यूपी पशुधन भर्ती घोटाला: EOW ने पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के 2014 पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया। 1980 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी पर भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी और ओएमआर शीट मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं का आरोप है।
मामले की पृष्ठभूमि
पशुपालन विभाग में 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारी पदों को भरने के लिए सहारनपुर मंडल को छोड़कर प्रदेश के 17 मंडलों में भर्ती की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए 2 फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। भर्ती के समय योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थे।
कथित अनियमितताएँ और EOW की जाँच
EOW की जाँच में कथित तौर पर सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ओएमआर शीट का केंद्रीकृत मूल्यांकन कराने के लिए रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट को नामित किया गया था। जाँच एजेंसी के अनुसार, नियमों के विपरीत निर्णय लेकर ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई, जिससे पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान पहुँचा और अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ मिला।
गौरतलब है कि इस प्रकार के भर्ती घोटाले उत्तर प्रदेश में पहले भी सामने आते रहे हैं, जहाँ ओएमआर-आधारित परीक्षाओं में केंद्रीकृत मूल्यांकन व्यवस्था को अनियमितताओं का जरिया बताया जाता रहा है।
कानूनी कार्रवाई का इतिहास
इस मामले की जाँच वर्ष 2017 में शासन द्वारा विशेष जाँच दल (SIT) को सौंपी गई थी। जाँच के पश्चात वर्ष 2019 में SIT थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 201 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत आरोप दर्ज किए गए।
आरोपियों की संख्या और आरोप-पत्र
जाँच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में 6 नामजद और विवेचना के दौरान सामने आए 22 अन्य आरोपियों समेत कुल 28 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इनमें से 25 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न तिथियों पर आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
योगेश कुमार की गिरफ्तारी को इस भर्ती घोटाले की जाँच में एक निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि वे उस समय विभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी थे। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जाँच और अभियोजन प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या शेष तीन अभियुक्तों के खिलाफ भी शीघ्र आरोप-पत्र दाखिल होते हैं।