त्रिपुरा में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध ईडी की तीन नई शिकायतें, 14 आरोपी संलिप्त

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त्रिपुरा में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध ईडी की तीन नई शिकायतें, 14 आरोपी संलिप्त

सारांश

अगरतला में प्रवर्तन निदेशालय ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तीन शिकायतें दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 आरोपी शामिल हैं, जिनमें प्रमुख तस्कर और पुलिस अधिकारी शामिल हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई है।

Key Takeaways

  • ईडी ने त्रिपुरा में मादक पदार्थों की तस्करी पर त्वरित कार्रवाई की।
  • 14 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें तस्कर और पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
  • लगभग 6.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की गई हैं।
  • यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई है।
  • समाज में कानून व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास।

अगरतला, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा में मादक और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की तस्करी और वितरण पर प्रवर्तन निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए तीन अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं। ये शिकायतें धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 44 और 45 के तहत पश्चिम त्रिपुरा की विशेष अदालत में पेश की गई हैं। इन मामलों में कुल 14 आरोपी शामिल हैं।

तीनों मामलों का संबंध नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रॉपिक पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत अपराधों से है, जो अवैध आय की लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं।

पहला मामला लिटन साहा और अन्य के विरुद्ध है। ईडी ने यह जांच त्रिपुरा पुलिस के जिरानिया थाने द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। आरोप है कि लिटन साहा ने कोडीन आधारित खांसी की दवा की तस्करी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें पुलिस ने 9,590 बोतलें जब्त की थीं। जांच में यह भी पता चला कि लिटन साहा ने अपने लॉजिस्टिक्स व्यवसाय स्वास्तिक रोडवेज के माध्यम से इस अवैध आय को अपने विभिन्न बैंक खातों में छुपाने का प्रयास किया।

दूसरा मामला देबब्रत डे और अन्य के खिलाफ है। इस मामले की जांच ईडी ने दो एफआईआर के आधार पर शुरू की, जिसमें पहली 1,352 किलो गांजा की जब्ती (पानिसागर थाने) और दूसरी 14,400 बोतल खांसी की दवा की जब्ती (मुंगियाकामी थाने) शामिल है। जांच में यह पाया गया कि देबब्रत डे और अपु रंजन दास एक अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के मुख्य सदस्य हैं, जो त्रिपुरा से बिहार और अन्य राज्यों में गांजा और अन्य मादक पदार्थ भेजते थे। उनके सहयोगी पुलिस अधिकारी ध्रुबा मजूमदार ने अवैध आय को अपनी पत्नी के नाम पर संपत्तियों में निवेश किया। ईडी ने आरोपियों की कई संपत्तियां जब्त की हैं।

तीसरे मामले में बिशु कुमार त्रिपुरा और अन्य के खिलाफ जांच ईडी ने कई दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। इस जांच का संबंध 243 किलो, 3,390 किलो और 66 किलो गांजा की जब्ती से है। बिशु कुमार त्रिपुरा और कामिनी देबार्मा ने इस अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क में सक्रिय भागीदारी स्वीकार की। आरोपियों ने अपराध आय को अपने और परिवार के खातों, म्यूल खातों, हवाला चैनलों, ईंट उद्योग में निवेश और अचल संपत्ति में परिवर्तित किया।

तीनों मामलों में ईडी ने कुल लगभग 6.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां अवैध आय के रूप में जब्त और अटैच की हैं।

Point of View

बल्कि यह समाज में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने क्यों कार्रवाई की?
ईडी ने मादक और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की।
कितने आरोपी हैं?
कुल 14 आरोपी इन तीन अभियोजन शिकायतों में शामिल हैं।
क्या आरोप हैं?
आरोपों में तस्करी, लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्तियों का निवेश शामिल है।
ईडी ने कितनी संपत्तियां जब्त की हैं?
ईडी ने लगभग 6.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं।
कौन से प्रमुख आरोपी हैं?
प्रमुख आरोपियों में लिटन साहा, देबब्रत डे और बिशु कुमार त्रिपुरा शामिल हैं।
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