28 अगस्त 2026
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पशु चिकित्सा भर्ती घोटाला: आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार सीआईडी के सामने पेश, ईडी छापे के बाद बड़ी कार्रवाई

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पशु चिकित्सा भर्ती घोटाला: आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार सीआईडी के सामने पेश, ईडी छापे के बाद बड़ी कार्रवाई

सारांश

ईडी छापे और उत्तर प्रदेश में 'गायब' होने की खबरों के बाद आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार आखिरकार बेंगलुरु में सीआईडी के सामने पेश हुए। कर्नाटक के पशु चिकित्सा भर्ती घोटाले में यह अब तक की सबसे बड़ी जांच-कार्रवाई है, जिसने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी है।

मुख्य बातें

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 28 अगस्त को बेंगलुरु में सीआईडी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए।
गंगवार केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक रह चुके हैं और वर्तमान में एमएसएमई निदेशक के पद पर हैं।
ईडी की छापेमारी के बाद पुलिस दल उन्हें ढूंढने उत्तर प्रदेश गई, लेकिन वे वहाँ नहीं मिले।
निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार भी सीआईडी के सामने पेश हो चुके हैं।
मामले में ईडी और सीआईडी दोनों समानांतर जांच कर रही हैं — ईडी वित्तीय पहलू, सीआईडी भर्ती अनियमितताएँ।
केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियांक खरगे के बयानों पर सवाल उठाए, मामले ने राजनीतिक रंग लिया।

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कथित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले के सिलसिले में 28 अगस्त को बेंगलुरु स्थित आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए। यह घटनाक्रम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके आवास पर छापेमारी और कथित तौर पर उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस दल के उत्तर प्रदेश जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है।

मुख्य घटनाक्रम

2016 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार वर्तमान में कर्नाटक उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में एमएसएमई निदेशक के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वे कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में परीक्षा नियंत्रक के रूप में कार्यरत थे — ठीक उसी दौरान जब पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। सीआईडी कार्यालय में वे जांच अधिकारी एसीपी राघवेंद्र हेगड़े के समक्ष पेश हुए, जहाँ भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उनसे विस्तार से पूछताछ की गई।

गौरतलब है कि पिछले रविवार को ईडी के अधिकारी केपीएससी द्वारा पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच के तहत गंगवार के आवास पर छापा मारने पहुंचे थे, जिससे उनके परिसर में काफी हंगामा हुआ था।

गायब होने और छुट्टी का विवाद

रिपोर्टों के अनुसार, गंगवार ने सरकार को पत्र लिखकर 15 दिन की छुट्टी मांगी थी और बताया था कि उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा है। हालांकि, ईडी की छापेमारी के बाद जब अधिकारियों की एक टीम कथित तौर पर उन्हें ढूंढने उनके पैतृक गांव उत्तर प्रदेश पहुंची, तो वे वहाँ नहीं मिले। इसके बाद उनके ठिकाने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने ईडी की छापेमारी के बाद कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के बयानों पर सवाल उठाए। खरगे ने पहले कहा था कि अधिकारी ने पिता की खराब सेहत का हवाला देते हुए लिखित में छुट्टी मांगी थी और सरकार के पास उस अनुरोध पर संदेह करने का कोई कारण नहीं था। कुमारस्वामी के सवालों के बाद यह प्रकरण राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील हो गया।

दोहरी जांच: ईडी और सीआईडी

इस मामले में ईडी और सीआईडी दोनों एजेंसियाँ समानांतर जांच कर रही हैं। ईडी वित्तीय पहलुओं की पड़ताल कर रही है, जबकि सीआईडी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और विभिन्न अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार भी इस मामले में सीआईडी के सामने पूछताछ के लिए पेश हो चुके हैं।

आगे क्या होगा

गंगवार और साहूकार से की गई पूछताछ से जांचकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया की घटनाओं का क्रम स्थापित करने और यह निर्धारित करने में मदद मिलने की उम्मीद है कि कथित अनियमितताओं में किन अधिकारियों या व्यक्तियों की भूमिका रही। दोनों एजेंसियों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सवाल उठाता है कि क्या प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही की कोई वास्तविक परत बची है। ईडी और सीआईडी की दोहरी जांच तभी सार्थक होगी जब परिणाम पारदर्शी रूप से सामने आएँ — अन्यथा यह भी उन मामलों की सूची में जुड़ जाएगा जो जांच के दौर में सुर्खियाँ बनते हैं और नतीजे के बिना खामोश हो जाते हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो कर्नाटक उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में एमएसएमई निदेशक के पद पर तैनात हैं। वे केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक रहते हुए पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा के दौरान कथित अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोपों की जांच के दायरे में हैं।
पशु चिकित्सा भर्ती घोटाले में ईडी और सीआईडी की क्या भूमिका है?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले के वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है, जबकि सीआईडी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। दोनों एजेंसियाँ समानांतर जांच कर रही हैं।
गंगवार ईडी छापे के बाद उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं मिले?
रिपोर्टों के अनुसार, गंगवार ने पिता की बीमारी का हवाला देते हुए 15 दिन की छुट्टी मांगी थी। ईडी छापे के बाद जब पुलिस दल उन्हें उनके पैतृक गांव उत्तर प्रदेश में ढूंढने गई, तो वे वहाँ नहीं मिले। बाद में वे स्वयं 28 अगस्त को बेंगलुरु में सीआईडी के सामने पेश हुए।
इस मामले में केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार की क्या भूमिका है?
निलंबित केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार भी इस जांच के दायरे में हैं और वे सीआईडी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हो चुके हैं। उनसे और गंगवार से की गई पूछताछ से जांचकर्ताओं को भर्ती घोटाले की पूरी कड़ी जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस मामले ने कर्नाटक की राजनीति को कैसे प्रभावित किया है?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियांक खरगे के उन बयानों पर सवाल उठाए जिनमें खरगे ने कहा था कि सरकार के पास गंगवार की छुट्टी के अनुरोध पर संदेह करने का कोई कारण नहीं था। इससे यह मामला प्रशासनिक जांच के साथ-साथ राजनीतिक विवाद का केंद्र भी बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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