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यूपी होम स्टे नीति 2025: अब 8 कमरों तक पंजीकरण, ऑटो-रिन्यूअल से मिलेगी बड़ी राहत

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यूपी होम स्टे नीति 2025: अब 8 कमरों तक पंजीकरण, ऑटो-रिन्यूअल से मिलेगी बड़ी राहत

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने होम स्टे नीति-2025 की एसओपी में बड़ा बदलाव किया है — कमरों की सीमा 6 से बढ़ाकर 8, डॉरमेट्री क्षमता 12 से 16 बिस्तर और पोर्टल के जरिए ऑटो-रिन्यूअल की सुविधा। यह कदम राज्य में पर्यटन को गति देने और छोटे संचालकों को राहत देने की दिशा में उठाया गया है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जुलाई 2025 को ' यूपी बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 ' की एसओपी में संशोधन किया।
होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम कमरों की सीमा 6 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है।
डॉरमेट्री की पात्र क्षमता 12 से बढ़ाकर 16 बिस्तर की गई।
9 या अधिक कमरों वाले भवन इस नीति के तहत पंजीकरण के अयोग्य होंगे; मालिक का उसी भवन में रहना अनिवार्य।
पंजीकरण का ऑटो-रिन्यूअल अब यूपी पर्यटन विभाग के पोर्टल पर स्वयं किया जा सकेगा, वैधता समाप्ति से 3 माह पहले से।
देरी होने पर आवेदन जिला स्तरीय समिति के पास जाएगा, जहाँ उचित कारण प्रस्तुत करना होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जुलाई 2025 को 'उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025' की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में अहम संशोधन किए हैं, जिसके तहत होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम 8 कमरों का पंजीकरण कराया जा सकेगा। इसके साथ ही पंजीकरण प्रमाण पत्र के स्व-नवीनीकरण (ऑटो-रिन्यूअल) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे संचालकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

संशोधित नीति में क्या बदला

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को जानकारी दी कि हितधारकों की सुविधा और नीति को अधिक लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से यह संशोधन किए गए हैं। संशोधित व्यवस्था के अनुसार होम स्टे प्रतिष्ठान में न्यूनतम 1 और अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत कराए जा सकेंगे। 9 या उससे अधिक कमरों वाले भवन इस नीति के तहत पंजीकरण के पात्र नहीं होंगे।

एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि होम स्टे का मालिक या उसका परिवार उसी भवन में निवासरत होना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान होम स्टे की मूल अवधारणा — यानी घर जैसे माहौल में पर्यटकों को ठहराना — को बनाए रखने के लिए है।

बेड एंड ब्रेकफास्ट और डॉरमेट्री के लिए नए प्रावधान

बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के लिए भी न्यूनतम 1 और अधिकतम 8 कमरों के पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 16 बिस्तरों तक की डॉरमेट्री को भी इस श्रेणी में पात्र इकाई माना जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व की एसओपी में होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम 6 कमरों के पंजीकरण की अनुमति थी, जबकि डॉरमेट्री की क्षमता 12 बिस्तरों तक सीमित थी।

ऑटो-रिन्यूअल की प्रक्रिया

होम स्टे, ग्रामीण होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के पंजीकरण प्रमाण पत्र का स्व-नवीनीकरण अब उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के पोर्टल के माध्यम से आवेदक स्वयं कर सकेंगे। यह प्रक्रिया पंजीकरण की वैधता समाप्त होने से तीन माह पहले शुरू की जा सकेगी।

यदि कोई आवेदक निर्धारित समय के भीतर ऑटो-रिन्यूअल नहीं करा पाता है, तो उसका आवेदन जिला स्तरीय समिति के विवेक पर विचार किया जाएगा — लेकिन इसके लिए आवेदक को देरी का पर्याप्त और उचित कारण प्रस्तुत करना होगा।

आम जनता और पर्यटन क्षेत्र पर असर

यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार महाकुंभ 2025 की सफलता के बाद राज्य में पर्यटन अवसंरचना को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कमरों की सीमा बढ़ने से छोटे व्यवसायी और ग्रामीण क्षेत्रों के होम स्टे संचालक अधिक पर्यटकों को ठहरा सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना है।

ऑनलाइन ऑटो-रिन्यूअल की सुविधा से प्रशासनिक बोझ कम होगा और अनुपालन दर बेहतर होने की उम्मीद है। आगे चलकर इन बदलावों का असर राज्य के ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन सर्किट पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पोर्टल की तकनीकी क्षमता और ज़िला स्तरीय समितियों की सक्रियता इसे ज़मीन पर उतार पाएगी। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण होम स्टे का पंजीकरण पहले भी जागरूकता और डिजिटल पहुँच की कमी के चलते सीमित रहा है। महाकुंभ के बाद पर्यटन की बढ़ती माँग को देखते हुए यह कदम सही दिशा में है, लेकिन बिना प्रभावी आउटरीच और प्रशिक्षण के यह नीति भी पिछले सुधारों की तरह शहरी संचालकों तक ही सिमट सकती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी होम स्टे नीति-2025 में क्या नया बदलाव हुआ है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम कमरों की सीमा 6 से बढ़ाकर 8 कर दी है और डॉरमेट्री की पात्र क्षमता 12 से बढ़ाकर 16 बिस्तर की गई है। इसके साथ ही पोर्टल के ज़रिए ऑटो-रिन्यूअल की सुविधा भी शुरू की गई है।
होम स्टे पंजीकरण के लिए कौन पात्र है?
वे भवन पात्र हैं जिनमें न्यूनतम 1 और अधिकतम 8 कमरे हों। 9 या उससे अधिक कमरों वाले भवन इस नीति के तहत पंजीकरण के योग्य नहीं होंगे। साथ ही होम स्टे के मालिक या उनके परिवार का उसी भवन में निवासरत होना अनिवार्य है।
ऑटो-रिन्यूअल की प्रक्रिया कैसे काम करेगी?
पंजीकरण की वैधता समाप्त होने से 3 माह पहले आवेदक उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के पोर्टल पर स्वयं स्व-नवीनीकरण कर सकेंगे। यदि समय पर रिन्यूअल नहीं हो पाता, तो आवेदन जिला स्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा, जहाँ देरी का उचित कारण देना होगा।
डॉरमेट्री के लिए क्या नियम हैं?
संशोधित नीति के तहत 16 बिस्तरों तक की डॉरमेट्री को बेड एंड ब्रेकफास्ट श्रेणी में पात्र इकाई माना जाएगा। पहले यह सीमा 12 बिस्तरों तक थी।
यह बदलाव पर्यटन क्षेत्र को कैसे प्रभावित करेगा?
कमरों की सीमा बढ़ने से छोटे और ग्रामीण होम स्टे संचालक अधिक पर्यटकों को ठहरा सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ने की संभावना है। ऑनलाइन ऑटो-रिन्यूअल से प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी और अनुपालन दर में सुधार की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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