विश्व भूगर्भ जल दिवस: कैलाश विजयवर्गीय बोले — 'जल है तो कल है', देशभर के नेताओं ने लिया संरक्षण का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
विश्व भूगर्भ जल दिवस के अवसर पर 10 जून 2026 को देशभर के राजनेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर भूगर्भ जल संरक्षण की अपील की। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता एवं राज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक — सभी ने वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और जल की बर्बादी रोकने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।
नेताओं के प्रमुख संदेश
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक्स पर लिखा, 'जल ही जीवन है, जल है तो कल है। विश्व भूगर्भ जल दिवस पर आइए, वर्षा जल संचयन और भूगर्भ जल संरक्षण का संकल्प लें।' उन्होंने वैज्ञानिक शोध का हवाला देते हुए कहा कि वर्षा जल का भू-भरण जलस्तर बढ़ाने, सूखे के प्रभाव को कम करने और पेयजल स्रोतों को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे जल बर्बाद न करें और अधिकाधिक पेड़-पौधे लगाकर जल संचयन में सहभागी बनें।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों की अपील
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, 'भूगर्भीय जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि हमारी अमूल्य धरोहर और भविष्य की सुरक्षा है। इसका अंधाधुंध दोहन रोकना और प्रत्येक बूंद का संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है।' उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील है और निरंतर प्रयासरत है।
बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जल समस्त जीव जगत का आधार है और जल संरक्षण व संवर्धन के माध्यम से इस आधार को सशक्त बनाना हर नागरिक की नैतिक व राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
विधायक और अन्य प्रतिनिधियों की भागीदारी
अपना दल (एस) के विधायक विनय वर्मा ने भी भूगर्भ जल संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की और कहा कि इस धरा को बचाने के लिए भूगर्भ जल का संरक्षण अनिवार्य है।
भूगर्भ जल संकट: पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत विश्व में भूगर्भ जल का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्टों के अनुसार देश के कई राज्यों में जलस्तर चिंताजनक रूप से गिर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की अनिश्चितता बढ़ रही है और कृषि व पेयजल दोनों के लिए भूगर्भ जल पर निर्भरता और गहरी हो रही है। विश्व भूगर्भ जल दिवस प्रतिवर्ष 10 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस अदृश्य किंतु जीवनदायी संसाधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अपीलों को ज़मीनी नीति और सामुदायिक भागीदारी में बदलना ही असली चुनौती है। वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने वाली नीतियाँ और भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन पर नियामक नियंत्रण इस दिशा में ठोस कदम हो सकते हैं।