विक्ट्री डे 2025: नई दिल्ली में रूसी दूतावास ने इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली निकाली, द्वितीय विश्व युद्ध की 81वीं जयंती पर श्रद्धांजलि
सारांश
नई दिल्ली में रूसी दूतावास की इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली सिर्फ एक स्मृति कार्यक्रम नहीं — यह रूस का वैश्विक कूटनीतिक संदेश है। 2 करोड़ 60 लाख सोवियत शहीदों की याद में आयोजित यह रैली ऐसे समय में हुई जब विक्ट्री डे पर घोषित सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद उल्लंघन के आरोप लगे।
मुख्य बातें
रूसी दूतावास ने 8 मई 2025 को नई दिल्ली में इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली का आयोजन किया।
यह रैली द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ की जीत की 81वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में थी।
सोवियत संघ ने इस युद्ध में करीब 2 करोड़ 60 लाख लोगों की जान और देश की एक-तिहाई राष्ट्रीय संपत्ति गँवाई।
रूस के लगभग 70,000 गाँव और 1,700 शहर युद्ध में तबाह हुए।
विक्ट्री डे पर रूस द्वारा घोषित सीजफायर के उल्लंघन का आरोप राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने लगाया।
नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने 8 मई 2025 को इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली का आयोजन किया, जो 9 मई को मनाए जाने वाले विक्ट्री डे की पूर्व संध्या पर द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ की जीत की 81वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में हुई। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित किया गया जब रूस ने यूक्रेन के साथ विक्ट्री डे के अवसर पर सीजफायर की घोषणा की थी, हालाँकि कुछ ही समय बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कथित तौर पर सीजफायर उल्लंघन की जानकारी दी।
इम्मोर्टल रेजिमेंट: परंपरा और उद्देश्य
रूसी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
वहीं दूसरी ओर यह रूस की उस वैश्विक कथा का हिस्सा है जिसे वह यूक्रेन संघर्ष के बीच भी बनाए रखना चाहता है — कि वह फासीवाद के विरुद्ध लड़ने वाला देश है। यह ध्यान देने योग्य है कि विक्ट्री डे पर घोषित सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद उल्लंघन के आरोप लगे, जो इस आयोजन के कूटनीतिक आयाम को और जटिल बनाते हैं। भारत की तटस्थ विदेश नीति के बीच रूसी दूतावास का यह कार्यक्रम नई दिल्ली की कूटनीतिक स्थिति पर भी विचार करने को प्रेरित करता है।
RashtraPress
13 मई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विक्ट्री डे क्या है और रूस इसे क्यों मनाता है?
विक्ट्री डे 9 मई को रूस में द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। इस युद्ध को रूस में महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध कहा जाता है, जो 1941 से 1945 तक चला और जिसमें करीब 2 करोड़ 60 लाख सोवियत नागरिक मारे गए।
इम्मोर्टल रेजिमेंट रैली क्या होती है?
इम्मोर्टल रेजिमेंट एक वार्षिक जुलूस परंपरा है जिसमें लोग द्वितीय विश्व युद्ध में लड़े अपने पूर्वजों की तस्वीरें लेकर मार्च करते हैं। यह परंपरा रूस में शुरू हुई और अब विश्वभर में रूसी दूतावासों द्वारा आयोजित की जाती है।
नई दिल्ली में रूसी दूतावास के इस कार्यक्रम में कौन शामिल हुए?
कार्यक्रम में रूसी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन और सिविल सोसायटी के सदस्य दलजीत सिंह सहित अन्य लोग शामिल हुए। यह द्वितीय विश्व युद्ध की 81वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
विक्ट्री डे पर रूस-यूक्रेन सीजफायर की क्या स्थिति रही?
रूस ने विक्ट्री डे के अवसर पर यूक्रेन के साथ सीजफायर की घोषणा की, लेकिन कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कथित तौर पर सीजफायर उल्लंघन की जानकारी दी। इससे युद्धविराम की स्थायित्व पर सवाल उठे।
सोवियत संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध में कितनी बड़ी कीमत चुकाई?
सोवियत संघ ने इस युद्ध में करीब 2 करोड़ 60 लाख लोगों की जान गँवाई और देश की लगभग एक-तिहाई राष्ट्रीय संपत्ति नष्ट हो गई। इसके अलावा, लगभग 70,000 गाँव और 1,700 शहर तबाह हो गए।