16 जुलाई 2026
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वाइस एडमिरल अजय कोचर बने नौसेना के 48वें वाइस चीफ, ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी समुद्री मोर्चे पर निर्णायक भूमिका

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वाइस एडमिरल अजय कोचर बने नौसेना के 48वें वाइस चीफ, ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी समुद्री मोर्चे पर निर्णायक भूमिका

सारांश

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ का कार्यभार संभाला — ऑपरेशन सिंदूर में समुद्री मोर्चे पर निर्णायक भूमिका निभाने वाले इस अधिकारी का 37 वर्षों का करियर आईएनएस विक्रमादित्य से अंडमान-निकोबार कमान तक फैला है।

मुख्य बातें

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (वीसीएनएस) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान समुद्री मोर्चे पर उनकी भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया।
01 जुलाई 1988 को नौसेना में कमीशन; 37 वर्षों से अधिक का नौसैनिक अनुभव; राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र।
आईएनएस विक्रमादित्य , आईएनएस त्रिकंड सहित कई युद्धपोतों की कमान; पश्चिमी बेड़े और अंडमान-निकोबार कमान का नेतृत्व।
वर्ष 2022 में 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' और वर्ष 2026 में 'परम विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच उनकी नियुक्ति को नौसेना की युद्धक क्षमता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

वाइस एडमिरल अजय कोचर ने 30 मई 2025 को भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (वीसीएनएस) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उच्च-स्तरीय समुद्री अभियानों में उनकी भूमिका को विशेष रूप से अहम माना गया। 37 वर्षों से अधिक के नौसैनिक अनुभव के साथ, उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक चुनौतियाँ लगातार गहरी होती जा रही हैं।

पद ग्रहण से पहले शहीदों को श्रद्धांजलि

नई जिम्मेदारी संभालने से पूर्व वाइस एडमिरल कोचर ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। यह परंपरा वरिष्ठ सैन्य नियुक्तियों के अवसर पर निभाई जाती है और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जाती है।

शानदार करियर और प्रमुख कमानें

वाइस एडमिरल कोचर 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन हुए और पुणे स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं। नौसेना के अनुसार, वह गनरी एवं मिसाइल सिस्टम के विशेषज्ञ अधिकारी हैं।

उन्होंने आईएनएस नाशक, आईएनएस विभूति और आईएनएस किरपाण की कमान संभाली। वह नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड के पहले कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर भी रहे। सबसे उल्लेखनीय रहा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान, जिसके दौरान उनके नेतृत्व में एयर विंग का सफल एकीकरण और परिचालन क्षमता का विस्तार हुआ — इसे भारतीय नौसेना की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

रणनीतिक शिक्षा और नीति-निर्माण में योगदान

उन्होंने वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, गोवा स्थित नेवल वॉर कॉलेज और यूनाइटेड किंगडम के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से उच्च सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। नौसेना मुख्यालय में उन्होंने जॉइंट डायरेक्टर नेवल प्लान्स, डायरेक्टर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स तथा प्रिंसिपल डायरेक्टर डीएससीटी जैसे नीति-निर्माण पदों पर कार्य किया।

वर्ष 2018 में फ्लैग रैंक पर पदोन्नति के बाद उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर परियोजनाओं तथा युद्धपोत निर्माण एवं अधिग्रहण की जिम्मेदारियाँ संभालीं। वर्ष 2021 में उन्हें भारतीय नौसेना की सबसे शक्तिशाली परिचालन इकाइयों में से एक — पश्चिमी बेड़े की कमान सौंपी गई।

अंडमान-निकोबार से वीसीएनएस तक का सफर

25 मई 2024 को उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभाला, जब पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियाँ काफी जटिल थीं। वाइस चीफ बनने से पूर्व वह अंडमान एवं निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ थे, जहाँ उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन और एकीकृत सैन्य क्षमता को मजबूत किया। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के कमांडेंट के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहाँ उनके कार्यकाल में कैडेट प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने के प्रयास किए गए।

सम्मान और आगे की राह

उनकी असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2022 में 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' और वर्ष 2026 में 'परम विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया — ये दोनों भारतीय सशस्त्र बलों के अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान हैं। गौरतलब है कि उनकी पत्नी कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं, पुत्री सबाह स्वतंत्र पत्रकार हैं और पुत्र करण वित्तीय परामर्श क्षेत्र में कार्यरत हैं।

वाइस एडमिरल कोचर के व्यापक परिचालन अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण से भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता एवं समुद्री सुरक्षा ढाँचे को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूर्व-सक्रिय रणनीति अपना रहा है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाइस एडमिरल अजय कोचर कौन हैं और उन्हें क्यों नियुक्त किया गया?
वाइस एडमिरल अजय कोचर भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने 30 मई 2025 को 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ का कार्यभार संभाला। 37 वर्षों से अधिक के अनुभव, ऑपरेशन सिंदूर में समुद्री भूमिका और आईएनएस विक्रमादित्य जैसे प्रमुख युद्धपोतों की कमान उनकी नियुक्ति की प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में वाइस एडमिरल कोचर की क्या भूमिका थी?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वाइस एडमिरल कोचर ने उच्च-स्तरीय समुद्री अभियानों में अहम भूमिका निभाई, जिसे नौसेना ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया है। हालाँकि अभियान के विस्तृत परिचालन विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ का पद कितना महत्वपूर्ण है?
वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (वीसीएनएस) भारतीय नौसेना में नौसेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद है। यह अधिकारी नौसेना के परिचालन, प्रशासनिक और रणनीतिक नीति-निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
वाइस एडमिरल कोचर ने किन प्रमुख युद्धपोतों और कमानों का नेतृत्व किया है?
उन्होंने आईएनएस नाशक, आईएनएस विभूति, आईएनएस किरपाण और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली। इसके अलावा वह पश्चिमी बेड़े, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (कमांडेंट) और अंडमान एवं निकोबार कमान (कमांडर-इन-चीफ) का नेतृत्व कर चुके हैं।
वाइस एडमिरल कोचर को कौन-से सैन्य सम्मान मिले हैं?
उन्हें वर्ष 2022 में 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' और वर्ष 2026 में 'परम विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया है। ये दोनों सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों में अत्यंत प्रतिष्ठित माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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