ताड़ासन: शरीर-मन का संतुलन और स्वास्थ्य लाभ, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे
सारांश
मुख्य बातें
ताड़ासन (समस्थिति) एक मूलभूत योगासन है जो आज की गतिहीन कार्यशैली में बिगड़े शारीरिक पोस्चर को सुधारने और मन को स्थिर रखने में सहायक माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह सरल दिखने वाला आसन शरीर को कई स्तरों पर लाभ पहुँचाता है — रीढ़ से लेकर मानसिक स्थिरता तक। योग विशेषज्ञों के मुताबिक, अनेक अन्य योगासनों का आधार होने के कारण ताड़ासन को योग साधना में विशेष महत्व दिया जाता है।
ताड़ासन क्या है और इसका अर्थ
संस्कृत में 'ताड़' शब्द का अर्थ 'पर्वत' होता है, इसीलिए इसे पर्वत आसन भी कहते हैं। इसका दूसरा नाम समस्थिति है, जिसका अर्थ है 'समान और स्थिर खड़े रहना'। योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन अनेक जटिल योगासनों की नींव है और इसे नियमित करने से साधक का पूरा अभ्यास परिष्कृत होता है।
ताड़ासन करने की सही विधि
आयुष मंत्रालय द्वारा बताई गई विधि के अनुसार, ताड़ासन का अभ्यास निम्न चरणों में करें:
सबसे पहले दोनों पैरों के बीच लगभग 2 इंच की दूरी रखकर सीधे खड़े हों। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर कलाई को बाहर की ओर मोड़ें। इसके बाद धीरे-धीरे श्वास लेते हुए बाजुओं को सिर के ऊपर कंधों की सीध में ऊपर उठाएं। अब धीरे से एड़ियाँ ज़मीन से ऊपर उठाएं और पंजों पर संतुलन बनाएं। इस मुद्रा में 10 से 15 सेकंड रुकें और फिर सामान्य स्थिति में वापस आएं।
स्वास्थ्य लाभ: क्या कहते हैं विशेषज्ञ
योग विशेषज्ञों के अनुसार, ताड़ासन के नियमित अभ्यास से छाती, कंधे और पीठ की मांसपेशियों में आवश्यक खिंचाव आता है, जो आमतौर पर बैठकर काम करने से कमज़ोर पड़ जाती हैं। आयुष मंत्रालय के मुताबिक, इस आसन के लाभों में शामिल हैं:
शरीर का कद बढ़ने की संभावना में वृद्धि, स्लिप डिस्क की संभावना में कमी, शारीरिक संतुलन और एकाग्रता में सुधार, तथा रीढ़ की हड्डी को सुदृढ़ करना। यह ऐसे समय में विशेष रूप से उपयोगी है जब घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहने से पोस्चर सम्बंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।
सावधानियाँ और किसे करना चाहिए परहेज़
योग विशेषज्ञों के अनुसार, ताड़ासन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। लो ब्लड प्रेशर या चक्कर आने की समस्या से ग्रस्त लोगों को पंजों पर संतुलन बनाते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को यह आसन केवल किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करने की सलाह दी जाती है।
गौरतलब है कि अधिक देर तक इस मुद्रा में रहने से पैरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अभ्यास अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करें। शुरुआती अभ्यासियों को धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि योग को दिनचर्या में शामिल करना सबसे प्रभावी तब होता है, जब इसे सुबह खाली पेट, किसी हवादार स्थान पर किया जाए। ताड़ासन को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी दीर्घकालिक सुधार की संभावना रहती है।