वंदे मातरम विवाद: भाजपा सांसद मनन मिश्रा का मौलाना मदनी पर तीखा हमला, पीएम मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च सम्मान को बताया राष्ट्रीय गौरव
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनन कुमार मिश्रा ने 18 मई को जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरसद मदनी की वंदे मातरम पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की। मिश्रा ने कहा कि मदनी जैसे लोगों की 'दुकान' नफरत और सामाजिक विभाजन पर टिकी है, जो अब धीरे-धीरे बंद होने वाली है।
मौलाना मदनी की टिप्पणी और भाजपा की प्रतिक्रिया
मौलाना अरसद मदनी ने वंदे मातरम को लेकर कहा था कि देश में अब नफरत नहीं, बल्कि डर की राजनीति शुरू हो गई है। इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि ऐसे लोग समाज को बाँटने का काम करते हैं और देश की जनता अब इनकी असलियत पहचान चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल जैसा राज्य भी इन तत्वों के प्रभाव से बाहर आ चुका है और देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा BJP के महत्व को समझा है।
पीएम मोदी को स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान — राष्ट्रीय गौरव का क्षण
भाजपा सांसद मिश्रा ने स्वीडन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए सर्वोच्च सम्मान को पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि मोदी इस समय विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार हैं और यह सम्मान इसकी पुष्टि करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ईरान के नेतृत्व ने कथित तौर पर कहा है कि मोदी के नेतृत्व में भारत खाड़ी देशों के संघर्षों का समाधान निकालने में सक्षम है।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को अब तक लगभग 31 अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जो उन्हें विश्व के सर्वाधिक सम्मानित नेताओं में से एक बनाता है।
भोजशाला फैसले पर भाजपा का स्वागत
भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने मध्य प्रदेश के भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों से यह सिद्ध हुआ कि भोजशाला एक मंदिर और हिंदुओं का पूजा स्थल है। उन्होंने यह भी कहा कि समझदार मुसलमान भी अब यह मान रहे हैं कि मस्जिद के लिए अलग स्थान दिया जाए।
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी भोजशाला फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिर परिसर में धार्मिक पद्धतियों के अनुसार पूजा-अर्चना निर्बाध रूप से होती रहनी चाहिए, क्योंकि धार्मिक स्थलों की अपनी मान्यता और गरिमा होती है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर विवाद नया नहीं है, लेकिन इस बार भाजपा ने इसे चुनावी राजनीति से जोड़ते हुए आक्रामक रुख अपनाया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक मंचों पर और गहरी बहस को जन्म दे सकता है।