2 अक्टूबर 2026
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 में युवाओं को सेवा और कर्तव्य बोध अपनाने का आह्वान किया

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 में युवाओं को सेवा और कर्तव्य बोध अपनाने का आह्वान किया

सारांश

गांधी जयंती पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 में निःस्वार्थ सेवाकर्मियों को सम्मानित किया और युवाओं से आग्रह किया कि विकसित भारत का सपना आर्थिक आँकड़ों से नहीं, बल्कि करुणा और कर्तव्य बोध से पूरा होगा।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
निःस्वार्थ सेवा के लिए चयनित व्यक्तियों और संगठनों को संत ईश्वर सेवा सम्मान प्रदान किया गया।
संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती लगातार 11 वर्षों से यह पुरस्कार आयोजित कर रहे हैं।
राधाकृष्णन ने स्वच्छ भारत मिशन को 'जन भागीदारी' की सफलता का उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त युवा' अभियान और गृह मंत्री अमित शाह के 'नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप' का उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि हर नागरिक की गरिमा और आशा से परिभाषित होगा।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और समाज की निःस्वार्थ सेवा के लिए चुने गए व्यक्तियों व संगठनों को संत ईश्वर सेवा सम्मान से विभूषित किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा पीढ़ी से सेवा भाव और कर्तव्य बोध को अपने जीवन का केंद्र बनाने का आग्रह किया।

समारोह और पुरस्कार वितरण

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संत ईश्वर सम्मान निःस्वार्थ सेवा की भावना की स्वीकृति है और भारत की करुणा तथा उत्तरदायित्व की संस्कृति का उत्सव है। उन्होंने राष्ट्र के प्रति असाधारण योगदान देने वाले सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

राधाकृष्णन ने संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती की सराहना की, जिन्होंने यह पहल शुरू कर लगातार 11 वर्षों तक इसे जीवित रखा। उन्होंने कहा कि मौन रूप से समाज के लिए कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित कर ये पुरस्कार दूसरों को भी सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

भारत की सेवा परंपरा और 'विकसित भारत' का लक्ष्य

सेवा की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा का स्मरण कराते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सभ्यतागत संस्कृति ने सदा यही सिखाया है — 'नर सेवा ही नारायण सेवा है।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के महान संतों और विचारकों ने लोगों को स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दी है।

'विकसित भारत' के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि, इंफ्रास्ट्रक्चर या तकनीकी प्रगति से नहीं मापा जा सकता। उनके अनुसार, सही अर्थों में विकसित भारत वह होगा जहाँ हर नागरिक गरिमा, अवसर और आशा का अनुभव करे।

जन भागीदारी और राष्ट्र निर्माण

राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक नागरिक एक स्टेकहोल्डर है और सेवा संगठनों का कार्य जमीनी स्तर पर वास्तविक राष्ट्र निर्माण का कार्य है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार 'जन भागीदारी' ने एक सरकारी कार्यक्रम को सच्चे जन आंदोलन में रूपांतरित किया।

नशामुक्ति अभियान और युवाओं के लिए चेतावनी

उपराष्ट्रपति ने युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए नशीले पदार्थों तथा मादक द्रव्यों के सेवन से उत्पन्न गंभीर खतरे पर भी ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने स्मरण कराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष अगस्त में 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत की थी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप' लॉन्च किया था। उन्होंने कहा कि दोनों पहलें नशा मुक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

समापन संदेश

अपने संबोधन के अंत में राधाकृष्णन ने विकास के साथ-साथ करुणा, चरित्र और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपरिहार्य बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुरस्कार विजेताओं का जीवन अधिक से अधिक नागरिकों — विशेषकर युवाओं — को समाज के कल्याण हेतु स्वयं को समर्पित करने और सेवा भाव को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगा। यह समारोह ऐसे समय में आयोजित हुआ जब देश महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था, जो स्वयं निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सामाजिक सेवा क्षेत्र अभी भी संस्थागत मान्यता और फंडिंग की कमी से जूझता है। युवाओं से कर्तव्य बोध का आग्रह तभी व्यावहारिक फल देगा जब स्वयंसेवी कार्य को राष्ट्रीय नीति में उचित स्थान और संसाधन मिलें।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11वाँ संत ईश्वर सम्मान-2026 क्या है?
यह संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती द्वारा आयोजित वार्षिक पुरस्कार समारोह है, जो समाज की निःस्वार्थ सेवा करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करता है। 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इस 11वें संस्करण में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि थे।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं से क्या आह्वान किया?
उन्होंने युवाओं से सेवा भाव और कर्तव्य बोध को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। साथ ही नशीले पदार्थों के खतरों से आगाह करते हुए 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' जैसे अभियानों से जुड़ने की प्रेरणा दी।
नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप क्या है?
यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च किया गया एक राष्ट्रीय रोडमैप है, जिसका उद्देश्य 2029 तक भारत को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव से मुक्त करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसी दिशा में अगस्त 2026 में 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत की थी।
उपराष्ट्रपति ने 'विकसित भारत' की परिभाषा कैसे दी?
राधाकृष्णन ने कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक वृद्धि, इंफ्रास्ट्रक्चर या तकनीकी प्रगति से नहीं मापा जा सकता। उनके अनुसार, सही मायने में विकसित भारत वह है जहाँ प्रत्येक नागरिक गरिमा, अवसर और आशा का अनुभव करे।
संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती का इस पुरस्कार में क्या योगदान है?
संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती ने मिलकर इस पुरस्कार की शुरुआत की और लगातार 11 वर्षों से इसे संचालित कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने इन संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये पुरस्कार समाज में सेवा की संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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