोल पाने वाले पाँच दोषियों में मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ़ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अज़म और नवाब खान शामिल हैं। ये सभी वर्तमान में कोयंबटूर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

अधिकारियों के अनुसार, इन सभी दोषियों ने व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए पैरोल की माँग की थी। ये सभी 25 वर्ष से अधिक समय कारावास में बिता चुके हैं और पूर्व में भी उन्हें पैरोल मिल चुकी है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों के दौरान उनकी पैरोल अस्थायी रूप से रद्द कर दी गई थी।

1998 कोयंबटूर विस्फोट: पृष्ठभूमि

14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे — ठीक उस समय जब तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली आयोजित होने वाली थी। इन विस्फोटों में 58 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा पर इन धमाकों को अंजाम देने का आरोप था।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों में सजायाफ़्ता व्यक्तियों की पैरोल और रिहाई को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता बनी रहती है। यह मामला तमिलनाडु में भाजपा और सत्तारूढ़ दल के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस फ़ैसले का समर्थन करते हुए तमिझागा वेट्री कषगम (TVK) के विधायक वीएमएस मुस्तफ़ा ने मुख्यमंत्री का आभार जताया और पैरोल देने के निर्णय का स्वागत किया। वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि दोषियों को याचिका में उल्लिखित व्यक्तिगत और चिकित्सीय आधारों पर यह राहत दी गई है।

भाजपा जहाँ पैरोल तत्काल रद्द करने की माँग पर अडिग है, वहीं यह मामला विधायी और न्यायिक स्तर पर और तीखा होने की आशंका है।

आगे क्या होगा

तिरुपति ने सरकार से आग्रह किया है कि निर्णय लेते समय पीड़ितों की स्मृति और जन सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। उनका आरोप है कि इस तरह की राहत देने से यह संदेश जाता है कि समाज पर हमला करने वालों के प्रति भी नरमी बरती जा सकती है। इस मुद्दे पर राज्य की राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

250 से अधिक घायल, और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'जघन्य' की संज्ञा। लेकिन 25 वर्ष से अधिक कारावास के बाद, चिकित्सीय आधार पर दी गई अल्पकालिक पैरोल कानूनी रूप से स्थापित प्रक्रिया है — जिसका उपयोग इन दोषियों के मामले में पहले भी हो चुका है। असली सवाल यह नहीं है कि पैरोल दी जाए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या राज्य सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त दस्तावेज़ी आधार है। भाजपा की माँग राजनीतिक रूप से प्रासंगिक है, पर तब तक न्यायोचित नहीं ठहराई जा सकती जब तक पैरोल प्रक्रियागत मानकों का उल्लंघन साबित न हो।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1998 कोयंबटूर बम धमाका क्या था?
14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिनमें 58 लोगों की मौत हुई और 250 से अधिक घायल हुए। तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली के दौरान हुए इन धमाकों के लिए प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा को ज़िम्मेदार ठहराया गया था।
पाँचों दोषियों को पैरोल क्यों दी गई?
अधिकारियों के अनुसार, इन दोषियों ने व्यक्तिगत और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए पैरोल की माँग की थी। राज्य सरकार ने इन्हीं चिकित्सीय एवं व्यक्तिगत आधारों पर 60 दिन की पैरोल स्वीकृत की है।
तमिलनाडु भाजपा की माँग क्या है?
तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने राज्य सरकार से पाँचों दोषियों की पैरोल तत्काल रद्द करने की माँग की है। उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस अपराध को 'जघन्य' बताया है और पीड़ितों के साथ न्याय राजनीतिक गणनाओं से ऊपर होना चाहिए।
क्या इन दोषियों को पहले भी पैरोल मिल चुकी है?
हाँ, अधिकारियों के अनुसार इन दोषियों को पहले भी पैरोल दी जा चुकी है। हालाँकि विधानसभा चुनावों के दौरान उनकी पैरोल अस्थायी रूप से रद्द कर दी गई थी।
इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों का क्या रुख है?
TVK विधायक वीएमएस मुस्तफ़ा ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए पैरोल देने के फ़ैसले का स्वागत किया है। राज्य सरकार ने भी इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित ठहराया है, जबकि भाजपा इसे रद्द कराने के लिए दबाव बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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