14 अक्टूबर 2026
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यूपी पशुधन भर्ती घोटाला: EOW ने पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया

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यूपी पशुधन भर्ती घोटाला: EOW ने पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया

सारांश

2014 के यूपी पशुधन भर्ती घोटाले में EOW ने 1980 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया। 1,198 पदों की भर्ती में ओएमआर शीट में छेड़छाड़ का आरोप; 28 अभियुक्तों में यह पहला वरिष्ठतम अधिकारी है।

मुख्य बातें

EOW ने 14 अक्टूबर 2026 को 1980 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया।
मामला 2014 में पशुपालन विभाग के 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारी पदों की भर्ती से जुड़ा है; परीक्षा 2 फरवरी 2014 को हुई थी।
रायबरेली के फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट से कथित तौर पर नियम-विरुद्ध केंद्रीकृत ओएमआर मूल्यांकन कराया गया।
जाँच 2017 में SIT को सौंपी गई; 2019 में मुकदमा दर्ज; कुल 28 अभियुक्त , जिनमें से 25 के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल हो चुके हैं।
IPC की धाराएँ 409, 420, 467, 468, 471, 120बी, 201 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत आरोप।

उत्तर प्रदेश के 2014 पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया। 1980 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी पर भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी और ओएमआर शीट मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं का आरोप है।

मामले की पृष्ठभूमि

पशुपालन विभाग में 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारी पदों को भरने के लिए सहारनपुर मंडल को छोड़कर प्रदेश के 17 मंडलों में भर्ती की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए 2 फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। भर्ती के समय योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत थे।

कथित अनियमितताएँ और EOW की जाँच

EOW की जाँच में कथित तौर पर सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ओएमआर शीट का केंद्रीकृत मूल्यांकन कराने के लिए रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट को नामित किया गया था। जाँच एजेंसी के अनुसार, नियमों के विपरीत निर्णय लेकर ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई, जिससे पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान पहुँचा और अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ मिला।

गौरतलब है कि इस प्रकार के भर्ती घोटाले उत्तर प्रदेश में पहले भी सामने आते रहे हैं, जहाँ ओएमआर-आधारित परीक्षाओं में केंद्रीकृत मूल्यांकन व्यवस्था को अनियमितताओं का जरिया बताया जाता रहा है।

कानूनी कार्रवाई का इतिहास

इस मामले की जाँच वर्ष 2017 में शासन द्वारा विशेष जाँच दल (SIT) को सौंपी गई थी। जाँच के पश्चात वर्ष 2019 में SIT थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 201 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत आरोप दर्ज किए गए।

आरोपियों की संख्या और आरोप-पत्र

जाँच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में 6 नामजद और विवेचना के दौरान सामने आए 22 अन्य आरोपियों समेत कुल 28 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इनमें से 25 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न तिथियों पर आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

योगेश कुमार की गिरफ्तारी को इस भर्ती घोटाले की जाँच में एक निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि वे उस समय विभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी थे। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जाँच और अभियोजन प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या शेष तीन अभियुक्तों के खिलाफ भी शीघ्र आरोप-पत्र दाखिल होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जाँच 2017 में शुरू हुई, मुकदमा 2019 में दर्ज हुआ और गिरफ्तारी 2026 में — बारह वर्ष की देरी यह सवाल उठाती है कि क्या तंत्र वरिष्ठ अधिकारियों को लंबे समय तक स्वाभाविक सुरक्षा देता है। 25 आरोपियों पर आरोप-पत्र दाखिल हो चुके हैं, फिर भी सर्वोच्च अधिकारी अंत में पकड़ा गया — यह अनुक्रम खुद एक कहानी है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगेश कुमार को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
योगेश कुमार को उत्तर प्रदेश के 2014 पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया गया है। उन पर भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी और ओएमआर शीट मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं का आरोप है।
पशुधन भर्ती घोटाले में क्या हुआ था?
2014 में पशुपालन विभाग के 1,198 पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर ओएमआर शीट के मूल्यांकन में छेड़छाड़ की गई थी। रायबरेली के फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट से नियम-विरुद्ध केंद्रीकृत मूल्यांकन कराया गया, जिससे पात्र उम्मीदवारों को नुकसान और अपात्र उम्मीदवारों को लाभ मिलने का आरोप है।
इस मामले में जाँच कब और कैसे शुरू हुई?
2017 में उत्तर प्रदेश शासन ने इस मामले की जाँच एक विशेष जाँच दल (SIT) को सौंपी। SIT की जाँच के बाद 2019 में मुकदमा दर्ज हुआ, और अब EOW यह जाँच आगे बढ़ा रही है।
इस मामले में कुल कितने अभियुक्त हैं?
जाँच एजेंसी के अनुसार, मामले में कुल 28 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है — 6 नामजद और जाँच के दौरान सामने आए 22 अन्य। इनमें से 25 के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
योगेश कुमार पर कौन-सी धाराओं के तहत आरोप दर्ज हैं?
उन पर IPC की धाराएँ 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 201, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के तहत आरोप दर्ज हैं। ये धाराएँ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, दस्तावेज़ जालसाज़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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