वंदे मातरम विवाद: खड़गे, सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत, FIR की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ 17 अगस्त 2026 को मुंबई के दिंडोशी पुलिस स्टेशन, मलाड ईस्ट में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत 15 अगस्त को AICC मुख्यालय, इंदिरा भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम के गायन में कथित तौर पर बाधा डालने के आरोपों पर आधारित है।
शिकायत की पृष्ठभूमि
मुंबई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सचिव एवं अधिवक्ता अखिलेश चौबे ने दिंडोशी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को पत्र लिखकर यह शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समारोह के दौरान सोनिया गांधी ने ऐसे इशारे किए जिनसे वंदे मातरम के गायन पर आपत्ति का संकेत मिलता था। कथित तौर पर विवाद तब बढ़ा जब गायकों ने राष्ट्रीय गीत के उन छंदों का गायन आरंभ किया जिनमें हिंदू धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख है।
राहुल गांधी का कथित बयान
शिकायत में एक कथित वीडियो फुटेज का हवाला दिया गया है जिसमें राहुल गांधी को कथित तौर पर यह कहते सुना गया है कि 'हम वंदे मातरम नहीं गा रहे हैं।' शिकायतकर्ताओं ने माँग की है कि दोनों नेताओं के कथित हावभाव, उनकी मंशा और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक प्रकृति की जाँच किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा निष्पक्ष, तटस्थ और समयबद्ध तरीके से की जाए।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि वंदे मातरम के बाद के छंदों में हिंदू धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख है, जिससे अन्य धर्मों के अनुयायियों की भावनाएँ आहत हो सकती हैं। गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर यह बहस नई नहीं है — स्वतंत्रता संग्राम के दौर से ही इसके कुछ छंदों पर धार्मिक आधार पर आपत्तियाँ उठती रही हैं।
कानूनी आधार और संदर्भ
शिकायत में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 का हवाला दिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रीय गीत को भी दंडात्मक संरक्षण देने का प्रयास किया गया है — जिसमें जानबूझकर गायन रोकने या सभा में अशांति फैलाने पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। शिकायतकर्ताओं ने 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी संदर्भ दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा और बेंगलुरु में भी इसी मामले से जुड़ी अलग शिकायतें दर्ज की गई हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस से माँग की गई है कि वह वंदे मातरम अधिनियम की प्रयोज्यता और कानूनी स्थिति का परीक्षण करे तथा जाँच के बाद FIR दर्ज करे। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर आगे चलने की संभावना है, क्योंकि विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर तनाव पहले से ही चरम पर है।