18 सितंबर 2026
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विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026: स्वास्थ्य मंत्रालय का NCD सुरक्षित देखभाल पर ज़ोर, मार्च 2027 तक 100% NQAS सर्टिफिकेशन का लक्ष्य

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विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026: स्वास्थ्य मंत्रालय का NCD सुरक्षित देखभाल पर ज़ोर, मार्च 2027 तक 100% NQAS सर्टिफिकेशन का लक्ष्य

सारांश

भारत में हर साल होने वाली 63% मौतें गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं — और इसी संकट को केंद्र में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026' पर मार्च 2027 तक 100% NQAS सर्टिफिकेशन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026' मनाया।
थीम: 'गैर-संचारी रोगों (NCD) के लिए सुरक्षित देखभाल' ; भारत में कुल मौतों का 63% NCD से।
मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मार्च 2027 तक AAM-SHC के लिए 100% NQAS सर्टिफिकेशन का लक्ष्य रखा।
NFHS-6 के अनुसार 96% टीकाकरण और 90.6% संस्थागत प्रसव सार्वजनिक सुविधाओं में हो रहे हैं।
राज्यों ने अपने नवाचार साझा किए — झारखंड का मधुमेह-उच्च रक्तचाप जाँच मॉडल, केरल की 'हृदयारागम्' पहल, राजस्थान का SETU रेफरल ऐप।
उद्घाटन सत्र का समापन 'राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा शपथ' के साथ हुआ।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026' का राष्ट्रीय आयोजन किया, जिसकी थीम थी — 'गैर-संचारी रोगों (NCD) के लिए सुरक्षित देखभाल'। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य देशभर की स्वास्थ्य प्रणाली में एनसीडी की रोकथाम से लेकर दीर्घकालिक प्रबंधन तक हर स्तर पर मरीज़ सुरक्षा को संस्थागत रूप देना था। भारत में कुल मौतों में से लगभग 63 प्रतिशत गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है।

उद्घाटन सत्र और मुख्य संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने कहा कि मरीज़ सुरक्षा किसी एक विभाग या कार्यक्रम की जिम्मेदारी नहीं हो सकती — यह पूरी स्वास्थ्य प्रणाली की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से एनसीडी की रोकथाम, निदान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन में सुरक्षित देखभाल की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

पटनायक ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में हाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। NFHS-6 के आँकड़ों के अनुसार, देश में 96 प्रतिशत टीकाकरण और 90.6 प्रतिशत संस्थागत प्रसव सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से हो रहे हैं — जो एक उल्लेखनीय प्रगति है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता और सुरक्षा प्रथाओं को और सुदृढ़ किया जाए, खासकर मरीज़ रेफरल और देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करने में।

NQAS सर्टिफिकेशन का रोडमैप

आराधना पटनायक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से गुणवत्ता सुधार प्रयासों में तेज़ी लाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च 2027 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिर–उप स्वास्थ्य केंद्रों (AAM-SHC) के लिए 100 प्रतिशत राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) सर्टिफिकेशन का लक्ष्य हासिल किया जाना चाहिए, और उसके बाद आयुष्मान आरोग्य मंदिर–प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (AAM-PHC) को भी इसी दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देखभाल के सभी स्तरों पर मरीज़ सुरक्षा की संस्कृति को संस्थागत बनाने के लिए एक संरचित और समयबद्ध दृष्टिकोण अनिवार्य है।

उद्घाटन सत्र का समापन 'राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा शपथ' के साथ हुआ, जिसमें स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सभी हितधारकों ने सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

तकनीकी सत्र: विशेषज्ञों की चर्चा

उद्घाटन के बाद आयोजित तकनीकी सेमिनार में जाने-माने विशेषज्ञों ने एनसीडी देखभाल में रोगी सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के विषयों में शामिल थे — एनसीडी देखभाल में नुकसान का बोझ, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों का उपयोग, को-मॉर्बिडिटी की स्थिति में क्लीनिकल प्रक्रियाओं में सुरक्षा, और दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना। गौरतलब है कि एनसीडी से जूझ रहे मरीज़ों में अक्सर एक से अधिक बीमारियाँ होती हैं, जिससे दवा प्रबंधन और उपचार प्रोटोकॉल जटिल हो जाते हैं।

राज्यों के नवाचार और सर्वश्रेष्ठ प्रथाएँ

कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों की नवाचारी पहलों को साझा किया। उल्लेखनीय उदाहरणों में शामिल हैं —

झारखंड का व्यापक बुजुर्ग मधुमेह और उच्च रक्तचाप जाँच मॉडल, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग मरीज़ों तक पहुँच सुनिश्चित करता है। केरल की 'हृदयारागम्' पहल, जो एनसीडी की रोकथाम और नियंत्रण पर केंद्रित है। राजस्थान का SETU ऑनलाइन रेफरल एप्लिकेशन, जो मरीज़ों के समय पर रेफरल को डिजिटल रूप से सक्षम बनाता है। इन उदाहरणों ने यह स्पष्ट किया कि स्थानीय स्थितियों के अनुकूल, साक्ष्य-आधारित समाधान ही स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ कर सकते हैं।

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस की पृष्ठभूमि

विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अनुमोदित यह दिवस प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है। 2026 की थीम 'गैर-संचारी रोगों के लिए सुरक्षित देखभाल' ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीडी देखभाल के पूरे क्रम — स्क्रीनिंग से लेकर दीर्घकालिक प्रबंधन तक — में नुकसान को रोकना अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में राज्यों द्वारा NQAS सर्टिफिकेशन लक्ष्यों की दिशा में प्रगति, इस आयोजन की वास्तविक कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती जागरूकता से आगे क्रियान्वयन की है। मार्च 2027 तक 100% NQAS सर्टिफिकेशन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी तो है, पर राज्यों में बुनियादी ढाँचे और प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी इस रोडमैप के सामने बड़ी बाधा है। झारखंड, केरल और राजस्थान जैसे राज्यों के मॉडल स्थानीय नवाचार की संभावना दिखाते हैं, लेकिन बिना समुचित वित्त पोषण और जवाबदेही तंत्र के, ये सफलताएँ अन्य राज्यों तक नहीं पहुँच पाएंगी। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर छोड़ देती है कि NQAS जैसे सर्टिफिकेशन ढाँचे कागज़ पर प्रभावशाली दिखते हैं, पर ज़मीन पर इनका पालन असमान रहता है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 की थीम क्या थी?
2026 की थीम 'गैर-संचारी रोगों (NCD) के लिए सुरक्षित देखभाल' थी। यह थीम एनसीडी की स्क्रीनिंग से लेकर दीर्घकालिक प्रबंधन तक के पूरे क्रम में मरीज़ सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी।
भारत में NCD से होने वाली मौतों का प्रतिशत कितना है?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 63 प्रतिशत गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के कारण होती हैं। यह आँकड़ा NCD देखभाल में सुरक्षा को प्राथमिकता देने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
NQAS सर्टिफिकेशन का 2027 तक क्या लक्ष्य रखा गया है?
मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने मार्च 2027 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिर–उप स्वास्थ्य केंद्रों (AAM-SHC) के लिए 100 प्रतिशत राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) सर्टिफिकेशन प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद आयुष्मान आरोग्य मंदिर–प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (AAM-PHC) को भी इसी ढाँचे में लाने की योजना है।
किन राज्यों ने NCD सुरक्षित देखभाल में बेहतरीन मॉडल पेश किए?
कार्यक्रम में तीन उल्लेखनीय राज्य-स्तरीय नवाचार साझा किए गए — झारखंड का व्यापक बुजुर्ग मधुमेह और उच्च रक्तचाप जाँच मॉडल, केरल की 'हृदयारागम्' NCD रोकथाम पहल, और राजस्थान का SETU ऑनलाइन रेफरल एप्लिकेशन। इन मॉडलों को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया गया।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
यह दिवस प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) द्वारा अनुमोदन के बाद से मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा के प्रति वैश्विक जागरूकता और ठोस कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है।
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