राजभर का ग्राम पंचायतों को डिजिटल बनाने का निर्देश: डिजिटल लाइब्रेरी, 28.60 लाख हैंडपंपों की जियो-टैगिंग
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 8 जून 2026 को लखनऊ स्थित विधानसभा कार्यालय में विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी, स्वच्छता प्रबंधन और पेयजल निगरानी से जुड़ी परियोजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांवों को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
डिजिटल लाइब्रेरी: ग्रामीण युवाओं तक ज्ञान की पहुँच
बैठक में बाल एवं किशोर पुस्तकालय (डिजिटल लाइब्रेरी) योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। राजभर ने कहा कि डिजिटल युग में ग्रामीण बच्चों और युवाओं को आधुनिक शैक्षिक संसाधनों से जोड़ना समय की माँग है। ये लाइब्रेरी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा और डिजिटल ज्ञान तक पहुँच सुनिश्चित करेंगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन ग्राम पंचायतों में यह सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं है, वहाँ शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर स्थापना की प्रक्रिया पूरी की जाए। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों की पहुँच अभी भी शहरी क्षेत्रों की तुलना में सीमित है, जिससे यह योजना शैक्षिक असमानता को पाटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
स्वच्छ भारत मिशन और गंगा एक्शन प्लान की समीक्षा
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत चल रहे कार्यक्रमों की भी बैठक में समीक्षा हुई। राजभर ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक अभियान है। उन्होंने सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने और ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने के निर्देश दिए।
साथ ही ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) से जुड़े कार्यों में तेज़ी लाने को कहा गया। गंगा एक्शन प्लान की समीक्षा के दौरान मंत्री ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित ग्राम पंचायतों में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों को प्रदूषणमुक्त बनाए रखने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
28.60 लाख हैंडपंपों की जियो-टैगिंग और पेयजल निगरानी
बैठक का एक प्रमुख विषय प्रदेश में स्थापित लगभग 28.60 लाख हैंडपंपों की जियो-टैगिंग और मानकीकरण व्यवस्था रही। राजभर ने निर्देश दिए कि सभी हैंडपंपों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, जिससे उनकी स्थिति, संचालन क्षमता और जल गुणवत्ता की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो सके।
उन्होंने रंग-कोडिंग व्यवस्था और जल गुणवत्ता निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ बनाने पर ज़ोर दिया। राजभर के अनुसार, जियो-टैगिंग से खराब और निष्क्रिय हैंडपंपों की त्वरित पहचान संभव होगी, जिससे मरम्मत और रखरखाव कार्यों में पारदर्शिता आएगी तथा ग्रामीणों को बेहतर पेयजल सुविधाएँ मिल सकेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
जवाबदेही और तकनीक पर जोर
राजभर ने अधिकारियों को विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीक का अधिकतम उपयोग करने और सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए जिला तथा विकास खंड स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं और इन्हें सशक्त बनाकर ही आत्मनिर्भर गांवों का सपना साकार किया जा सकता है। अधिकारियों से पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने का आह्वान किया गया। अब देखना यह होगा कि इन निर्देशों का ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से क्रियान्वयन होता है।