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वाघेला के 'मैला उठाओ' बयान पर डॉ. यज्ञेश दवे का पलटवार — 'मेरे घर से शुरुआत करो, ₹5 लाख महीना दूंगा'

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वाघेला के 'मैला उठाओ' बयान पर डॉ. यज्ञेश दवे का पलटवार — 'मेरे घर से शुरुआत करो, ₹5 लाख महीना दूंगा'

सारांश

कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही वाघेला का 'मैला उठाओ, ₹50,000 दूंगा' बयान गुजरात की राजनीति में बवाल काट गया। ब्रह्म समाज नेता डॉ. दवे ने दस गुना ज़्यादा — ₹5 लाख — की पेशकश कर वाघेला को सीधी चुनौती दे दी।

मुख्य बातें

शंकर सिंह वाघेला ने नर्मदा जिले के सागवाड़ा में एक सम्मेलन में कहा कि यदि सवर्ण जातियाँ मैला उठाएं तो वे ₹50,000 प्रति माह वेतन देंगे।
गुजरात ब्रह्म समाज के नेता डॉ.
यज्ञेश दवे ने पलटवार में वाघेला को खुद से शुरुआत करने की चुनौती दी और ₹5 लाख प्रति माह देने का प्रस्ताव रखा।
सम्मेलन में अमित चावड़ा , जिग्नेश मेवाणी और अनंत पटेल सहित कई कांग्रेस नेता उपस्थित थे।
मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम, 2013 के तहत भारत में मैला ढोना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
यह विवाद वाघेला के कांग्रेस में शामिल होने से ठीक पहले उभरा, जिससे पार्टी के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले ही एक विवादास्पद बयान को लेकर सियासी घेराबंदी में आ गए हैं। नर्मदा जिले के सागवाड़ा में आयोजित एक आदिवासी-दलित सम्मेलन में वाघेला ने कहा था कि यदि सवर्ण जातियाँ — पटेल, बनिया और ब्राह्मण — आदिवासी समाज का मैला उठाएं, तो वे उन्हें ₹50,000 प्रति माह वेतन देने को तैयार हैं। इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए गुजरात ब्रह्म समाज के नेता डॉ. यज्ञेश दवे ने वाघेला को ही चुनौती दी — वे चाहते हैं कि 'बापू' इसकी शुरुआत खुद अपने हाथों से करें।

सम्मेलन में क्या हुआ

गुजरात प्रदेश कांग्रेस की ओर से आदिवासी बहुल नर्मदा जिले के सागवाड़ा में एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें आदिवासी और दलित समाज के नेता शामिल थे। इसमें गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा, कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी, कांग्रेस विधायक अनंत पटेल और अन्य आदिवासी व दलित नेता भी उपस्थित थे।

इसी मंच से वाघेला ने कहा कि जो लोग आरक्षण के विरोधी हैं, उन्हें व्यावहारिक रूप से यह समझना चाहिए कि समाज में श्रम की गरिमा क्या होती है। उन्होंने सवर्ण जातियों को संबोधित करते हुए मैला उठाने के एवज में ₹50,000 मासिक वेतन का प्रस्ताव रखा।

डॉ. यज्ञेश दवे का पलटवार

गुजरात ब्रह्म समाज के नेता डॉ. यज्ञेश दवे ने इस बयान को 'पुरानी और निरस्त हो चुकी व्यवस्था को फिर से उकसाने' की कोशिश बताया। उन्होंने कहा, 'शंकर सिंह वाघेला गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और कई पक्षों में वो अपना स्थान ले चुके हैं और अभी कांग्रेस से जुड़ने जा रहे हैं। उन्होंने बनिया, पटेल और ब्राह्मण तीनों को निशाना बनाकर कहा कि वे मैला उठाएं, ₹50 हजार रुपए हर महीने मैं दूंगा।'

डॉ. दवे ने आगे कहा कि ऐसे 'शुभ कार्य' की शुरुआत वाघेला को खुद से करनी चाहिए। उन्होंने सीधे प्रस्ताव दिया — 'मेरे घर का मैल उठाइए, मैं हर महीने आपको ₹5 लाख रुपए दूंगा।' यह राशि वाघेला के प्रस्तावित वेतन से दस गुना अधिक है।

कानूनी और सामाजिक संदर्भ

डॉ. दवे ने यह भी रेखांकित किया कि देश में मैला ढोने की प्रथा कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा, 'बापू को ये पता होना चाहिए कि ऐसी कोई पद्धति इस देश में ही नहीं है। पुराने समय में राजाओं के शासन में ऐसा होता था, लेकिन सरकार ने सत्ता में आने के बाद से पहला काम इस पद्धति को बंद करने का किया।'

गौरतलब है कि मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम, 2013 के तहत भारत में मैला ढोने की प्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस कानून का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। इस संदर्भ में वाघेला का बयान कानूनी दृष्टि से भी सवालों के घेरे में है।

राजनीतिक निहितार्थ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब वाघेला — जिन्हें गुजरात में 'बापू' कहा जाता है — कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी में थे। आलोचकों का कहना है कि इस बयान ने कांग्रेस के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है, खासकर तब जब पार्टी गुजरात में सवर्ण और OBC मतदाताओं तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

यह पहला मौका नहीं है जब वाघेला के किसी बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा की हो — उनकी बेबाक शैली अक्सर विवाद का केंद्र बनती रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करेगा या नहीं, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसने उल्टा असर किया — सवर्ण समाज को नाराज़ किया और साथ ही दलित-आदिवासी संवेदनाओं को भी चोट पहुँचाई, क्योंकि मैला ढोने की प्रथा एक ऐतिहासिक अपमान का प्रतीक है, उत्सव का नहीं। कांग्रेस के लिए यह दोहरी मुश्किल है — वाघेला अभी पार्टी में शामिल भी नहीं हुए और विवाद पहले ही दरवाज़े पर आ गया। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वो यह है कि वाघेला के बयान का कानूनी पहलू — मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम, 2013 — इस पूरी बहस को एक अलग धरातल पर ले जाता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शंकर सिंह वाघेला ने मैला उठाने पर क्या कहा था?
वाघेला ने नर्मदा जिले के सागवाड़ा में एक सम्मेलन में कहा था कि यदि आरक्षण-विरोधी सवर्ण जातियाँ — पटेल, बनिया और ब्राह्मण — आदिवासी समाज का मैला उठाएं, तो वे उन्हें ₹50,000 प्रति माह वेतन देंगे। यह टिप्पणी आरक्षण समर्थन के संदर्भ में की गई थी।
डॉ. यज्ञेश दवे ने वाघेला को क्या चुनौती दी?
गुजरात ब्रह्म समाज के नेता डॉ. यज्ञेश दवे ने वाघेला को सीधे कहा कि इस 'शुभ कार्य' की शुरुआत वे खुद अपने घर से करें। उन्होंने वाघेला को अपने घर का मैला उठाने पर ₹5 लाख प्रति माह देने का प्रस्ताव रखा — जो वाघेला के प्रस्तावित वेतन से दस गुना अधिक है।
भारत में मैला ढोने की प्रथा क्या कानूनी है?
नहीं। मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम, 2013 के तहत भारत में मैला ढोने की प्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। डॉ. दवे ने भी अपनी प्रतिक्रिया में यह रेखांकित किया कि यह पद्धति कानूनन देश में अस्तित्व में नहीं है।
सागवाड़ा सम्मेलन में और कौन-कौन से नेता शामिल थे?
इस सम्मेलन में गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा, कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी, कांग्रेस विधायक अनंत पटेल और अन्य आदिवासी व दलित नेता शामिल थे। यह सम्मेलन गुजरात प्रदेश कांग्रेस की ओर से आयोजित किया गया था।
इस विवाद से कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान क्यों हो सकता है?
वाघेला कांग्रेस में अभी शामिल भी नहीं हुए थे कि उनके बयान ने सवर्ण और ब्रह्म समाज को नाराज़ कर दिया। आलोचकों का कहना है कि इससे कांग्रेस की गुजरात में सवर्ण और OBC मतदाताओं तक पहुँचने की कोशिशों को झटका लग सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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