3 अगस्त 2026
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वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने संभाला 'डीजी नेवल ऑपरेशंस' का कार्यभार, हिंद महासागर सुरक्षा होगी प्राथमिकता

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वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने संभाला 'डीजी नेवल ऑपरेशंस' का कार्यभार, हिंद महासागर सुरक्षा होगी प्राथमिकता

सारांश

वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने 3 अगस्त को डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस का कार्यभार संभाला — यह नियुक्ति तब हुई जब भारतीय नौसेना हिंद महासागर में अपनी भूमिका का विस्तार कर रही है। AVSM और VSM से सम्मानित चड्ढा संचार व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ हैं और उनके पास 35 वर्षों का विशिष्ट ऑपरेशनल अनुभव है।

मुख्य बातें

वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने 3 अगस्त 2026 को डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस (DGNO) का कार्यभार ग्रहण किया।
वह संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ हैं और उनके पास 35 वर्षों से अधिक का सैन्य अनुभव है।
भारत सरकार ने उन्हें 2017 में VSM और 2025 में AVSM से सम्मानित किया है।
उन्हें 1 जुलाई 1991 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला; वह NDA खड़कवासला के 78वें पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र हैं।
उनकी प्रमुख कमानों में आईएनएस वीर , आईएनएस किरपान और आईएनएस मैसूर शामिल हैं।
मॉस्को में नौसैनिक अताशे के रूप में भारत-रूस रक्षा सहयोग को मजबूती दी।

भारतीय नौसेना में वरिष्ठ स्तर पर एक महत्वपूर्ण नियुक्ति के तहत वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा ने 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस (DGNO) का कार्यभार ग्रहण किया। संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ वाइस एडमिरल चड्ढा अब भारतीय नौसेना के समुद्री संचालन, सामरिक अभियानों, समुद्री सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों से जुड़े सर्वोच्च दायित्वों का नेतृत्व करेंगे।

नियुक्ति की पृष्ठभूमि और समय का महत्व

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी परिचालन उपस्थिति को लगातार सुदृढ़ कर रही है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभियानों और उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने की दिशा में नौसेना की भूमिका का विस्तार हो रहा है। ऐसे में वाइस एडमिरल चड्ढा का 35 वर्षों से अधिक का ऑपरेशनल अनुभव और रणनीतिक नेतृत्व नौसेना की युद्धक तैयारियों को नई धार देगा।

शैक्षणिक और सैन्य प्रशिक्षण

वाइस एडमिरल चड्ढा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के 78वें पाठ्यक्रम के पूर्व छात्र हैं और उन्हें 1 जुलाई 1991 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्रदान किया गया था। उन्होंने रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन के 61वें पाठ्यक्रम से उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अमेरिका के वॉशिंगटन स्थित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से उच्च कमान पाठ्यक्रम भी पूरा किया है — जो उनके वैश्विक सामरिक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

प्रमुख कमान और ऑपरेशनल अनुभव

अपने करियर में वाइस एडमिरल चड्ढा ने समुद्र और तट दोनों पर अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। समुद्र में उनकी प्रमुख कमानों में भारतीय तटरक्षक बल की इंटरसेप्टर नौका सीजीएस-05 तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस वीर, आईएनएस किरपान और आईएनएस मैसूर शामिल हैं। इन नियुक्तियों के दौरान उन्होंने विभिन्न समुद्री अभियानों, निगरानी कार्यों और राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में नौसैनिक अताशे के रूप में उनकी सेवाओं ने भारत-रूस नौसैनिक सहयोग और रक्षा संबंधों को मजबूती दी। नौसेना मुख्यालय में उन्होंने अत्यंत निम्न आवृत्ति संचार प्रणाली (VLF) तथा उपग्रह संचार परियोजनाओं का नेतृत्व किया। वह अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा-2016 के निदेशक भी रहे।

पुरस्कार और सम्मान

भारत सरकार ने उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) और वर्ष 2025 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से सम्मानित किया है। वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें भारतीय नौसेना अकादमी का कमांडेंट नियुक्त किया गया था, जहाँ उन्होंने भावी नौसैनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास पर विशेष ध्यान दिया।

आगे की राह

डीजीएनओ के रूप में वाइस एडमिरल चड्ढा की प्राथमिकताओं में हिंद महासागर में बढ़ती चीनी नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत की समुद्री निगरानी क्षमता को सुदृढ़ करना और संयुक्त सैन्य अभियानों की तैयारियों को परिष्कृत करना शामिल होगा। उनका तकनीकी विशेषज्ञता-आधारित नेतृत्व नौसेना की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संचार प्रणालियों को अगले स्तर पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वॉशिंगटन से प्रशिक्षित एक अधिकारी का इस पद पर आना भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या उनके नेतृत्व में नौसेना IOR में अपनी बहु-आयामी परिचालन क्षमता को वास्तविक निवारण शक्ति में बदल पाती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा कौन हैं और उन्हें DGNO क्यों नियुक्त किया गया?
वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और संचार व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ हैं, जिन्हें 3 अगस्त 2026 को डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस नियुक्त किया गया। उनके 35 वर्षों के ऑपरेशनल अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता को इस महत्वपूर्ण पद के लिए उपयुक्त माना गया।
डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस की भूमिका क्या होती है?
DGNO भारतीय नौसेना के समुद्री संचालन, सामरिक अभियानों, समुद्री सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों से जुड़े सर्वोच्च मामलों का नेतृत्व करता है। यह पद हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की परिचालन रणनीति तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
वाइस एडमिरल चड्ढा को कौन-से सम्मान मिले हैं?
भारत सरकार ने वाइस एडमिरल मनीष चड्ढा को वर्ष 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) और वर्ष 2025 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से सम्मानित किया है। ये पुरस्कार उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सैन्य सेवाओं की पहचान हैं।
वाइस एडमिरल चड्ढा ने किन युद्धपोतों की कमान संभाली है?
उनकी प्रमुख समुद्री कमानों में भारतीय तटरक्षक बल की इंटरसेप्टर नौका सीजीएस-05 तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस वीर, आईएनएस किरपान और आईएनएस मैसूर शामिल हैं। इन नियुक्तियों में उन्होंने समुद्री अभियानों और राष्ट्रीय सुरक्षा दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
यह नियुक्ति भारतीय नौसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन क्षमता और समुद्री सुरक्षा भूमिका का विस्तार कर रही है। वाइस एडमिरल चड्ढा की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रशिक्षण पृष्ठभूमि नौसेना की तकनीक-केंद्रित सामरिक क्षमता को मजबूत करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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