12 अक्टूबर 2026
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यूपी मतदाता सूची में हजारों डुप्लीकेट नाम: सपा ने 403 सीटों के हर बूथ की जांच की मांग की

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यूपी मतदाता सूची में हजारों डुप्लीकेट नाम: सपा ने 403 सीटों के हर बूथ की जांच की मांग की

सारांश

उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव की आहट के बीच सपा ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर डुप्लीकेट नामों का दावा करते हुए निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपा है। कन्नौज, इटावा और श्रावस्ती से ठोस उदाहरण देते हुए पार्टी ने 403 सीटों के हर बूथ की जांच की माँग की है — यह आरोप चुनावी विश्वसनीयता के लिए बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी ने 12 अक्टूबर 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपा।
पार्टी का दावा है कि 100 विधानसभा क्षेत्रों की पड़ताल में हजारों डुप्लीकेट मतदाता प्रविष्टियाँ मिली हैं।
कन्नौज, इटावा और श्रावस्ती में कुछ मतदाताओं के नाम तीन से चार बार दर्ज होने का दावा; अलग-अलग EPIC नंबर होने की बात भी कही गई।
27 अक्टूबर 2025 से चली 166 दिन की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बावजूद डुप्लीकेट नाम बने रहने का आरोप।
सपा ने सभी 403 विधानसभा सीटों के हर बूथ पर व्यापक सत्यापन की माँग की है।
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने ज्ञापन सौंपा; 2027 विधानसभा चुनाव से पहले त्वरित कार्रवाई की माँग।

समाजवादी पार्टी (सपा) ने 12 अक्टूबर 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि प्रदेश की 100 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में की गई पड़ताल के दौरान मतदाता सूची में हजारों डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ पाई गई हैं। पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी 403 सीटों के प्रत्येक बूथ पर व्यापक सत्यापन की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह भी उपस्थित रहे। पार्टी ने माँग की कि विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 को पारदर्शी, निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रत्येक बूथ स्तर पर मतदाता सूची की गहन जांच कराई जाए।

डुप्लीकेट प्रविष्टियों के दावे और उदाहरण

ज्ञापन में सपा ने कई ज़िलों की विधानसभा सीटों से कथित डुप्लीकेट प्रविष्टियों के ठोस उदाहरण पेश किए। कन्नौज जिले की छिबरामऊ विधानसभा सीट में नीतू और मीरा गुप्ता के नाम तीन-तीन बार, प्रखर बैस का नाम तीन बार तथा मुनेश का नाम दो बार दर्ज होने का दावा किया गया है।

इटावा जिले की जसवंतनगर विधानसभा सीट में दीपिका पाल, हिमेश बाबू, शिवानी और आरती के नाम तीन-तीन बार दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। श्रावस्ती विधानसभा सीट के संदर्भ में रोशन लाल और अनीश के नाम चार-चार बार तथा रिजवान का नाम तीन बार दर्ज होने की बात कही गई है। पार्टी के अनुसार, इन सभी प्रविष्टियों में अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर दर्ज हैं।

प्रभावित जिलों की सूची

ज्ञापन में सहारनपुर, मथुरा, आगरा, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, उन्नाव, लखनऊ, सुल्तानपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर नगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र सहित कई जिलों की विधानसभा सीटों का उल्लेख है। लखनऊ जिले की मलिहाबाद, बख्शी का तालाब, सरोजनीनगर, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तरी, लखनऊ पूर्व, लखनऊ मध्य और लखनऊ कैंट सीटों को भी सूची में शामिल किया गया है।

विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल

सपा ने अपने ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया कि भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची शुद्ध करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू करने की बात कही थी। गौरतलब है कि 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई 166 दिन की इस प्रक्रिया के बावजूद कथित तौर पर बड़ी संख्या में डुप्लीकेट नाम बने रहने की शिकायत है। पार्टी ने इसे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया है।

सपा की माँगें और आगे की राह

पार्टी ने निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह किया है कि प्रत्येक संदिग्ध प्रविष्टि की जांच कर मतदाता के वास्तविक निवास और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाए। सत्यापन के बाद ही अतिरिक्त नाम हटाए जाएं, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो। यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं और सभी दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल तकनीकी प्रणाली की क्षमता पर उठता है। असली परीक्षा यह है कि निर्वाचन अधिकारी इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन कितनी शीघ्रता और पारदर्शिता से करते हैं — क्योंकि 2027 में उत्तर प्रदेश का मतदाता आधार ही सबसे बड़ा दांव है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा ने यूपी मतदाता सूची पर क्या आरोप लगाए हैं?
समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश की 100 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची की जांच के दौरान हजारों डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ मिली हैं, जिनमें कुछ मतदाताओं के नाम तीन से चार बार अलग-अलग EPIC नंबरों के साथ दर्ज हैं। पार्टी ने कन्नौज, इटावा और श्रावस्ती जिलों से ठोस उदाहरण दिए हैं।
सपा ने निर्वाचन आयोग से क्या माँग की है?
सपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश से माँग की है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सभी 403 सीटों के प्रत्येक बूथ पर मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन कराया जाए। पार्टी ने यह भी कहा है कि सत्यापन के बाद ही डुप्लीकेट नाम हटाए जाएं ताकि कोई पात्र मतदाता प्रभावित न हो।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है और यह कब शुरू हुआ?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भारत निर्वाचन आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को शुद्ध किया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई और 166 दिनों तक चली। सपा का आरोप है कि इस प्रक्रिया के बाद भी बड़ी संख्या में डुप्लीकेट नाम बने हुए हैं।
किन जिलों में डुप्लीकेट प्रविष्टियों के उदाहरण दिए गए हैं?
सपा ने कन्नौज की छिबरामऊ, इटावा की जसवंतनगर और श्रावस्ती विधानसभा सीटों से नामों के तीन-चार बार दर्ज होने के उदाहरण दिए हैं। इसके अलावा ज्ञापन में सहारनपुर, मथुरा, आगरा, बरेली, वाराणसी और लखनऊ सहित 26 से अधिक जिलों की सीटों का उल्लेख है।
यह मामला 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा वाला राज्य है जहाँ 403 सीटें हैं और करोड़ों मतदाता हैं। मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। 2027 के चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं, ऐसे में मतदाता सूची की विश्वसनीयता सभी दलों के लिए अहम मुद्दा बन गई है।
राष्ट्र प्रेस
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