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मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी: राहुल-प्रियंका का सरकार पर हमला, 12 मजदूर मुक्त

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मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी: राहुल-प्रियंका का सरकार पर हमला, 12 मजदूर मुक्त

सारांश

मुजफ्फरनगर की एक फैक्ट्री में डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाए गए 12 मजदूरों की मुक्ति के बाद राहुल और प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा। छह राज्यों के पीड़ित, नाबालिग भी शामिल — यह मामला अब राष्ट्रीय श्रम नीति पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्य बातें

22 जून को मुजफ्फरनगर के ग्राम मांडी स्थित फैक्ट्री से 12 बंधुआ मजदूर मुक्त कराए गए, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे।
पीड़ित बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के निवासी थे, जिन्हें डेढ़ से दो साल तक बंधक रखा गया।
पुलिस के अनुसार फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान ने मारपीट के लिए शिवा त्यागी को विशेष रूप से नियुक्त किया था।
राहुल गांधी ने एक्स पर इसे 'इंसानी गरिमा पर हमला' और 'धराशाई अर्थव्यवस्था का मलबा' बताया।
प्रियंका गांधी ने इसे 'संविधान पर हमला' कहते हुए दोषियों के लिए नजीर बनने वाली सजा की माँग की।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक फैक्ट्री से मुक्त कराए गए 12 बंधुआ मजदूरों पर हुए अत्याचार को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। 22 जून को पुलिस द्वारा इन मजदूरों को मुक्त कराए जाने के बाद यह मामला राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र बन गया है।

मुख्य घटनाक्रम

22 जून को मुजफ्फरनगर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के नेतृत्व में थाना तितावी पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम ने ग्राम मांडी स्थित एक फैक्ट्री में छापा मारकर 12 मजदूरों को मुक्त कराया। पुलिस के अनुसार ये मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के निवासी थे, जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे।

पुलिस के बयान के अनुसार इन मजदूरों को रेलवे स्टेशन से नौकरी, वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का प्रलोभन देकर फैक्ट्री में लाया जाता था। वहाँ पहुँचने के बाद उन्हें डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया। दिन में एक बार सूखी रोटी और मवेशियों का चारा दिया जाता था, मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे, और वेतन या बाहर जाने की माँग करने पर नुकीले डंडों से मारपीट की जाती थी।

पुलिस के अनुसार फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान ने मजदूरों पर अत्याचार करने के लिए शिवा त्यागी नामक एक व्यक्ति को विशेष रूप से नियुक्त किया हुआ था। मजदूरों को पिटबुल कुत्ते से डराया जाता था।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि यह मामला 'बेहद चौंकाने वाला' है। उन्होंने कहा कि 'बिना मजदूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है — पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।'

राहुल ने आगे कहा कि 'जब रोजगार खत्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमजोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमजोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है।' उन्होंने इस घटना को 'एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा' बताया।

प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस घटना को 'किसी भी सभ्य समाज में अस्वीकार्य' बताया। उन्होंने कहा कि 'यह सिर्फ कुछ व्यक्तियों पर क्रूरता नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा पर और हमारे संविधान पर हमला है।' प्रियंका ने माँग की कि दोषियों को ऐसी सजा मिले जो 'नजीर बने'।

आम जनता और मजदूर वर्ग पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और श्रम कानूनों के क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम, 1976 के बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। इस मामले में पीड़ित छह अलग-अलग राज्यों से थे, जो यह दर्शाता है कि तस्करी और शोषण का यह नेटवर्क अंतर्राज्यीय स्तर पर संगठित था।

क्या होगा आगे

मुजफ्फरनगर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। मुक्त कराए गए मजदूरों के पुनर्वास और उनके गृह राज्यों में वापसी की व्यवस्था की जा रही है। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार से श्रम नीतियों की समीक्षा और मनरेगा जैसी योजनाओं को मजबूत करने की माँग की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रवासी मजदूरों की संरचनात्मक कमज़ोरी एक सत्यापित वास्तविकता है। असली सवाल यह है कि छह राज्यों के मजदूर एक ही फैक्ट्री में डेढ़ से दो साल तक कैसे बंद रहे — और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। जवाबदेही केवल फैक्ट्री मालिक तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी मामला क्या है?
22 जून को मुजफ्फरनगर के ग्राम मांडी स्थित एक फैक्ट्री से पुलिस ने 12 मजदूरों को मुक्त कराया, जिन्हें डेढ़ से दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस के अनुसार उन्हें भोजन, वेतन और रोजगार का प्रलोभन देकर लाया गया था, लेकिन वहाँ उनके साथ गंभीर शारीरिक अत्याचार किए गए।
मुक्त कराए गए मजदूर कहाँ के रहने वाले थे?
मुक्त कराए गए 12 मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के निवासी थे। पुलिस के अनुसार इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस मामले पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर इसे 'इंसानी गरिमा पर हमला' और 'धराशाई अर्थव्यवस्था का मलबा' बताते हुए पीड़ितों के पुनर्वास और दोषियों को कड़ी सजा की माँग की। प्रियंका गांधी ने इसे 'संविधान पर हमला' कहा और नजीर बनने वाली सजा की माँग की।
फैक्ट्री में मजदूरों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता था?
पुलिस के बयान के अनुसार मजदूरों को दिन में एक बार सूखी रोटी और मवेशियों का चारा दिया जाता था। वेतन या बाहर जाने की माँग पर नुकीले डंडों से मारपीट होती थी, पिटबुल कुत्ते से डराया जाता था और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस के अनुसार फैक्ट्री संचालक अंकित बालियान और मारपीट के लिए नियुक्त शिवा त्यागी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। मामले की जाँच मुजफ्फरनगर पुलिस कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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