उपराष्ट्रपति ने निसर्गोपचार आश्रम के 81वें स्थापना दिवस पर स्वस्थ भारत की दिशा में योग और नेचुरोपैथी की भूमिका का उल्लेख किया
सारांश
Key Takeaways
- योग और नेचुरोपैथी का महत्व
- स्वस्थ भारत के लिए प्राकृतिक जीवनशैली का योगदान
- महात्मा गांधी की दृष्टि और प्रेरणा
- आधुनिक चिकित्सा के पूरक के रूप में प्राकृतिक चिकित्सा
- संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का महत्व
पुणे, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को पुणे के उरुली कंचन में स्थित निसर्गोपचार आश्रम के 81वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने नेचुरोपैथी, योग और प्राकृतिक जीवनशैली के जरिए एक स्वस्थ भारत के निर्माण में इनके योगदान पर विशेष जोर दिया।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि महात्मा गांधी ने इस आश्रम की परिकल्पना की थी, जबकि एक किसान ने अपनी ज़मीन दान देकर इस कार्य को साकार किया। यह दोनों ही हमारे राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता के पात्र हैं। उन्होंने आश्रम को केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक आंदोलन, दर्शन और जीने का एक तरीका बताया, जो गांधीजी के प्रकृति के साथ सामंजस्य, सादगी और अनुशासन वाले दृष्टिकोण से प्रेरित है। गांधीजी ने प्रकृति को सबसे बड़ा चिकित्सक माना और कहा कि सच्चा स्वास्थ्य सादगी, अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य में है।
आज के समय में लाइफस्टाइल डिजीज से बढ़ते बोझ को देखते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि निसर्गोपचार आश्रम का संदेश अब पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। स्वास्थ्य केवल रोगों का अभाव नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर पूर्ण कल्याण है। उन्होंने लोगों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मानसिक शांति और प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
अपने झारखंड और महाराष्ट्र के राज्यपाल काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने आदिवासी समुदायों में प्रचलित स्वदेशी और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों की समृद्ध परंपरा का जिक्र किया। ये प्राचीन विधियां भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय ने पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाई है। योग और नेचुरोपैथी आधुनिक चिकित्सा के विकल्प नहीं हैं, बल्कि इसके सशक्त पूरक हैं। भारत की ये प्रणालियां विश्व के लिए अमूल्य उपहार हैं, जो चिकित्सा एवं वेलनेस पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तेज रफ्तार वाली आधुनिक दुनिया में लोग भौतिक सफलता में खुशी की तलाश करते हैं, लेकिन असली संतोष शांति, संतुलन और सामंजस्य में है। एक स्वस्थ व्यक्ति से मजबूत परिवार, मजबूत परिवार से समृद्ध समाज और समृद्ध समाज से शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण होता है। विकसित भारत के विजन के साथ 'स्वस्थ भारत' का लक्ष्य भी महत्वपूर्ण है, जिसमें निसर्गोपचार आश्रम जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
समारोह में उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी और आश्रम के संस्थापक मणिभाई देसाई को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके साथ ही डॉ. नारायण हेगड़े द्वारा लिखित पुस्तक 'सीक्रेट्स ऑफ अवर हैप्पीनेस' का विमोचन किया।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।