त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में 3 दिवसीय दिवाली उत्सव: 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
गोमती जिले, त्रिपुरा स्थित 525 साल पुराने ऐतिहासिक माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में तीन दिवसीय दिवाली उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुँचने की उम्मीद जताई गई है। रविवार की शाम त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा इस उत्सव का उद्घाटन करेंगे। पूर्वोत्तर के सबसे बड़े दिवाली उत्सवों में से एक माने जाने वाले इस आयोजन के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।
मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान
अगरतला से लगभग 64 किलोमीटर दक्षिण में उदयपुर में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इसे 1501 में तत्कालीन त्रिपुरा रियासत के महाराजा धन्य माणिक्य ने बनवाया था, जिन्होंने 1490 से 1515 तक शासन किया। यह तीर्थस्थल सदियों से पूर्वोत्तर भारत की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है।
उत्सव की प्रमुख तैयारियाँ और आकर्षण
स्थानीय विधायक अभिषेक देबरॉय और गोमती जिले की जिलाधिकारी रिंकू लाथर ने बताया कि इस वार्षिक उत्सव की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। देबरॉय ने कहा कि इस बार उत्सव में महिला श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने की संभावना है।
सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उद्घाटन की शाम एक ड्रोन शो मुख्य आकर्षण होगा। मंदिर परिसर में सरकारी प्रदर्शनी स्टॉल तथा त्रिपुरा की समृद्ध विरासत, पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय खान-पान को दर्शाने वाले विशेष थीम-आधारित स्टॉल भी लगाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, एक कछुए के ऊपर माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर को दर्शाती विशेष रेत-कलाकृति भी प्रदर्शित की जाएगी, जो इस तीर्थस्थल की अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जा रही है।
यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा
दिवाली उत्सव के दौरान अनुमानित भीड़ को देखते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे रविवार को एक विशेष ट्रेन चलाएगा। यह कदम दूरदराज से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
प्रसाद योजना के तहत ₹54 करोड़ का पुनर्निर्माण
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2025 को पुनर्निर्मित माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का उद्घाटन किया था और वहाँ पूजा-अर्चना की थी। पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की 'प्रसाद' (तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान) योजना के अंतर्गत इस मंदिर का ₹54 करोड़ से अधिक की लागत से पुनर्निर्माण किया गया है। इसमें केंद्र सरकार ने ₹34.43 करोड़ और त्रिपुरा सरकार ने ₹17.61 करोड़ का योगदान दिया।
यह उत्सव ऐसे समय में हो रहा है जब पुनर्निर्माण के बाद मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो पूर्वोत्तर के धार्मिक पर्यटन को नई गति देने का संकेत है।