क्या उज्जैन के डॉ. नारायण व्यास को मिला पद्मश्री सम्‍मान?

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क्या उज्जैन के डॉ. नारायण व्यास को मिला पद्मश्री सम्‍मान?

सारांश

उज्जैन के वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास को पद्मश्री-2026 से सम्मानित किया गया है। उनका यह सम्मान उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और प्रचार में उनके अद्वितीय योगदान का प्रतीक है। जानिए इस सम्मान से उज्जैन को क्या लाभ होगा और डॉ. व्यास की यात्रा कैसी रही है।

Key Takeaways

  • डॉ. नारायण व्यास को पद्मश्री-2026 सम्मान मिला।
  • उज्जैन की संस्कृति का संरक्षण महत्वपूर्ण है।
  • डॉ. व्यास ने 150 स्थानों से मिट्टी एकत्र की।
  • उन्होंने कई प्रदर्शनियों का आयोजन किया।
  • यह सम्मान उज्जैन के लिए गौरव का प्रतीक है।

उज्जैन, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन के लिए यह एक विशिष्ट गौरव का पल है, जब देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री-2026 की घोषणा में शहर के वरिष्ठ पुरातत्वविद् (आर्कियोलॉजिस्ट) डॉ. नारायण व्यास का नाम शामिल किया गया है।

वर्षों से पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में निरंतर कार्यरत डॉ. व्यास को यह सम्मान उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।

डॉ. नारायण व्यास ने उज्जैन ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र की प्राचीन विरासत को देश और दुनिया के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध कार्यों के माध्यम से कई ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को नई दिशा मिली है, वहीं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उनके महत्व को लेकर समाज में जागरूकता भी बढ़ी है।

सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने पुरातत्व के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपना पूरा समय इस कार्य को समर्पित किया।

पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद उज्जैन में हर्ष और गर्व का माहौल है। शहर के इतिहासकारों, बुद्धिजीवियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों ने डॉ. व्यास को बधाई दी है और इसे उज्जैन के लिए एक महान उपलब्धि बताया है। लोग मानते हैं कि यह सम्मान उज्जैन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।

डॉ. नारायण व्यास ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह सम्मान उनके वर्षों के परिश्रम और साधना का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस खबर को सुनकर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं वर्ष 2017 से इसके लिए आवेदन कर रहा था। मेरे पिताजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को उज्जैन में तिरंगा फहराया था। वे पुरानी चीजों का संग्रह करते थे, जिसका गहरा प्रभाव हम पर पड़ा और उसी का परिणाम है कि मैं पुरातत्व विभाग से जुड़ गया।”

उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी तरह आर्कियोलॉजी को अपना लिया और धरोहर संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। वे युवाओं को पुरातत्व के महत्व के बारे में बताते रहे और विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनियों का आयोजन भी करते रहे, ताकि नई पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ सके।

डॉ. व्यास ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाए गए ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान उन्होंने एक गीत सुना “इस मिट्टी से तिलक करो, यह मिट्टी है बलिदान की।” इसी से उन्हें एक नई प्रेरणा और विषय मिला।

उन्होंने बताया कि भले ही लोग मिट्टी का नाम लेते हैं, लेकिन इसे संरक्षित करने का प्रयास पहले नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने करीब 150 स्थानों से मिट्टी एकत्र की, जिनमें कई गुमनाम और कुछ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े स्थल शामिल थे। अब तक इस विषय पर करीब 40 प्रदर्शनियां लगाई जा चुकी हैं।

डॉ. नारायण व्यास ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के अभियानों से उन लोगों को पहचान मिल रही है, जिन्होंने गुमनामी में रहते हुए देश और समाज के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि पद्मश्री न केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि उज्जैन और मालवा की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी पहचान है।

Point of View

बल्कि यह उज्जैन और मालवा के ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में किए गए कार्यों की भी पहचान है। यह सम्मान हमें याद दिलाता है कि संस्कृति और इतिहास का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

डॉ. नारायण व्यास को कब पद्मश्री सम्मान मिला?
उन्हें 25 जनवरी 2026 को पद्मश्री सम्मान की घोषणा की गई।
डॉ. व्यास ने किस क्षेत्र में काम किया है?
डॉ. व्यास ने पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में कार्य किया है।
उज्जैन को इस सम्मान से क्या लाभ होगा?
यह सम्मान उज्जैन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।
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