वसंत कुंज में खुले नाले में गिरी कार, 20 वर्षीय यशवेंद्र की मौत; DDA की लापरवाही पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में 25 जुलाई की सुबह एक दर्दनाक हादसे में 20 वर्षीय यशवेंद्र की जान चली गई, जब उनकी कार नांगल देवत रेड लाइट के निकट एक तीखे मोड़ पर फिसलकर खुले नाले में जा गिरी। यशवेंद्र एक महिला मित्र के साथ घर लौट रहे थे, जब सड़क की फिसलन के कारण वे कार पर नियंत्रण नहीं रख सके और वाहन नाले में पलट गया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
यशवेंद्र और उनकी महिला मित्र — जो वसंत कुंज की निवासी हैं — पिछली रात एक साझा मित्र के घर नांगल देवत में रुके थे। शुक्रवार सुबह जब वे वापस लौट रहे थे, तब नांगल देवत रेड लाइट के पास एक तीखे मोड़ पर सड़क की फिसलन के कारण यशवेंद्र का कार से नियंत्रण छूट गया। कार सीधे खुले नाले में जा गिरी और पलट गई। कार महिला मित्र की थी, परंतु उस समय उसे यशवेंद्र चला रहे थे।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
वसंत कुंज साउथ पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची। अधिकारियों के अनुसार, यशवेंद्र को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। महिला मित्र बगल वाली सीट पर बैठी थीं। पुलिस ने बताया कि दोनों की दोस्ती अमेरिका के एक ही शैक्षणिक संस्थान में उच्च शिक्षा के दौरान हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, यशवेंद्र भारतीय सेना के एक अधिकारी के पुत्र थे। महिला के पिता ओखला स्थित एक निजी कंपनी के साइबर सिक्योरिटी विभाग में कार्यरत हैं।
चश्मदीदों का बयान और DDA पर आरोप
स्थानीय निवासियों और चश्मदीदों ने बताया कि यह खुला नाला लंबे समय से दुर्घटनाओं की दृष्टि से खतरनाक बना हुआ है। एक चश्मदीद ने कहा, 'यहाँ अक्सर हादसे होते रहते हैं। कल, 20 से 25 साल के कुछ युवा इस रास्ते से गुजर रहे थे, तभी उनकी गाड़ी एक खुले नाले में गिर गई। दुर्भाग्य से उनमें से एक युवक की मौत हो गई। यह खुला नाला लंबे समय से दुर्घटनाओं वाली जगह रहा है और इसकी जिम्मेदारी डीडीए की है।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमने कई बार दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के सामने यह मुद्दा उठाया है और कई बैठकें भी की हैं, जिनमें नाले को ढकने का आग्रह किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और आज इसके कारण एक जान चली गई।'
आम जनता और नागरिक सुरक्षा पर असर
यह हादसा दिल्ली में खुले नालों और अनुरक्षण की कमी से उत्पन्न खतरों को एक बार फिर उजागर करता है। गौरतलब है कि राजधानी में मानसून के दौरान सड़कें अक्सर फिसलन भरी हो जाती हैं, और ऐसे में खुले नाले जानलेवा साबित हो सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि नागरिक निकायों की लापरवाही और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई न होना इस तरह की त्रासदियों को न्योता देता है।
आगे क्या होगा
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। स्थानीय निवासियों की माँग है कि DDA इस खुले नाले को तत्काल ढके और इलाके की अन्य खतरनाक जगहों की भी पहचान कर सुरक्षात्मक कदम उठाए। यह देखना होगा कि प्रशासन इस बार शिकायतों पर कार्रवाई करता है या नहीं।