ब्रिस्टल, यॉर्क और UNSW भारत में खोलेंगे कैंपस, मुंबई-बेंगलुरु बनेंगे नए शैक्षणिक हब
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में मंगलवार, 9 जून को शिक्षा मंत्रालय ने ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, यॉर्क विश्वविद्यालय और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय (UNSW) को भारत में परिसर स्थापित करने के स्वीकृति पत्र सौंपे। नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत यह कदम भारत को वैश्विक उच्च शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव है।
किसे मिला स्वीकृति पत्र और कहाँ खुलेंगे परिसर
ये स्वीकृति पत्र उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी ने संबंधित विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को प्रदान किए। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय और यॉर्क विश्वविद्यालय अपने परिसर मुंबई में स्थापित करेंगे, जबकि न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय का परिसर बेंगलुरु में खुलेगा।
ब्रिस्टल विश्वविद्यालय का मुंबई एंटरप्राइज परिसर इमर्सिव आर्ट्स, वित्त, डेटा साइंस, अर्थशास्त्र, व्यवसाय प्रबंधन, उद्यमिता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कार्यक्रम संचालित करेगा। यॉर्क विश्वविद्यालय मुंबई में अपना पहला विदेशी परिसर खोलेगा, जहाँ वित्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित कंप्यूटर विज्ञान, साइबर सुरक्षा, व्यवसाय, अर्थशास्त्र, रचनात्मक उद्योग और प्रबंधन के पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे।
UNSW का बेंगलुरु परिसर अगस्त 2026 से मान्यता बिजनेस पार्क में शुरू होने की योजना है। यहाँ व्यवसाय, कंप्यूटर विज्ञान और साइबर सुरक्षा के अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, परिवहन और शिक्षा क्षेत्रों में भी भारत के साथ गहन सहयोग विकसित किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों का भारत आगमन नई शिक्षा नीति 2020 के 'अंतरराष्ट्रीयकरण' के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, 'इससे भारत में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी और शोध सहयोग को नई गति मिलेगी।' शिक्षा मंत्री ने बेंगलुरु को 'दुनिया के पूर्वी हिस्से की नई सिलिकॉन वैली' बताते हुए कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों की मौजूदगी से भारत की वैश्विक शैक्षणिक पहचान और मज़बूत होगी।
अब तक कितने विश्वविद्यालयों को मिली मंज़ूरी
विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बनाए गए नए नियमों के तहत अब तक पाँच विश्वविद्यालयों को स्वीकृति पत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें साउथैम्पटन विश्वविद्यालय और लिवरपूल विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। साउथैम्पटन विश्वविद्यालय ने 2025-26 सत्र से भारत में अपनी शैक्षणिक गतिविधियाँ शुरू कर दी हैं।
गौरतलब है कि डीकिन विश्वविद्यालय, वोलोंगोंग विश्वविद्यालय और क्वीन्स विश्वविद्यालय बेलफास्ट पहले से ही गुजरात के गिफ्ट सिटी में संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इटली के कई प्रतिष्ठित संस्थानों को आशय पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
छात्रों और शिक्षा जगत पर असर
शिक्षाविदों का मानना है कि इन परिसरों के खुलने से भारतीय छात्रों को विदेश गए बिना विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ेगा, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह बढ़ती रुचि भारत की मज़बूत शैक्षणिक व्यवस्था, अनुकूल नियामक ढाँचे और तेज़ी से विकसित हो रहे ज्ञान-आधारित अर्थतंत्र में वैश्विक संस्थानों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। आने वाले वर्षों में भारत का उच्च शिक्षा परिदृश्य और अधिक प्रतिस्पर्धी एवं समावेशी बनने की दिशा में अग्रसर है।