1 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ग्रेटर नोएडा में खुलेगा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस 'जलसेतु', दिसंबर 2025 से होगा संचालन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ग्रेटर नोएडा में खुलेगा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस 'जलसेतु', दिसंबर 2025 से होगा संचालन

सारांश

उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय का कैंपस खुलने जा रहा है। वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का 'जलसेतु' कैंपस ग्रेटर नोएडा में दिसंबर 2025 से शुरू होगा — जल सुरक्षा शोध, मास्टर डिग्री और स्कॉलरशिप के साथ भारत-ऑस्ट्रेलिया शिक्षा सहयोग को नई परिभाषा देने की कोशिश।

मुख्य बातें

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश का पहला कैंपस स्थापित करने की घोषणा की, जिसका नाम 'जलसेतु' रखा गया है।
कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर के टावर-2 में तीन फ्लोर पर स्थापित होगा और दिसंबर 2025 तक संचालन शुरू होने की तैयारी है।
घोषणा न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स और उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की उपस्थिति में नई दिल्ली में की गई।
कैंपस के साथ सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम और महिला सशक्तीकरण, डेटा, इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में स्कॉलरशिप कार्यक्रम भी शुरू होंगे।
'जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' भूजल स्थिरता, नदी स्वास्थ्य और शहरी जल प्रबंधन पर शोध करेगा।
विश्वविद्यालय में वर्तमान में करीब 50,000 छात्र अध्ययनरत हैं और इसे टाइम्स हायर एजुकेशन इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्व में तीसरा स्थान मिलने का दावा है।

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश का अपना पहला कैंपस स्थापित करने की औपचारिक घोषणा की है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया शैक्षणिक साझेदारी की दिशा में एक निर्णायक कदम है। 'जलसेतु' नाम से जाना जाने वाला यह कैंपस दिसंबर 2025 तक संचालन शुरू करने की तैयारी में है। इस घोषणा से क्षेत्र के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए विदेश जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकेगी।

मुख्य घटनाक्रम

यह ऐतिहासिक घोषणा नई दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में की गई। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की उपस्थिति में इस कैंपस की स्थापना की विधिवत घोषणा की।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव एवं प्रेरणा सिंह, न्यू साउथ वेल्स के कोषाध्यक्ष डेनियल मुकी तथा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कैंपस की संरचना और पाठ्यक्रम

प्रस्तावित कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर स्थित टावर-2 में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए विश्वविद्यालय ने तीन फ्लोर आवंटित किए हैं। कैंपस की शुरुआत के साथ ही सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम भी आरंभ किया जाएगा।

इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों, बैंकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ व्यावहारिक कार्य का अवसर प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डेटा, इनोवेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में स्कॉलरशिप कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।

जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

ग्रेटर नोएडा कैंपस को केवल एक शैक्षणिक संस्थान तक सीमित न रखते हुए 'जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की गई है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश और देश के सामने मौजूद जल सुरक्षा चुनौतियों के समाधान हेतु शोध संस्थानों, सरकार, उद्योग और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाएगा।

केंद्र में भूजल स्थिरता, नदियों के स्वास्थ्य, सतत सिंचाई और शहरी जल प्रबंधन जैसे विषयों पर शोध किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर तेज़ी से गिर रहा है और सिंचाई संकट गहरा रहा है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति जॉर्ज विलियम्स एओ ने कहा कि भारत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है — विश्वविद्यालय ऐसे अवसर उपलब्ध कराना चाहता है जिनके माध्यम से युवा भारत के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

क्रिस मिन्स ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने वाला यह कैंपस भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक सेतु का काम करेगा, जिससे भारतीय विद्यार्थियों को वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की विश्वस्तरीय शिक्षा अपने देश में ही प्राप्त होगी।

गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कैंपस की स्थापना और संचालन में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।

क्या होगा आगे

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में वर्तमान में करीब 50,000 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्व स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त होने का दावा किया गया है। ग्रेटर नोएडा में इस कैंपस के खुलने से न केवल स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के विकल्प मिलेंगे, बल्कि भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शोध, तकनीक और उद्योग-आधारित शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मगर तीन फ्लोर के एक कार्यालय परिसर से विश्वस्तरीय शोध केंद्र बनाने का रास्ता लंबा है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश के भूजल संकट के बीच जल प्रबंधन को केंद्र में रखना नीतिगत दृष्टि से सुविचारित है — पर स्थानीय सरकार, उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच वास्तविक समन्वय के बिना यह केंद्र भी एक घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का ग्रेटर नोएडा कैंपस कब शुरू होगा?
कैंपस को दिसंबर 2025 तक शुरू करने की तैयारी है। यह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर स्थित टावर-2 में तीन फ्लोर पर स्थापित किया जाएगा।
'जलसेतु' कैंपस का नाम क्यों रखा गया और इसका उद्देश्य क्या है?
'जलसेतु' नाम भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शैक्षणिक सेतु और जल सुरक्षा शोध पर केंद्रित दृष्टि को दर्शाता है। इस कैंपस को 'जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जाएगा, जो भूजल स्थिरता, नदी स्वास्थ्य और शहरी जल प्रबंधन पर शोध करेगा।
इस कैंपस में कौन-से पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे?
कैंपस की शुरुआत के साथ सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम शुरू होगा। इसके अलावा महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डेटा, इनोवेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में स्कॉलरशिप कार्यक्रम भी घोषित किए गए हैं।
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की वैश्विक रैंकिंग क्या है?
विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्व स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त होने का दावा किया गया है। वर्तमान में इसमें करीब 50,000 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
इस कैंपस से उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को क्या फायदा होगा?
ग्रेटर नोएडा में यह कैंपस खुलने से स्थानीय विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, शोध और कौशल विकास के लिए विदेश जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकेगी। उद्योग-आधारित प्रशिक्षण और स्कॉलरशिप के ज़रिए रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले