5 अक्टूबर 2026
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योगी सरकार की डिजिटल लाइब्रेरी: 76 से 57,600 गाँवों तक का सफर, 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन-टैबलेट

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योगी सरकार की डिजिटल लाइब्रेरी: 76 से 57,600 गाँवों तक का सफर, 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन-टैबलेट

सारांश

2017 से पहले जहाँ ई-लाइब्रेरी सिर्फ 76 जगहों तक सीमित थी, आज वह उत्तर प्रदेश के 57,600 गाँवों तक पहुँच चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर बहराइच के खसहा मोहम्मदपुर का उदाहरण देते हुए इसे ग्रामीण युवाओं के सपनों की राह आसान करने वाला बदलाव बताया।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश में डिजिटल लाइब्रेरी की पहुँच 2017 से पहले के 76 स्थानों से बढ़कर अब 57,600 ग्राम पंचायतों तक हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर बहराइच के गाँव खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी का उदाहरण साझा किया।
लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं।
32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार 2012-16 में 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिली थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि राज्य की डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार अब 57,600 ग्राम पंचायतों तक हो चुका है — जबकि 2017 से पहले यह सुविधा केवल राज्य और जिला स्तर के लगभग 76 स्थानों तक सीमित थी। मुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीण शिक्षा में आए ऐतिहासिक बदलाव के रूप में रेखांकित किया और कहा कि अब शहर की दूरी पढ़ाई में बाधा नहीं बन सकती।

मुख्य घटनाक्रम

योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर अपनी पोस्ट में बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक के गाँव खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सचिवालय में स्थापित यह लाइब्रेरी कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी सुविधाओं से सुसज्जित है। यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने लिखा कि पहले गाँव के किसी बच्चे को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए किताबों और बेहतर संसाधनों हेतु शहर की ओर देखना पड़ता था — जिसमें समय और पैसा दोनों लगते थे। अब यही संसाधन गाँव में ही सुलभ हो गए हैं।

डिजिटल शिक्षा का व्यापक ढाँचा

डिजिटल लाइब्रेरी के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए हैं। राज्य के 32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब के माध्यम से शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में ग्रामीण इंटरनेट पहुँच को लेकर राष्ट्रीय बहस जारी है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 57,600 ग्राम पंचायतों तक डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विस्तार एक उल्लेखनीय पैमाना है।

पिछली सरकार से तुलना

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में 2012-2016 के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार उस दौर में पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिली थी। इस तुलना के ज़रिए मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता से लेकर उनकी ज़मीनी पहुँच तक के अंतर को रेखांकित करने की कोशिश की।

गौरतलब है कि यह दावा सरकारी आँकड़ों पर आधारित है और स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। आलोचकों का तर्क रहा है कि बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और उसके वास्तविक उपयोग के बीच का अंतर भी मापा जाना चाहिए।

आम जनता पर असर

ग्राम पंचायत सचिवालय अब प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ ज्ञान और तकनीक के केंद्र के रूप में नई भूमिका निभा रहे हैं। जो समय और पैसा पहले शहर आने-जाने में लगता था, वह अब ग्रामीण युवाओं की पढ़ाई में लग रहा है — विशेष रूप से उन परिवारों के लिए यह राहत की बात है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटरों का खर्च वहन नहीं कर सकते।

अभिभावकों के लिए भी यह बदलाव भरोसे का आधार बना है। आधुनिक शैक्षिक संसाधनों के लिए अब बच्चों को गाँव से दूर नहीं भेजना पड़ रहा।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहल को उत्तर प्रदेश की ग्रामीण शिक्षा नीति का आधार बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ढाँचे की दीर्घकालिक सफलता इंटरनेट कनेक्टिविटी की निरंतरता, उपकरणों के रखरखाव और प्रशिक्षित स्थानीय संचालकों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। राज्य सरकार की यह पहल यदि अपने लक्ष्यों पर खरी उतरती है, तो यह देश के अन्य बड़े राज्यों के लिए एक नीतिगत मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 ग्राम पंचायतों तक डिजिटल लाइब्रेरी पहुँचाने का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इन लाइब्रेरियों का वास्तविक उपयोग कितना हो रहा है — बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और उसकी सक्रिय उपयोगिता दो अलग-अलग बातें हैं। देश में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ सरकारी डिजिटल परियोजनाएँ संख्याओं में तो बड़ी रहीं, लेकिन रखरखाव और प्रशिक्षण के अभाव में धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गईं। मुख्यमंत्री की पोस्ट में 2012-16 की तुलना राजनीतिक कथा का हिस्सा है, जिसे स्वतंत्र डेटा से परखे जाने की ज़रूरत है। यदि उत्तर प्रदेश नियमित उपयोगकर्ता संख्या, परीक्षा परिणाम और ग्रामीण नामांकन डेटा सार्वजनिक करे, तो यह पहल वाकई नीतिगत मॉडल बन सकती है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में डिजिटल लाइब्रेरी कितने गाँवों तक पहुँची है?
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में डिजिटल लाइब्रेरी अब 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुँच चुकी है। 2017 से पहले यह सुविधा केवल राज्य और जिला स्तर के लगभग 76 स्थानों तक ही सीमित थी।
ग्राम पंचायत डिजिटल लाइब्रेरी में क्या-क्या सुविधाएँ हैं?
ग्राम पंचायत सचिवालय में स्थापित इन लाइब्रेरियों में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी की सुविधा है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें और नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है।
सीएम योगी ने एक्स पर किस गाँव का उदाहरण दिया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक के खसहा मोहम्मदपुर गाँव की डिजिटल लाइब्रेरी का उदाहरण दिया। उन्होंने इसे ग्रामीण शिक्षा परिवर्तन की जीवंत तस्वीर बताया।
UP में कितने विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार 32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं। इसके अलावा लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट भी उपलब्ध कराए गए हैं।
2012-16 में UP की शिक्षा व्यवस्था की क्या स्थिति थी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि 2012-16 में पर्याप्त सरकारी निधि होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिली। यह आँकड़े सरकारी दावों पर आधारित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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