यूएन में भारत का सख्त बयान: OHCHR के दोहरे मानदंड और पाक अधिकृत कश्मीर में उल्लंघनों पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त के साथ 'इंटरैक्टिव डायलॉग' के दौरान भारत ने 15 अक्टूबर 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के चयनात्मक रवैये और दोहरे मानदंडों पर गंभीर सवाल उठाए। प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत का पक्ष रखते हुए पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर स्वतंत्र रिपोर्ट की माँग की।
भारत ने OHCHR पर क्या आरोप लगाए
अनुज स्वरूप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि OHCHR की ओर से चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना और दोहरे मानदंड अपनाना बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति वैश्विक भरोसे को कमज़ोर करता है। उन्होंने साथ ही यह भी रेखांकित किया कि भारत मानवाधिकार परिषद का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है और उच्चायुक्त कार्यालय के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर रिपोर्ट की माँग
भारत ने OHCHR से माँग की कि वह पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर एक निष्पक्ष रिपोर्ट जारी करे। इस रिपोर्ट में तीन प्रमुख मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई: सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों की हत्या के मामलों की स्वतंत्र जाँच; हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकारों की गारंटी; और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में लगाई गई इंटरनेट पाबंदियों को तत्काल हटाना।
भारत ने पाकिस्तान को आत्ममंथन करने की नसीहत देते हुए कहा कि उसे अपने देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में, मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन की समीक्षा करनी चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ और परमाणु धमकी पर भारत का जवाब
इससे पूर्व, संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत परमाणु हथियारों की धमकी से झुकने वाला नहीं है। बेदी ने कहा कि भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा और भारत आतंकवाद को समर्थन देने वालों तथा उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई भेद नहीं करेगा।
बेदी ने बताया कि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या की थी, जिसके बाद पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया गया था। उन्होंने कहा कि भारत ने आत्मरक्षा में यह कार्रवाई की थी और यह कदम संतुलित, सटीक तथा हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए उठाए गए थे।
निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भारत का आग्रह
प्रथम सचिव स्वरूप ने जोर देकर कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सभी देशों की समान जिम्मेदारी है और इस प्रक्रिया में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता अनिवार्य शर्त है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध ऑपरेशन सिंदूर के बाद से तनावपूर्ण बने हुए हैं और वैश्विक मंचों पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तकरार जारी है।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में OHCHR के कामकाज पर सवाल उठाए हों — लेकिन इस बार PoJK में मानवाधिकार उल्लंघनों की विशिष्ट सूची के साथ रिपोर्ट की माँग करना भारत की कूटनीतिक आक्रामकता में एक नई परत जोड़ता है। आने वाले हफ्तों में OHCHR की प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे पर आगे की बहस पर सभी की नजर रहेगी।