16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बने भारत के 27वें नौसेना प्रमुख, आत्मनिर्भरता और युद्धक तत्परता होगी प्राथमिकता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बने भारत के 27वें नौसेना प्रमुख, आत्मनिर्भरता और युद्धक तत्परता होगी प्राथमिकता

सारांश

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 31 मई को भारत के 27वें नौसेना प्रमुख की कमान संभाली। संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ, स्वामीनाथन ने परिचालन तत्परता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकों को अपने कार्यकाल की केंद्रीय प्राथमिकताएँ बताईं।

मुख्य बातें

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 31 मई 2026 को भारत के 27वें नौसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।
साउथ ब्लॉक परिसर में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के साथ नियुक्ति संपन्न हुई।
निवर्तमान प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी 31 मई को सेवानिवृत्त हुए; राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
एडमिरल स्वामीनाथन को 01 जुलाई 1987 को नौसेना में कमीशन मिला था; वे संचार व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ हैं।
उन्होंने आईएनएस विक्रमादित्य सहित पाँच प्रमुख नौसैनिक पोतों की कमान संभाली है।
आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, युद्धक तत्परता और नौसेना कर्मियों का कल्याण उनकी घोषित प्राथमिकताएँ हैं।

भारतीय नौसेना के 27वें नौसेना प्रमुख के रूप में एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 31 मई 2026 को औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक परिसर में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया, जो इस ऐतिहासिक नियुक्ति की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक रही। उनके पूर्ववर्ती एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी उसी दिन सेवानिवृत्त हुए और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुँचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

नए नौसेना प्रमुख का परिचय और करियर

एडमिरल स्वामीनाथन को 01 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला; यूनाइटेड किंगडम स्थित जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रिवेनहम; कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर, करंजा; और अमेरिका के न्यूपोर्ट नेवल वॉर कॉलेज, रोड आइलैंड से शिक्षा प्राप्त की है।

अपने करियर में उन्होंने मिसाइल पोत आईएनएस विद्युत और आईएनएस विनाश, मिसाइल कॉर्वेट आईएनएस कुलिश, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मैसूर तथा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

प्राथमिकताएँ: परिचालन तत्परता और आत्मनिर्भरता

कार्यभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन में एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि वे विनम्रता, गर्व, जिम्मेदारी और कृतज्ञता की भावना के साथ यह दायित्व ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य 'लगातार चुनौतीपूर्ण, जटिल और अनिश्चित' बना हुआ है, और ऐसे में भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता तथा युद्धक क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

उन्होंने संयुक्त सैन्य संचालन, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को नौसेना की प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाया। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्वदेशी तकनीकों, उपकरणों और प्लेटफॉर्मों के विकास तथा उपयोग को और अधिक प्रोत्साहन देने की बात उन्होंने कही।

आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन पर जोर

एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना पहले से ही क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण के एक मजबूत मार्ग पर अग्रसर है। उनका प्रयास होगा कि चल रही सभी परियोजनाओं को गति मिले, आवश्यकतानुसार उनका विस्तार हो, तथा उभरती और अत्याधुनिक तकनीकों को शीघ्र शामिल कर नौसेना की परिचालन क्षमताओं को और मजबूत बनाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी समुद्री उपस्थिति को लगातार सुदृढ़ कर रहा है।

नौसेना कर्मियों के कल्याण पर प्रतिबद्धता

नए प्रमुख ने नौसेना के अधिकारियों, नाविकों और महिला कर्मियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना के जवान दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पेशेवरों में शामिल हैं। उनके कल्याण, पेशेवर विकास, व्यक्तिगत उन्नति और बेहतर कार्य वातावरण को सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में रहेगा।

निवर्तमान प्रमुख को श्रद्धांजलि

एडमिरल स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 'अत्यंत सफल और दूरदर्शी नेतृत्व' प्रदान किया और अपने कार्यकाल में नौसेना को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सदैव आभारी रहेगी। गौरतलब है कि एडमिरल त्रिपाठी के कार्यकाल में नौसेना ने कई महत्वपूर्ण स्वदेशी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया था, और अब एडमिरल स्वामीनाथन उसी विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन कौन हैं और उन्हें नौसेना प्रमुख कब नियुक्त किया गया?
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन भारतीय नौसेना के 27वें नौसेना प्रमुख हैं, जिन्होंने 31 मई 2026 को कार्यभार ग्रहण किया। वे 01 जुलाई 1987 से नौसेना में सेवारत हैं और संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ हैं।
एडमिरल स्वामीनाथन की प्रमुख प्राथमिकताएँ क्या हैं?
उन्होंने परिचालन तत्परता, युद्धक क्षमता, संयुक्त सैन्य संचालन, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को अपनी प्रमुख प्राथमिकताएँ बताई हैं। साथ ही नौसेना कर्मियों के कल्याण और पेशेवर विकास को भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी में शामिल किया है।
एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का क्या हुआ?
एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी 31 मई 2026 को भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्ति के दिन उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुँचकर देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
एडमिरल स्वामीनाथन ने किन प्रमुख नौसैनिक पोतों की कमान संभाली है?
उन्होंने आईएनएस विद्युत, आईएनएस विनाश (मिसाइल पोत), आईएनएस कुलिश (मिसाइल कॉर्वेट), आईएनएस मैसूर (निर्देशित मिसाइल विध्वंसक) और आईएनएस विक्रमादित्य (विमानवाहक पोत) की कमान संभाली है।
भारतीय नौसेना में आत्मनिर्भरता का क्या अर्थ है और इसे कैसे बढ़ावा दिया जाएगा?
आत्मनिर्भरता का अर्थ है रक्षा उपकरणों, तकनीकों और प्लेटफॉर्मों के लिए विदेशी निर्भरता घटाकर स्वदेशी विकल्प अपनाना। एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा है कि चल रही परियोजनाओं को गति देने के साथ-साथ उभरती तकनीकों को शीघ्र शामिल किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले