मुंबई में 'विकसित भारत हेतु शिक्षा' सम्मेलन, RSS सरकार्यवाह होसबाले समेत 4 राज्यों के शिक्षा मंत्री होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास शनिवार, 2 अगस्त 2025 को मुंबई में 'विकसित भारत हेतु शिक्षा' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें शिक्षा, उद्योग, शासन और समाज के क्षेत्रों से लगभग 100 विशिष्ट प्रतिभागी भाग लेंगे। यह सम्मेलन विकसित भारत-2047 के निर्माण में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
प्रमुख सहभागी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले इस सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री भी इस राष्ट्रीय विमर्श में हिस्सा लेंगे। इसके अतिरिक्त, देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति, IIT, IIIT और NIT के निदेशक, उद्योगपति, नीति-निर्माता और वरिष्ठ शिक्षाविद भी सम्मेलन में सहभागी होंगे।
मुख्य विचार-बिंदु
सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा, शिक्षा-उद्योग समन्वय, नवाचार और अनुसंधान जैसे विषयों पर राउंड-टेबल चर्चा होगी। विशेष रूप से विकसित भारत-2047 के लिए शिक्षा के रोडमैप को आकार देने पर केंद्रित विमर्श आयोजित किया जाएगा।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की पृष्ठभूमि
देश में शिक्षा में व्याप्त विकृतियों के विरुद्ध 'शिक्षा बचाओ आंदोलन' चलाए जाने के बाद शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की स्थापना की गई थी। प्रारंभ में संस्था ने 6 आधारभूत विषयों पर कार्य किया था, जो अब विस्तारित होकर 11 विषयों, 3 आयामों, 3 कार्य विभागों और 2 अभियानों तक फैल चुका है।
यह संस्था भारतीय ज्ञान परंपरा को आधार बनाकर आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के साथ समन्वय स्थापित करने और देश की शिक्षा-व्यवस्था को एक वैकल्पिक दिशा देने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
सम्मेलन का महत्व
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब NEP-2020 के क्रियान्वयन की गति और उसके व्यावहारिक परिणामों को लेकर देशभर में व्यापक बहस जारी है। गौरतलब है कि उच्च शिक्षा में नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) बढ़ाने और रोजगार के साथ शिक्षा के जुड़ाव को मज़बूत करना भारत की प्राथमिक नीतिगत चुनौतियों में से एक बना हुआ है।
आगामी दिनों में इस सम्मेलन में उभरी सिफारिशें नीति-निर्माताओं तक पहुँचाई जाने की संभावना है, जो विकसित भारत-2047 के शैक्षणिक रोडमैप को और अधिक ठोस रूप दे सकती हैं।