27 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तिर्यक ताड़ासन से रीढ़ बनेगी लचीली, जानें सही विधि और 7 प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तिर्यक ताड़ासन से रीढ़ बनेगी लचीली, जानें सही विधि और 7 प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

सारांश

तिर्यक ताड़ासन एक सरल खड़े आसन है जो रीढ़ की लचीलापन, पाचन और फेफड़ों की क्षमता एक साथ बेहतर करता है। आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में मान्यता प्राप्त यह आसन कमर दर्द और कब्ज से राहत दिलाने में भी प्रभावी माना जाता है।

मुख्य बातें

तिर्यक ताड़ासन को आयुष मंत्रालय रीढ़ की लचीलापन और संतुलन सुधारने वाले प्रभावी आसन के रूप में मान्यता देता है।
इस आसन को 3 से 5 बार दोहराएँ और प्रत्येक मुद्रा में 10 से 30 सेकंड रुकें।
नियमित अभ्यास से कमर दर्द, कब्ज और कमर की चर्बी में कमी आती है।
फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और एकाग्रता व तनाव में सुधार होता है।
पीठ, रीढ़ या पेट में चोट वाले व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं को यह आसन सावधानी से या विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।

तिर्यक ताड़ासन — जिसे 'झूलते ताड़ के पेड़ की मुद्रा' भी कहा जाता है — आयुष मंत्रालय और प्रमुख योग संस्थानों के दिशा-निर्देशों में रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने और कमर दर्द से राहत दिलाने वाले एक प्रभावी खड़े आसन के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह आसन पेट, कमर और फेफड़ों पर एक साथ काम करता है, जिससे यह दैनिक योग दिनचर्या का अहम हिस्सा बन जाता है।

तिर्यक ताड़ासन क्या है

तिर्यक ताड़ासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें शरीर को कमर से बाईं और दाईं ओर बारी-बारी झुकाया जाता है। 'तिर्यक' का अर्थ है तिरछा या झुका हुआ, और 'ताड़ासन' का अर्थ है ताड़ के पेड़ जैसी मुद्रा। यह आसन सरल होने के बावजूद शरीर के कई अंगों पर एक साथ प्रभाव डालता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन में सजगता और नियंत्रित श्वास अनिवार्य है।

सही विधि: चरण-दर-चरण अभ्यास

सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हों और दोनों पैरों को कंधों की चौड़ाई जितना अलग रखें। हाथ शरीर के दोनों ओर सीधे रखें।

अब सांस भरते हुए दोनों हाथों की उंगलियाँ आपस में इंटरलॉक करें, हथेलियाँ ऊपर की ओर करके दोनों हाथ सिर के ऊपर सीधे उठाएँ और कोहनियाँ बिल्कुल सीधी रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए कमर से धीरे-धीरे बाईं ओर झुकें। 10 से 30 सेकंड तक इस मुद्रा में रुकें और सामान्य श्वास लेते रहें। फिर सांस भरते हुए वापस सीधे आएँ और दाईं ओर भी यही प्रक्रिया दोहराएँ। इस क्रम को 3 से 5 बार किया जा सकता है।

स्वास्थ्य लाभ

रीढ़ की हड्डी की लचीलापन बढ़ती है और कमर दर्द व साइड की जकड़न में उल्लेखनीय कमी आती है। पेट और आँतों की प्राकृतिक मालिश होने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज की समस्या दूर होती है।

बगल, कंधे, छाती और भुजाओं की मांसपेशियाँ एक साथ स्ट्रेच और मजबूत होती हैं। फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे साँस लेना सहज होता है। नियमित अभ्यास से संतुलन और एकाग्रता में सुधार आता है, तनाव कम होता है और शरीर की ऊर्जा बढ़ती है। इसके अलावा, कमर की अतिरिक्त चर्बी घटाने में भी यह आसन सहायक माना जाता है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

आयुष मंत्रालय की सलाह के अनुसार, जिन लोगों को पीठ, रीढ़ की हड्डी या पेट में हाल ही में चोट लगी हो, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।

नियमित अभ्यास की अहमियत

आजकल की गतिहीन जीवनशैली और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत के कारण रीढ़ और कमर से जुड़ी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। ऐसे में तिर्यक ताड़ासन जैसे सरल आसनों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना एक सुलभ और प्रभावी उपाय हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी नए योगाभ्यास की शुरुआत से पहले प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक से मार्गदर्शन लेना उचित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के गलत तकनीक से रीढ़ की समस्याएँ बढ़ भी सकती हैं। भारत में गतिहीन जीवनशैली से जुड़ी मस्कुलोस्केलेटल बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, और योग इसका सुलभ समाधान हो सकता है — बशर्ते जागरूकता के साथ-साथ सुलभ प्रशिक्षण ढाँचा भी हो। सरकारी योजनाओं में योग को बढ़ावा देना तब ही सार्थक होगा जब प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की पहुँच जन-जन तक सुनिश्चित की जाए।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिर्यक ताड़ासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
तिर्यक ताड़ासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें शरीर को कमर से बाईं और दाईं ओर झुकाया जाता है। यह रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने, कमर दर्द घटाने और पाचन सुधारने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित है।
तिर्यक ताड़ासन करने का सही तरीका क्या है?
ताड़ासन में सीधे खड़े हों, उँगलियाँ इंटरलॉक कर हाथ सिर के ऊपर उठाएँ और सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं या दाईं ओर झुकें। 10 से 30 सेकंड रुकें और इसे 3 से 5 बार दोहराएँ।
तिर्यक ताड़ासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ कौन से हैं?
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, कमर दर्द और जकड़न कम करता है, पाचन सुधारता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और कमर की चर्बी घटाने में सहायक है। साथ ही एकाग्रता और संतुलन में भी सुधार आता है।
किन लोगों को तिर्यक ताड़ासन नहीं करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय की सलाह के अनुसार, पीठ, रीढ़ की हड्डी या पेट में चोट वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को केवल प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
तिर्यक ताड़ासन कितनी बार और कितने समय तक करना चाहिए?
इस आसन को प्रतिदिन 3 से 5 बार दोहराया जा सकता है। प्रत्येक बार झुकी हुई मुद्रा में 10 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य श्वास लेते रहें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले