विजयनगर जिले में केंद्रीय सूखा टीम का दौरा, 2.71 लाख हेक्टेयर फसल नुकसान का होगा आकलन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के विजयनगर जिले में गंभीर सूखे की स्थिति और फसल नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम जल्द दौरा करेगी। जिले में मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान सामान्य से 57 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे लगभग 2.71 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। जिला प्रशासन ने टीम के आगमन को लेकर जिला और तालुक स्तर के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
सूखे की गंभीरता: आँकड़े बोलते हैं
विजयनगर जिले में इस वर्ष मानसून अवधि में सामान्यतः 38.91 सेंटीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, परंतु वास्तव में केवल 16.84 सेंटीमीटर बारिश ही दर्ज की गई। यह कमी करीब 57 प्रतिशत है — जो जिले को गंभीर सूखे की श्रेणी में रखती है। इस असाधारण वर्षा-अभाव के चलते मक्का, बाजरा, मूंगफली, सूरजमुखी और प्याज जैसी प्रमुख फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
केंद्रीय टीम का प्रस्तावित दौरा कार्यक्रम
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम सबसे पहले हरपनहल्ली तालुक के दुग्गावती गांव और नीलगुंडा गांव का दौरा करेगी। यहाँ टीम वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत चल रहे झील के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करेगी।
इसके बाद मैदुर गांव में मक्का, बाजरा, मूंगफली, सूरजमुखी और प्याज की फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया जाएगा। टीम किसानों से सीधे बातचीत कर पेयजल संकट और सूखे से उत्पन्न अन्य समस्याओं की जमीनी जानकारी एकत्र करेगी।
तत्पश्चात् टीम हडगली तालुक के इटागी गांव पहुँचेगी, जहाँ मक्का और प्याज की फसल क्षति के साथ-साथ झील जीर्णोद्धार कार्य और स्थानीय मजदूरों की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी। अंत में कुडलगी स्थित टूरिस्ट मंदिर में जिला स्तरीय सूखा समीक्षा बैठक आयोजित होगी, जिसमें अधिकारी सूखे की विस्तृत जानकारी केंद्रीय टीम को देंगे।
जिला प्रशासन की सख्त हिदायत
जिला कलेक्टर कविता मन्नीकेरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केंद्रीय टीम के सामने जिले की सूखे की वास्तविक और पूरी तस्वीर रखी जाए — किसी भी समस्या को छिपाया न जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की दिक्कतों और फसल नुकसान की सही स्थिति का खुलासा ज़रूरी है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों का उचित और सटीक आकलन संभव हो सके।
यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय आकलन के आधार पर ही राहत और पुनर्वास की राशि तय होती है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार पहले ही राज्य में सूखे की स्थिति घोषित कर चुकी है और केंद्र से सहायता की माँग की है।
आम जनता और किसानों पर असर
विजयनगर जिले के किसान इस वर्ष दोहरी मार झेल रहे हैं — एक तरफ बारिश की कमी से फसल बर्बादी और दूसरी तरफ पेयजल का संकट। लगभग 2.71 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलें प्रभावित होने से जिले के हजारों किसान परिवारों की आजीविका खतरे में है। केंद्रीय टीम किसानों से सीधी बातचीत कर वास्तविक नुकसान का दस्तावेजीकरण करेगी, जो मुआवजे की प्रक्रिया को गति दे सकता है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय सूखा अध्ययन टीम के दौरे के बाद तैयार रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से सहायता राशि की स्वीकृति की संभावना है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि केंद्रीय टीम की यह यात्रा प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।