11 जुलाई 2026
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उत्तराखंड में 14 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट: भूस्खलन, बाढ़ और चार धाम यात्रा पर असर

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उत्तराखंड में 14 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट: भूस्खलन, बाढ़ और चार धाम यात्रा पर असर

सारांश

IMD ने 11 से 14 जुलाई तक उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है — गढ़वाल और कुमाऊं के कई जिले हाई अलर्ट पर हैं। भूस्खलन से राजमार्ग बाधित हुए, ऋषिकेश में गंगा चेतावनी निशान के करीब पहुंची और चार धाम यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई।

मुख्य बातें

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 से 14 जुलाई 2025 तक उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, उधम सिंह नगर और चंपावत सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं।
कर्णप्रयाग-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हुआ; मलबा हटाकर बहाल किया गया; मल्ली सतपुली के पास ट्रक पर पत्थर गिरा, कोई हताहत नहीं।
ऋषिकेश में गंगा नदी त्रिवेणी घाट पर चेतावनी के निशान के करीब पहुंची।
चार धाम यात्रा मार्गों पर बचाव-राहत टीमें तैनात; तीर्थयात्रियों को यात्रा से पहले मौसम जाँचने की सलाह।
IMD के अनुसार भूस्खलन, बिजली गिरना, आंधी-तूफान और सड़क-बिजली बाधित होने का खतरा अगले चार दिनों तक बना रहेगा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 जुलाई 2025 को उत्तराखंड के लिए 14 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसमें गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई जिले सीधे प्रभावित क्षेत्र में हैं। IMD की चेतावनी के तुरंत बाद राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) ने सभी जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रखने के निर्देश दिए हैं। भूस्खलन, अचानक बाढ़ और बिजली गिरने की आशंका के चलते जनजीवन पर गंभीर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।

किन जिलों में सबसे ज़्यादा खतरा

11 जुलाई को देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। 12 जुलाई को स्थिति और विकट होने की आशंका है, जब पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में मौसम खासतौर पर खतरनाक रह सकता है। IMD के अनुसार अगले चार दिनों में भूस्खलन, चट्टानें खिसकना, अचानक मलबे का बहाव, छोटी नदियों में जलस्तर वृद्धि, निचले इलाकों में बाढ़ और आंधी-तूफान जैसे कई खतरे एकसाथ बने रह सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम: सड़कें बाधित, राहत कार्य जारी

लगातार बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में यातायात बाधित हुआ। थराली क्षेत्र के नारायणबगड़ में कर्णप्रयाग-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा बह जाने से कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी, हालांकि बाद में मलबा हटाकर मार्ग बहाल कर दिया गया।

पौड़ी गढ़वाल जिले में भूस्खलन की कई घटनाएं सामने आईं। गुमखाल-सतपुली हाईवे पर मल्ली सतपुली के पास सब्जियाँ ले जा रहे एक ट्रक पर पहाड़ी से बड़ा पत्थर गिर पड़ा, जिससे ट्रक को भारी नुकसान पहुंचा और सामान सड़क पर बिखर गया। अधिकारियों के अनुसार इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोटद्वार-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग (सतपुली के पास), श्रीनगर-रुद्रप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग (सिरोबागर के पास) और गरुड़ चट्टी-नीलकंठ महादेव मार्ग को मलबा हटाकर पुनः खोल दिया। सुरक्षित आवाजाही के लिए इन मार्गों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

चार धाम यात्रा पर असर

यह अलर्ट ऐसे समय में आया है जब चार धाम यात्रा अपने चरम पर है। रुद्रप्रयाग जिले में अधिकारियों ने बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है और संवेदनशील स्थानों पर बचाव एवं राहत टीमें तैनात की गई हैं। तीर्थयात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी और सड़कों की स्थिति अवश्य जाँच लें।

गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान के करीब

पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश के कारण ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा है और नदी त्रिवेणी घाट पर चेतावनी के निशान के करीब पहुंच गई है। यह स्थिति मैदानी इलाकों के निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा भी बढ़ाती है।

आगे क्या करें: प्रशासन की अपील

SEOC ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी जाए। IMD की एडवाइज़री में स्पष्ट किया गया है कि अगले चार दिनों तक सड़क संपर्क और बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, विशेषकर पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्थायी ढलान-स्थिरीकरण और अर्ली-वॉर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की गति धीमी रही है। चार धाम यात्रा के चरम सीजन में यह अलर्ट लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का सवाल उठाता है — जहाँ मौसमी जोखिम और पर्यटन दबाव एकसाथ टकराते हैं। ऋषिकेश में गंगा का चेतावनी निशान छूना यह भी संकेत देता है कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बढ़ रही है, जो दीर्घकालिक जलवायु बदलाव का हिस्सा हो सकता है। प्रशासनिक सतर्कता ज़रूरी है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या राहत-प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर जोखिम-न्यूनीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट कब तक है?
IMD ने 11 जुलाई से 14 जुलाई 2025 तक उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 12 जुलाई को पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में मौसम सबसे खराब रहने की आशंका है।
उत्तराखंड में कौन से जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, उधम सिंह नगर, चंपावत और रुद्रप्रयाग सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। ये जिले गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में फैले हैं।
चार धाम यात्रा पर बारिश का क्या असर पड़ेगा?
रुद्रप्रयाग जिले में बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संवेदनशील स्थानों पर बचाव टीमें तैनात हैं। तीर्थयात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी और सड़कों की स्थिति अवश्य जाँच लें।
ऋषिकेश में गंगा नदी की क्या स्थिति है?
पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश के कारण ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा है और नदी त्रिवेणी घाट पर चेतावनी के निशान के करीब पहुंच गई है। इससे निचले इलाकों में जलभराव का खतरा भी बढ़ा है।
भारी बारिश के दौरान नागरिक क्या सावधानियाँ बरतें?
अधिकारियों ने अनावश्यक यात्रा से बचने, विशेषकर पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में न जाने की अपील की है। IMD की एडवाइज़री के अनुसार भूस्खलन, बिजली गिरने और आंधी-तूफान का खतरा 14 जुलाई तक बना रहेगा और सड़क व बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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