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वेयरहाउसिंग ग्रोथ ग्रेड-ए शहरों से आगे बढ़ेगी; ओडिशा, बंगाल, असम बनेंगे नए हब: अदाणी पोर्ट्स

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वेयरहाउसिंग ग्रोथ ग्रेड-ए शहरों से आगे बढ़ेगी; ओडिशा, बंगाल, असम बनेंगे नए हब: अदाणी पोर्ट्स

सारांश

भारत का वेयरहाउसिंग क्षेत्र अब मेट्रो शहरों की सीमाएँ तोड़ रहा है। अदाणी पोर्ट्स के पंकज भारद्वाज के अनुसार ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम अगले बड़े लॉजिस्टिक्स हब बन सकते हैं — 15-16 बंदरगाहों का नेटवर्क, BTS मॉडल और राज्यों की नई नीतियाँ इस बदलाव को गति देंगी।

मुख्य बातें

भारत में विकसित हो रहे 1.3 से 1.4 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्पेस का 60-70% अभी ग्रेड-ए और ग्रेड-बी शहरों में है।
अदाणी पोर्ट्स अब बी और सी श्रेणी के शहरों तथा बंदरगाह-आधारित लॉजिस्टिक्स पर फोकस कर रही है।
ओडिशा , पश्चिम बंगाल और असम को अगले बड़े वेयरहाउसिंग विकास केंद्र के रूप में चिह्नित किया गया है।
कंपनी के पास दोनों तटों पर 15-16 बंदरगाहों का नेटवर्क है; धामरा और विझिंजम पोर्ट प्रमुख फोकस में हैं।
पारादीप बंदरगाह में हाल ही में दो नई बर्थ मिलने से पूर्वी तट पर उपस्थिति मज़बूत हुई।
अगले 5 से 10 वर्षों में सरकार के निर्यात प्रयासों से बंदरगाह-आधारित वेयरहाउसिंग की माँग में तेज वृद्धि संभव।

भारत में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की विकास गाथा अब केवल मेट्रो और ग्रेड-ए शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड के वेयरहाउसिंग और अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं बिजनेस हेड पंकज कुमार भारद्वाज ने 29 सितंबर को कहा कि आने वाले वर्षों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य इस क्षेत्र के नए विकास केंद्र बनकर उभर सकते हैं। उनके अनुसार, राज्य सरकारों की नई लॉजिस्टिक्स नीतियाँ और बंदरगाह-आधारित अवसंरचना इस बदलाव को गति देंगे।

मौजूदा वेयरहाउसिंग परिदृश्य

भारद्वाज ने बताया कि वर्तमान में देश में विकसित हो रहे लगभग 1.3 से 1.4 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्पेस का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा ग्रेड-ए और ग्रेड-बी शहरों में केंद्रित है। यह अनुपात भविष्य में बदलने की संभावना है, क्योंकि कंपनियाँ और निवेशक अब बी और सी श्रेणी के शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि पूर्वी भारत में वेयरहाउसिंग का विकास अब भी पश्चिमी और उत्तरी भारत की तुलना में अपेक्षाकृत कम हुआ है, जो आगे चलकर बड़े अवसर का संकेत देता है।

कंपनी की रणनीति और बिल्ड-टू-सूट मॉडल

भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि अदाणी पोर्ट्स की रणनीति केवल उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम केवल ग्रेड-ए शहरों पर नहीं, बल्कि बी और सी श्रेणी के शहरों पर भी फोकस कर रहे हैं।' कंपनी के पास ऐसे कई स्थानों पर भूमि उपलब्ध है, जहाँ ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार वेयरहाउस विकसित किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी बिल्ड-टू-सूट (BTS) मॉडल के तहत भी सुविधाएँ विकसित करने में सक्षम है, जिसमें ग्राहक की विशिष्ट ज़रूरतों के अनुसार वेयरहाउस तैयार किए जाते हैं।

बंदरगाह-आधारित और निर्यात-केंद्रित विस्तार

भारद्वाज ने बताया कि कंपनी की रणनीति निर्यात-आयात (EXIM), बंदरगाह-आधारित और इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) आधारित विकास पर भी केंद्रित है। अदाणी समूह की दोनों तटों पर 15 से 16 बंदरगाहों में उपस्थिति है, जिसका लाभ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार में मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले 5 से 10 वर्षों में सरकार के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों से बंदरगाह-आधारित वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की माँग में तेज वृद्धि हो सकती है।

धामरा और विझिंजम: पूर्वी-दक्षिणी तट पर फोकस

पूर्वी और दक्षिणी तटों पर कंपनी की रणनीति के बारे में भारद्वाज ने बताया कि धामरा पोर्ट और केरल का विझिंजम पोर्ट प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं। विझिंजम पोर्ट तेज़ी से एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, कंपनी को हाल ही में पारादीप बंदरगाह में दो बर्थ भी मिली हैं, जिससे पूर्वी तट पर उसकी उपस्थिति और मज़बूत होगी।

राज्यों की लॉजिस्टिक्स नीतियाँ और आगे की राह

भारद्वाज ने कहा कि हर राज्य अब एक लॉजिस्टिक्स नीति बना रहा है और अधिक निर्माताओं, साझेदारों तथा औद्योगिक विकासकर्ताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, 'कुल मिलाकर, सभी राज्य अब इस दिशा में काम कर रहे हैं... लोग आगे बढ़कर राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं, ताकि वहाँ उनके पोर्टफोलियो का विकास किया जा सके।' उनके अनुसार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में बढ़ती लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ न केवल अतिरिक्त कार्गो वॉल्यूम लाएंगी, बल्कि पूरे सप्लाई चेन इकोसिस्टम की लागत को भी कम करने में मदद करेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के वर्तमान अनुमानित 13-14 प्रतिशत से घटाकर एकल अंक तक लाने का लक्ष्य रख रही है — और पूर्वी भारत के उभरते बाज़ार इस लक्ष्य में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जैसे सड़क संपर्क और कुशल श्रम की उपलब्धता, इस महत्वाकांक्षा के साथ तालमेल बिठा पाएंगी। अदाणी समूह की बंदरगाह-केंद्रित उपस्थिति उसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देती है, परंतु ओडिशा, बंगाल और असम में वेयरहाउसिंग की वास्तविक माँग अभी भी पश्चिमी और उत्तरी भारत से काफी पीछे है। राज्यों की लॉजिस्टिक्स नीतियाँ कागज़ पर आकर्षक दिखती हैं, लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन और निवेशकों का भरोसा जीतने में वक्त लगता है — यही वह कसौटी होगी जो इस विज़न को हकीकत में बदलेगी या नहीं।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी पोर्ट्स की वेयरहाउसिंग विस्तार रणनीति क्या है?
अदाणी पोर्ट्स अब केवल ग्रेड-ए शहरों तक सीमित न रहकर बी और सी श्रेणी के शहरों, बंदरगाह-आधारित और ICD-आधारित वेयरहाउसिंग पर फोकस कर रही है। कंपनी बिल्ड-टू-सूट (BTS) मॉडल के तहत भी ग्राहक-विशिष्ट वेयरहाउस विकसित करने में सक्षम है।
ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम वेयरहाउसिंग हब क्यों बन सकते हैं?
पंकज कुमार भारद्वाज के अनुसार, पूर्वी भारत में वेयरहाउसिंग का विकास अभी पश्चिमी और उत्तरी भारत की तुलना में कम हुआ है, जो बड़े अवसर का संकेत देता है। इन राज्यों में बढ़ती लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ और राज्य सरकारों की नई नीतियाँ निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
भारत में वर्तमान में कितना वेयरहाउसिंग स्पेस विकसित हो रहा है?
अदाणी पोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में भारत में लगभग 1.3 से 1.4 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्पेस विकसित हो रहा है, जिसमें से 60-70 प्रतिशत ग्रेड-ए और ग्रेड-बी शहरों में केंद्रित है।
अदाणी पोर्ट्स के लिए धामरा और विझिंजम पोर्ट क्यों महत्वपूर्ण हैं?
धामरा पोर्ट और केरल का विझिंजम पोर्ट कंपनी के पूर्वी और दक्षिणी तट विस्तार के प्रमुख केंद्र हैं। विझिंजम पोर्ट तेज़ी से एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर रहा है, जबकि पारादीप बंदरगाह में दो नई बर्थ मिलने से पूर्वी तट पर कंपनी की स्थिति और मज़बूत हुई है।
बंदरगाह-आधारित वेयरहाउसिंग की माँग अगले वर्षों में कैसे बढ़ेगी?
पंकज कुमार भारद्वाज के अनुसार, अगले 5 से 10 वर्षों में सरकार के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों से बंदरगाह-आधारित वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की माँग में तेज़ वृद्धि हो सकती है। अदाणी समूह की दोनों तटों पर 15-16 बंदरगाहों में उपस्थिति इस अवसर का लाभ उठाने में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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