विश्व फोटोग्राफी दिवस 2026: रूपाला, रेखा शर्मा, केशव मौर्य समेत नेताओं ने छायाकारों को दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर 19 अगस्त 2026 को देशभर के नेताओं ने फोटोग्राफर्स को शुभकामनाएं देते हुए इस कला की सामाजिक और ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक और उत्तर प्रदेश से ओडिशा तक, विभिन्न दलों के नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी भावनाएं साझा कीं।
लोकसभा सांसद रूपाला का संदेश
लोकसभा सांसद पुरुषोत्तम रूपाला ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस पर, आइए फ़ोटोग्राफ़ी की उस शक्ति का जश्न मनाएँ जो जीवन की सुंदरता को कैद करती है, प्यारी यादों को संजोती है और ऐसी कहानियाँ सुनाती है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं। हर फ़्रेम में एक कहानी, एक भावना और याद रखने लायक एक पल छिपा होता है।'
राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा की अपील
राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने एक्स पर अपने संदेश में कहा, 'विश्व फोटोग्राफी दिवस पर उन सभी छायाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं, जो अपनी कला और दृष्टि के माध्यम से समाज, संस्कृति, प्रकृति और जीवन के अनमोल क्षणों को हमेशा के लिए यादों में कैद करते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक बेहतरीन तस्वीर वह होती है जिसे देखने के बाद शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती — वह स्वयं बोलती है, भावनाएं जगाती है और इतिहास को जीवंत कर देती है।
यूपी के उपमुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर लिखा, 'तस्वीरें समाज का आईना, समय की स्मृति और इतिहास की जीवंत गवाह होती हैं।' उन्होंने सभी छायाकारों को बधाई देते हुए कहा कि फोटोग्राफी केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि कला, दृष्टि और संवेदना का अद्भुत संगम है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी फोटोग्राफी जगत से जुड़े सभी फोटोग्राफर्स और प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
ओडिशा के उपमुख्यमंत्री का नजरिया
ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने कहा, 'एक तस्वीर सिर्फ किसी पल को कैद नहीं करती, बल्कि उसमें छिपी भावनाओं, नजरिए और कहानी को भी संजोकर रखती है।' उन्होंने आह्वान किया कि इस दिवस पर उन फोटोग्राफर्स का सम्मान किया जाए जिनकी दृष्टि से गुजरते पल हमेशा के लिए यादगार बन जाते हैं।
फोटोग्राफी दिवस का महत्व
गौरतलब है कि 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1839 में फ्रांस सरकार ने डैगेरियोटाइप प्रक्रिया को सार्वजनिक किया था, जिसे आधुनिक फोटोग्राफी की नींव माना जाता है। यह दिन दुनियाभर के छायाकारों की रचनात्मकता और उनके सामाजिक योगदान को मान्यता देने का अवसर है।