वीबी-जी राम जी ढांचे में 375 कार्य श्रेणियाँ अधिसूचित, ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई ताकत
सारांश
मुख्य बातें
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे वीबी-जी राम जी ढांचा कहा जाता है, के अंतर्गत कार्य की 375 श्रेणियों को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है। यह कदम ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसरों को व्यापक बनाने और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल है। मंत्रालय के अनुसार, नई सूची पूर्व के ढाँचे में शामिल 266 कार्यों की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक कार्य प्रकारों को समाहित करती है।
योजना में क्या शामिल है
अधिसूचित 375 कार्य श्रेणियों को मुख्यतः चार वर्गों में विभाजित किया गया है। सबसे बड़ा वर्ग जल सुरक्षा का है, जिसमें 128 कार्य शामिल हैं। इसके बाद मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के तहत 111 कार्य, आजीविका से जुड़े बुनियादी ढाँचे के 98 कार्य और खराब मौसम व आपदा तैयारी पर केंद्रित 38 विशेष कार्य आते हैं।
गौरतलब है कि यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियाँ — बाढ़, सूखा और अनियमित वर्षा — तेजी से बढ़ रही हैं। नए ढाँचे में आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता देना इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
जल सुरक्षा पर विशेष ध्यान
जल सुरक्षा श्रेणी के अंतर्गत नहरों, बाढ़ नियंत्रण चैनलों, चेक डैम, गली प्लग और भूमिगत बाँधों का निर्माण, मरम्मत एवं रखरखाव शामिल है। तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट और इंजेक्शन कुओं का निर्माण भी इस वर्ग में आता है।
उल्लेखनीय रूप से, इस सूची में 'आइस स्तूप' अर्थात कृत्रिम ग्लेशियरों को भी शामिल किया गया है, जो पर्वतीय व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने और खेती को सहारा देने का काम करते हैं। ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियाँ और जल-जमाव वाली भूमि के सुधार के कार्य भी अधिसूचित हैं।
ग्रामीण बुनियादी ढाँचा और आजीविका
मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के तहत ग्रामीण सड़कें, पुलिया, फुटपाथ और कनेक्टिविटी सुविधाओं का निर्माण एवं रखरखाव सम्मिलित है। ग्राम पंचायत भवनों, आँगनवाड़ी केंद्रों, ग्रामीण पुस्तकालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और पशु चिकित्सा केंद्रों का निर्माण व उन्नयन भी इसका हिस्सा है।
शिक्षा अवसंरचना को भी इस ढाँचे में स्थान मिला है — अतिरिक्त कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ, शौचालय, किचन शेड, कंपाउंड वॉल और खेल के मैदान इसमें शामिल हैं। वेस्ट मैनेजमेंट और नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना — रीसाइक्लिंग प्लांट, कचरा पृथक्करण शेड, कम्पोस्ट पिट, ग्रे-वॉटर ट्रीटमेंट यूनिट, सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और बायोगैस प्लांट — को भी मंजूरी मिली है।
इस सूची में मिट्टी और नमी के संरक्षण हेतु बाँस, मैंग्रोव, नारियल, रबर और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसे वृक्षारोपण एवं वनीकरण कार्य भी शामिल हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में आपातकालीन निकासी और राहत शिविर स्थापित करने के कार्यों को भी अधिसूचित सूची में स्थान दिया गया है।
आम जनता पर असर
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिए यह ढाँचा सीधे रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगा, साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों — सड़क, तालाब, स्वास्थ्य केंद्र — की गुणवत्ता में सुधार लाएगा। ग्रामीण पार्क, बस स्टैंड, पार्किंग शेड, पेयजल कियोस्क, सीड बैंक और बहुउद्देश्यीय युवा केंद्रों का प्रावधान युवाओं और महिलाओं दोनों के लिए अवसर खोलता है।
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण मजदूरी दर और रोजगार के आँकड़े दबाव में हैं। विस्तारित कार्य-सूची यदि प्रभावी रूप से लागू हो, तो ग्रामीण माँग को बल दे सकती है।
क्या होगा आगे
अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य सरकारें और ग्राम पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर इन कार्यों की योजना बनाएंगी। कार्यान्वयन की गति और पारदर्शिता इस योजना की सफलता की कुंजी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगरानी तंत्र मजबूत हो, तो यह ढाँचा ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक परिसंपत्ति निर्माण का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।