26 जून 2026
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नीति आयोग: JAM ट्रिनिटी और कल्याण योजनाओं के समन्वय से करोड़ों परिवारों का वित्तीय स्वास्थ्य सुधरा

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नीति आयोग: JAM ट्रिनिटी और कल्याण योजनाओं के समन्वय से करोड़ों परिवारों का वित्तीय स्वास्थ्य सुधरा

सारांश

नीति आयोग के डॉ. बालासुब्रमण्यम ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष अधिवक्ता महारानी मैक्सिमा के साथ बातचीत में भारत का एकीकृत कल्याण मॉडल पेश किया — JAM ट्रिनिटी से शुरू होकर आयुष्मान भारत, PDS, DBT और उज्ज्वला तक, यह समन्वय करोड़ों परिवारों की आर्थिक असुरक्षा घटाने का दावा करता है।

मुख्य बातें

नीति आयोग के सदस्य डॉ.
बालासुब्रमण्यम ने 26 जून 2026 को महारानी मैक्सिमा (संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्वास्थ्य विशेष अधिवक्ता) के साथ भारत के वित्तीय समावेशन मॉडल पर चर्चा की।
भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा JAM ट्रिनिटी — जन धन खाते , आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी — पर आधारित है।
आयुष्मान भारत , PDS , प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना , DBT और पेंशन योजनाओं के समन्वय से परिवारों की आर्थिक मजबूती बढ़ी है।
बालासुब्रमण्यम के अनुसार, वित्तीय स्वास्थ्य को केवल बैंकिंग सेवाओं तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए — सामाजिक सुरक्षा इसका अनिवार्य हिस्सा है।
भारत के इस एकीकृत मॉडल को वैश्विक मंच पर विकासशील देशों के लिए संभावित संदर्भ बिंदु के रूप में प्रस्तुत किया गया।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा के साथ हुई उच्चस्तरीय बातचीत में भारत के वित्तीय समावेशन मॉडल की विस्तृत जानकारी साझा की। महारानी मैक्सिमा संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वित्तीय स्वास्थ्य विषयक विशेष अधिवक्ता भी हैं। डॉ. बालासुब्रमण्यम ने रेखांकित किया कि कल्याणकारी योजनाओं के परस्पर समन्वय ने देशभर के करोड़ों परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को घटाया है और उनकी वित्तीय स्थिति को ठोस आधार दिया है।

JAM ट्रिनिटी: वित्तीय समावेशन की नींव

डॉ. बालासुब्रमण्यम ने बताया कि भारत में वित्तीय समावेशन की यात्रा JAM ट्रिनिटीजन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी — से शुरू हुई। इसी त्रिस्तरीय ढाँचे ने बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेशन की मजबूत नींव रखी और देश की वंचित आबादी को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ा। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इस ढाँचे की सहायता से एक एकीकृत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली विकसित हुई है, जिसका सीधा असर लोगों के वित्तीय स्वास्थ्य पर पड़ा है।

वित्तीय स्वास्थ्य का व्यापक दृष्टिकोण

ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में दीर्घकालिक अनुभव का उल्लेख करते हुए डॉ. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि वित्तीय स्वास्थ्य को केवल बैंकिंग सेवाओं तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, जब तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच के साथ सामाजिक सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था न हो, तब तक समावेशन अधूरा रहता है। यह दृष्टिकोण भारत के मॉडल को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देता है।

कल्याण योजनाओं का समन्वय: मुख्य घटनाक्रम

नीति आयोग के सदस्य ने बताया कि वित्तीय समावेशन के साथ-साथ निम्नलिखित योजनाओं के एकीकरण ने परिवारों की आर्थिक मजबूती बढ़ाई है:

आयुष्मान भारत और आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा; सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के ज़रिए खाद्य सुरक्षा; प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से ऊर्जा तक पहुँच; प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से पारदर्शी सब्सिडी वितरण; और पेंशन योजनाओं का विस्तार — इन सभी ने मिलकर एक बहुस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार किया है।

भारत का वैश्विक संदेश

महारानी मैक्सिमा के साथ इस संवाद में भारत ने यह स्पष्ट किया कि वित्तीय समावेशन को स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के साथ जोड़कर ही समुदायों के लिए टिकाऊ आर्थिक आधार बनाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंच पर विकासशील देशों के वित्तीय समावेशन मॉडल को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह बातचीत संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय स्वास्थ्य एजेंडे के व्यापक संदर्भ में हुई है। भारत का एकीकृत कल्याण मॉडल अब अन्य विकासशील देशों के लिए एक संभावित संदर्भ बिंदु के रूप में उभर रहा है। नीति आयोग के अनुसार, इन योजनाओं के बेहतर समन्वय से करोड़ों परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि JAM ट्रिनिटी और DBT के ज़रिए पहुँच सुनिश्चित होने के बावजूद, ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता और सेवाओं की गुणवत्ता का अंतर अभी भी गहरा है। समन्वय की सफलता के दावों को सत्यापित करने के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन ढाँचे की ज़रूरत है — केवल योजनाओं की संख्या नहीं, लाभार्थियों के जीवन में वास्तविक बदलाव के आँकड़े चाहिए। महारानी मैक्सिमा जैसे वैश्विक मंचों पर भारत का मॉडल पेश करना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, पर घरेलू स्तर पर कार्यान्वयन की खामियाँ — विशेषकर अंतिम छोर तक सेवा वितरण में — अभी भी चुनौती बनी हुई हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग के डॉ. बालासुब्रमण्यम ने महारानी मैक्सिमा को भारत के किस मॉडल के बारे में बताया?
उन्होंने भारत के एकीकृत वित्तीय समावेशन मॉडल के बारे में बताया, जो JAM ट्रिनिटी (जन धन, आधार, मोबाइल) पर आधारित है और आयुष्मान भारत, PDS, DBT तथा उज्ज्वला योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के समन्वय से करोड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है।
JAM ट्रिनिटी क्या है और यह वित्तीय समावेशन में कैसे मदद करती है?
JAM ट्रिनिटी तीन स्तंभों — जन धन खाते, आधार पहचान और मोबाइल कनेक्टिविटी — का संयोजन है। यह ढाँचा वंचित आबादी को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ता है और DBT जैसी योजनाओं के माध्यम से सीधे लाभ हस्तांतरण को संभव बनाता है।
महारानी मैक्सिमा की संयुक्त राष्ट्र में क्या भूमिका है?
महारानी मैक्सिमा संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वित्तीय स्वास्थ्य विषयक विशेष अधिवक्ता हैं। इस भूमिका में वे वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन और वित्तीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न देशों के साथ संवाद करती हैं।
भारत में वित्तीय स्वास्थ्य सुधारने में कौन-सी योजनाएँ प्रमुख भूमिका निभा रही हैं?
नीति आयोग के अनुसार, आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य सुरक्षा), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (खाद्य सुरक्षा), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (ऊर्जा पहुँच), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और पेंशन योजनाएँ — इन सभी के समन्वय से परिवारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा में सुधार आया है।
नीति आयोग के अनुसार वित्तीय समावेशन और वित्तीय स्वास्थ्य में क्या अंतर है?
नीति आयोग के अनुसार, वित्तीय समावेशन केवल बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है, जबकि वित्तीय स्वास्थ्य एक व्यापक अवधारणा है जिसमें स्वास्थ्य, खाद्य, ऊर्जा और सामाजिक सुरक्षा की एकीकृत व्यवस्था भी शामिल है। बिना सामाजिक सुरक्षा के वित्तीय समावेशन अधूरा माना जाता है।
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